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ब्यावर विधानसभा क्षेत्र के देवलता गांव में श्मशान का रास्ता न होने से पानी में होकर गुजरती है अर्थी।
ब्यावर विधानसभा क्षेत्र के टॉडगढ़ उपखंड में स्थित देवलता गांव के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव का 1100 साल पुराना श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए पक्का रास्ता नहीं है।
पिछले 48 घंटों में एक मौत के बाद रास्ते की समस्या के कारण अंतिम संस्कार अगले दिन तक टालना पड़ा। ग्रामीणों को अर्थी लेकर नदी-नालों से होकर जाना पड़ता है। इससे उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
आजादी के 78 साल बाद भी गांव में विकास नहीं पहुंच पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, सांसद और विधायक बदल गए, लेकिन किसी ने इस समस्या को हल नहीं किया।
मौजूदा विधायक शंकर सिंह रावत ने चुनाव के दौरान श्मशान घाट तक रास्ता बनवाने का वादा किया था। जीत के बाद वे गांव में नहीं आए। ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं की घोषणाएं सिर्फ वोट तक सीमित रहती हैं। उनका दर्द यह है कि उन्हें भारत के नागरिक होने का अधिकार भी नहीं मिला है।
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