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प्रदेश में 130 पंचायत समितियों और तीन हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के गठन पर 5 अगस्त को मंत्रिमंडल उप समिति की बैठक बुलाई गई है। विभाग के अनुसार कानूनी अड़चनों को दूर करते हुए अब नई ग्राम पंचायतों के अनुमोदन पर निर्णय लिया जाएगा। ग्रामीण विकास और पंचा
गौरतलब है कि वर्तमान में 365 पंचायत समितियां और 11,193 ग्राम पंचायतें हैं। इन्हीं से टूटकर ये नई पंचायत समितियां और ग्राम पंचायतें बनने जा रही हैं। प्रदेश में जनवरी से नई पंचायतों के सीमांकन और नवगठन की प्रक्रिया चल रही है। इस काम के पूरा होने के साथ ही वन स्टेट, वन इलेक्शन के काम को गति मिलेगी। इसी कड़ी में पंचायत चुनाव की राह खुल जाएगी। 17 दिसंबर 2024 में ही राज्य सरकार ने पंच-सरपंचों का कार्यकाल बढ़ाया था। इस कड़ी में सरपंचों को प्रशासक का काम देखने का दायित्व भी दिया गया था।
सरकार पर 75 करोड़ प्रति माह का अतिरिक्त भार बढ़ेगा
पंचायती राज में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन तथा सीमांकन के साथ ग्रामीणों के कामकाज को सुगम बनाने के लिए ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसके लिए पुनर्गठन और नवसृजन की प्रक्रिया चल रही है। एक अनुमान के अनुसार नई ग्राम पंचायतों के गठन के बाद सरकार पर हर माह 75 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार बढ़ेगा। राज्यभर में करीब 3 हजार ग्राम पंचायतों के प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। एक ग्राम पंचायत कार्यालय के संचालन में हर माह औसत ढाई लाख रुपए का खर्च आता है। इसमें कर्मचारियों के वेतन, जनप्रतिनिधियों का मानदेय, बिजली बिल, साफ-सफाई और अन्य खर्चे शामिल हैं।
ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया जून माह में पूरी होनी थी। अब पुनर्गठन होने के बाद नई ग्राम पंचायतों की संख्या के आधार पर पंचायती राज विभाग नए पद सृजित करने और वित्तीय आवश्यकता का प्रस्ताव तैयार करेगा। नवीन ग्राम पंचायत में ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ सहायक, एएनएम, कृषि पर्यवेक्षक, हैंडपंप मिस्त्री, सहित अन्य विभागों के पंचायत स्तरीय अधिकारियों के पद सृजित किए जाएंगे।
1 करोड़ से ज्यादा आबादी को राहत की उम्मीद
नई ग्राम पंचायतों के गठन का फायदा सर्वाधिक सीमा से सटे जिलों को मिलेगा। सवा करोड़ से अधिक आबादी के लोगों को नई ग्राम पंचायतों का फायदा मिलेगा। पंचायत चुनाव में बीकानेर, बाड़मेर, बालोतरा, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर और फलोदी में करीब 800 वोट हासिल करने वाले सरपंच व गांव की सरकार का हिस्सा बन जाएंगे।
उधर, सामान्य 34 जिलों में 2,550 औसत आबादी प्रति ग्राम पंचायत है। ऐसे में इन जगहों पर भी 1,250 में सरपंच या गांव की सरकार बनेगी। गौरतलब है कि इससे पहले इन जगहों पर 3,000 से 5,500 की आबादी पर प्रति ग्राम पंचायत का फार्मूला लागू था, जो इस बार घटते-घटते मरुस्थलीय और बारां के कुछ क्षेत्रों में 1,650 और सामान्य जिलों में औसत 2,550 की आबादी का रहा है। कलेक्टरों ने आबादी की गणना का आधार 2011 की जनगणना को माना है, जबकि पिछली बार भी यही आधार था।
भास्कर एक्सपर्ट – अशोक जैन, पूर्व उप सचिव, स्टेट इलेक्शन
22 हजार से ज्यादा पद बढ़ेंगे, नई लीडरशिप तैयार होगी
प्रदेश में 130 पंचायत समितियां बनने से करीब सवा दो हजार तक पद बढ़ जाएंगे। इनमें 260 तो प्रधान और उप-प्रधान रहेंगे, वहीं दो हजार पंचायत समिति सदस्य बनेंगे। इसी तरह ग्राम पंचायत तीन हजार बढ़ीं तो सरपंच और उप-सरपंचों की संख्या छह हजार बढ़ेगी। ग्राम पंचायत सदस्य पांच या इससे अधिक रहे तो ये आंकड़ा 14-15 हजार रहेगा। ऐसे में यह कुल मिलाकर 20 से 21 हजार रहेगा।
बताया जा रहा है कि इससे नई लीडरशिप की राह भी खुलेगी। हालांकि, प्रदेश में 11 से अधिक जिलों में प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव दिसंबर 2021 से जनवरी 2022 तक हुए थे। ऐसे में वन स्टेट, वन इलेक्शन के लिए पांच साल पूरा कराने की कानूनी दिक्कतें भी राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के समक्ष आ सकती हैं।
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