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संस्कृत स्कूलों की तरक्की सिर्फ कागज़ों पर

झुंझुनूं जिले के 16 सरकारी संस्कृत विद्यालयों को 12वीं तक तो अपग्रेड कर दिया गया है, लेकिन नए सत्र की शुरुआत ही समस्याओं से हुई है। इन स्कूलों में न तो पढ़ाने के लिए टीचर्स हैं और न ही बच्चों के लिए किताबें उपलब्ध हैं। इस वजह से स्कूल प्रशासन, छात्र

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तरक्की मिली पर व्यवस्थाएं शून्य

खेतड़ी के राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय का नया भवन तो किसी आधुनिक स्कूल जैसा दिखता है, लेकिन हकीकत में यहां 12वीं तक की कक्षाएं तो शुरू कर दी गई हैं, पर पढ़ाई पूरी तरह ठप है। स्कूल में पढ़ाने के लिए टीचर तो दूर, विषयों को पढ़ाने वाले लेक्चरर तक नहीं हैं। यही हाल मंडावा के अपग्रेड हुए संस्कृत स्कूल का भी है, जहां केवल एडमिशन लेने की घोषणा हुई है, लेकिन न तो टीचर हैं और न ही बच्चों के लिए किताबें।

प्रिंसिपल नहीं, हेडमास्टर के भरोसे स्कूल

झुंझुनूं के ज़्यादातर अपग्रेड हुए संस्कृत स्कूलों में अभी तक प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई है। स्कूल हेडमास्टर के भरोसे चल रहे हैं, जिनका ध्यान सिर्फ़ प्रशासनिक कामों पर है। ऐसे में न तो पढ़ाई की कोई ठोस योजना बन पा रही है और न ही नए बच्चों को कोई सही दिशा मिल रही है।

किताबों की मांग में देरी और छपाई में अड़चन

अप्रैल में किताबों की डिमांड भेजी गई थी, लेकिन उस समय यह साफ नहीं था कि किस स्कूल में कौन से सब्जेक्ट पढ़ाए जाएंगे। जब 2 जुलाई को संस्कृत शिक्षा विभाग की कमिश्नर प्रियंका जोधावत ने सब्जेक्ट अप्रूव करने का ऑर्डर जारी किया, तब तक ऑनलाइन सिस्टम में किताबों की डिमांड लॉक हो चुकी थी। नतीजा यह हुआ कि अब तक न तो किताबें छपी हैं और न ही इन स्कूलों तक पहुंची हैं। अगर अब भी डिमांड भेजी जाए, तो छपाई और डिलीवरी की प्रक्रिया में पूरा अगस्त निकल जाएगा।

छात्र असमंजस में, पढ़ाई पर असर

स्कूलों में 12वीं की पढ़ाई शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन न तो सब्जेक्ट टीचर्स आए हैं और न ही किताबें मिली हैं। इस वजह से छात्र बहुत कन्फ्यूजन में हैं कि एडमिशन लें या किसी दूसरे स्कूल में जाएं। कई ग्रामीण छात्र, जिनके पास दूसरे विकल्प नहीं हैं, वे इस उम्मीद में स्कूल आ तो रहे हैं, लेकिन उनकी पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है।

शिक्षक संगठनों की राय

राजस्थान संस्कृत शिक्षा विभागीय शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष अनिल भारद्वाज ने बताया कि सरकार की यह पहल अच्छी है, लेकिन व्यवस्था की कमी के कारण यह योजना सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि झुंझुनूं जिले के सभी 16 अपग्रेड हुए स्कूलों में जल्द से जल्द टीचर्स और किताबें उपलब्ध कराई जाएं, ताकि बच्चों की पढ़ाई और एडमिशन पर बुरा असर न पड़े।

झुंझुनूं के इन स्कूलों की है यह हालत

झुंझुनूं जिले में कुल 16 सरकारी संस्कृत स्कूलों को 12वीं तक अपग्रेड किया गया है, जो खेतड़ी, मंडावा, सूरजगढ़, चिड़ावा, नवलगढ़, बगड़, बिसाऊ और झुंझुनूं शहर जैसे इलाकों में हैं। इनमें से ज़्यादातर स्कूल गांवों में हैं, जहां बच्चों के पास पढ़ाई के लिए दूसरे अच्छे विकल्प नहीं हैं।

सरकार की योजना क्यों अधूरी रह गई

किसी भी शिक्षा नीति को सही से लागू करने के लिए सिर्फ घोषणा काफी नहीं होती। इसके लिए बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, टीचर्स और पढ़ाई से जुड़ी चीजों को समय पर उपलब्ध कराना बहुत ज़रूरी होता है। अगर राज्य सरकार ने जुलाई में सब्जेक्ट्स को अप्रूव किया था, तो उसी के साथ किताबों और टीचर्स की नियुक्ति की प्रक्रिया भी समय पर पूरी कर लेनी चाहिए थी। अब अगस्त में एडमिशन की प्रक्रिया रुक गई है, जिसका सीधा असर बच्चों के पूरे शैक्षणिक सत्र पर पड़ रहा है।

प्रदेशभर में 224 स्कूलों को अपग्रेड करने की घोषणा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की एक योजना के तहत, पूरे राजस्थान में 224 संस्कृत स्कूलों को 10वीं से 12वीं तक अपग्रेड किया गया है। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में संस्कृत स्कूलों को एक साथ अपग्रेड किया गया है। योजना के तहत, हर स्कूल में विषयों की लिस्ट जुलाई में अप्रूव कर दी गई थी, लेकिन ज़मीन पर कोई बदलाव नहीं हुआ।



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