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जोधपुर के सरदारपुरा स्थित ज्वैलरी की दुकान पर राखियां लाइव तैयार की जा रही है।

बदलते समय के साथ राखी का स्वरूप भी बदल गया है। एक समय राखी जहां मौली के पवित्र धागे को बांधकर मनाई जाती थी, लेकिन अब राखी फैंसी हो चली है। जोधपुर के दुकानदार चांदी की राखियों को तैयार कर रहे हैं। इसी का जायजा लेने के लिए हम शहर के बाजार में पहुंचे। य

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काबरा ज्वैलरी के अमराराम पटेल ने बताया बदलते समय के साथ अब राखी का स्वरूप भी बदल चला है। पहले लोग रेशमी धागे से बनी हुई और मौली से बनी हुई राखी की डिमांड करते थे, लेकिन अब चांदी की राखियों की डिमांड बढ़ चुकी है।

इसी को ध्यान में रखते हुए हम स्पेशल चांदी की राखियां तैयार कर रहे हैं। जो 100 रुपए से लेकर 1200 रुपए तक की है। मौली हिन्दू धर्म में पवित्र धागा माना जाता है।

शहर में सबसे पहले साल 1998 में उनके यहां पर इस तरह की मौली में चांदी की डिजाइन की राखी बनाने की शुरुआत की गई थी। खास बात यह है कि जो धागा काम में लिया जाता है इन का रंग भी फेड नहीं होता है। इसी वजह से लोग इस तरह की राखियों को पसंद करते हैं।

बाजार में चांदी की राखियों को मौली में पिरोया जा रहा है।

बाजार में चांदी की राखियों को मौली में पिरोया जा रहा है।

मौली में पिरोकर चांदी की राखियां बनाई जाने लगी ऑसरदारपुरा में राखी खरीदने के लिए गोल बिल्डिंग से आई नैना ने बताया कि राखी का त्योहार नजदीक आ रहा है। इसलिए चांदी की राखी देखने के लिए आई। वैसे तो राखी का संबंध मौली से होता है, लेकिन अब अलग अलग प्रकार की मौली में पिरोकर चांदी की राखियां बनाई जाने लगी है जो काफी सुंदर होने के साथ ही आकर्षित भी करती है।

इटालियन सिल्वर की राखियां बनाई जा रही बता दें कि इस बार बाजार में रेशमी से लेकर चांदी की राखियों की धूम है। रेशमी राखी 20 रुपए से लेकर 150 रुपए तक कीमत की है। चांदी की राखी 100 रुपए से लेकर 1200 तक की है। दुकानदारों का दावा है कि इटालियन सिल्वर की राखियां बनाई जा रही है। जो 92.5 हॉलमार्किंग की है। ये जल्दी से काली नहीं पड़ती है।



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