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मृतका धापू देवी व मृतक रामदेव बैरवा।
टोंक के 2 गांवों में मुक्ति धाम के हालात बहुत खराब हैं। रास्ता पानी से होकर श्मशान तक पहुंचता है। अंतिम संस्कार वाली जगह टीनशेड की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में बारिश में ही दाह संस्कार करना पड़ता है। कई बार डीजल और टायरों का इस्तेमाल कर दाह संस्कार करना
ये हालात मालपुरा उपखंड आटोली गांव और देवली उपखंड के संथली ग्राम पंचायत के गांधीग्राम (नंबर 2) गांव के हैं।
2 दिन में यहां बुजुर्ग महिला और एक व्यक्ति का अंतिम संस्कार मुश्किल से हो पाया। दोनों गांवों के मुक्ति धाम में टीन शेड नहीं हैं। परिजन ने बारिश के दौरान लकड़ियों के साथ टायर, डीजल, प्लास्टिक के खाली कट्टे लगाकर अंतिम संस्कार किया।
अटोली गांव में 3 फीट पानी से गुजरी अंतिम यात्रा
आटोली ग्राम पंचायत के श्मशान में तो 3 फीट पानी भर गया। ऐसे में शुक्रवार को बुजुर्ग महिला धापू देवी (60) का अंतिम संस्कार श्मशान के बाहर रास्ते पर करना पड़ा।
धापू देवी पत्नी रामदेव बैरवा की तबीयत 2 दिन से खराब चल रही थी। शुक्रवार सुबह उनका निधन हो गया। परिजन अंतिम संस्कार करने के निकले। श्मशान तक रास्ते में 3 फीट तक पानी भरा था। यही हाल श्मशान के भी थे। पानी भरा था।
मुक्ति धाम में टीनशेड भी नहीं था। सुबह 11.30 बजे श्मशान के बाहर एक ऊंचे स्थान पर अंतिम संस्कार करना पड़ा।
गांधीग्राम में डीजल डालकर अंतिम संस्कार
उधर, देवली के गांधीग्राम गांव में गुरुवार सुबह 8 बजे ग्रामीण रामदेव बैरवा का निधन हो गया। इस दौरान बारिश का दौर जारी था।
लोग शाम 4 बजे अर्थी लेकर श्मशान घाट पहुंचे। यहां फिर तेज बारिश शुरू हो गई। यहां भी टीनशेड नहीं। लोगों ने तिरपाल लगाया। चिता पर रबर के टायर, डीजल, शक्कर, प्लास्टिक के कट्टे लगाए।
पिता की चिता को बड़े बेटे शिक्षक बन्नालाल बैरवा और छोटे बेटे कंपाउंडर हनुमान बैरवा ने मुखाग्नि दी। बार-बार तेज बारिश से अग्नि बुझ रही थी। लोग डीजल, शक्कर, घी, टायर से दाह की कोशिश करते रहे। मुश्किल से दाह संस्कार हुआ।
लोगों ने बताया- पिछले साल गांधीग्राम (नम्बर 1) में रिटायर्ड फौजी कल्याण बैरवा की भाभी का निधन हुआ था। तब भी बारिश में बड़ी मुश्किल से अंतिम संस्कार हुआ था। सरपंच पति शंकर लाल मीणा ने श्मशान घाट में टीनशेड लगाने का आश्वासन दिया था।
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