ग्रीस के एथेंस में हाल ही अंडर-17 विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाली भीलवाड़ा की बेटी अश्विनी विश्नोई सोमवार को अपने शहर पहुंची। रेलवे स्टेशन पर पूरा शहर उनके स्वागत में उमड़ा। परिवार और कोच ने कंधों पर उठा लिया। माला पहनाने की होड़ मच गई। लो
पहलवाना का बालाजी को प्रणाम…

भीलवाड़ा पहुंचकर अश्विनी ने रेलवे स्टेशन के पास हनुमान मंदिर जाकर भगवान को नमन किया।
विश्व रेसलिंग चैंपियनशिप में अंडर-17 गोल्ड लाने वाली वे राजस्थान की पहली खिलाड़ी हैं। इस उपलब्धि के बाद रविवार को उन्होंने जयपुर में CMR में सीएम भजनलाल शर्मा और सिविल लाइंस स्थित आवास पर डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा से मुलाकात की। सीएम और डिप्टी सीएम ने उनकी खुलकर तारीफ की।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी बधाई
डिप्टी सीएम का ट्वीट- राजस्थान की छोरी, छोरां स्यू कम कोनी
अश्विनी के साथ फोटो शेयर करते हुए डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने लिखा- राजस्थान की छोरी, छोरां स्यू कम कोनी। आज विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाली भीलवाड़ा की बेटी अश्विनी से सिविल लाइंस स्थित राजकीय आवास 384 पर आत्मीय भेंट की।
अंडर-17 की 65 किलो वर्ग में पाँचों मुकाबलों में बिना एक भी अंक दिए गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने न सिर्फ प्रदेश, बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया है। मज़दूर परिवार से निकलकर विश्व पटल पर तिरंगा लहराने वाली बेटी अश्विनी वास्तव में नवयुवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनकी यह सफलता दिखाती है कि संकल्प, परिश्रम और समर्पण से कोई भी शिखर अजेय नहीं।

डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा से मुलाकात के दौरान अश्विनी विश्नोई।
बोलीं- मेरा अगला टारगेट ओलिंपिक में गोल्ड
अश्विनी बिश्नोई ने 65 किलो वर्ग में कजाकिस्तान की पहलवान मुखायो राखीमजोनोवा से 3-0 से मात देकर फाइनल में गोल्ड जीता। सोमवार को भीलवाड़ा पहुंचने पर उन्होंने कहा- वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड लाने की खुशी अलग है। आज रेलवे स्टेशन पर सब लोग मुझे प्यार देने के लिए आए। वर्ल्ड चैंपियनशिप में ये मेरा पहला मेडल है।
ये मेडल पहले भी आ सकता था लेकिन पिछली बार कमर में इंजरी के कारण मौका हाथ से निकल गया था। अब मेरा अलगा टारगेट ओलिंपिक में भारत के लिए गोल्ड लाना है।
मैं अपनी इस कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता और कोच को देना चाहूंगी। इनकी बदौलत आज मैं यहां तक पहुंची।
मेरा तमाम लड़कियों को यही संदेश है कि वे भी गेम्स में आएं और जिले-प्रदेश का नाम रोशन करें। रेसलिंग ही नहीं, चाहे गेम कोई भी हो उन्हें आगे जाकर गेम में खेलना चाहिए।

कोच ने कंधों पर उठाया। स्वागत में उमड़ा शहर।
पिता बोले- सब कुछ झोंक दिया
अश्विनी के पिता मुकेश विश्नोई कपड़ा फैक्ट्री में मिल मजदूर हैं। सोमवार को बेटी के घर आगमन पर वे बोले- मैंने अश्विनी को हर मौके पर प्रेरित और प्रोत्साहित किया। बचपन से ही वह अनुशासित और संघर्षशील है। कठिन मुकाबलों में उसने हुनर दिखाया है।
रेसलिंग की विश्व चैंपियनशिप में राजस्थान का पहला गोल्ड लाई है। एशियन चैंपियनशिप में भी 4 गोल्ड ला चुकी है। भीलवाड़ा के जितने भी पहलवान हैं वे एशिया और विश्व चैंपियन बनें। देश का नाम, गुरु और माता पिता का नाम रोशन करें। ओलिंपिक में गोल्ड लाएं।
गोल्ड लाने में संघर्ष इतना है कि दिन रात भी कम पड़ जाएंगे। मेरे पास भी आर्थिक रूप से जो कुछ था, सब लगा चुका। इधर-उधर से व्यवस्था कर ही काम चल रहा है। मैं लड़की लड़का में भेद नहीं करता। अब यही चाहता हूं कि बेटी 2028 में भारत के लिए ओलिंपिक में गोल्ड लाए।

फाइनल मुकाबले समेत 5 मुकाबलों में अश्विनी ने 1 भी पॉइंट विरोधी पहलवान को लेने नहीं दिया।
कोच बोले- 3-3 घंटे नियमित अभ्यास किया
अश्विनी के कोच ने कहा- अश्विनी की उपलब्धि तारीफ के काबिल है। वह काफी मेहनती है। श्रीराम शाला में उसने रोजाना 3 घंटे सुबह और 3 घंटे शाम को नियमित अभ्यास किया। वह भीलवाड़ा जैसे छोटे शहर के पहलवानों और खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। छोटे शहर के खिलाड़ी भी दुनिया के किसी भी कोने में जीत सकते हैं।
ग्रीस में हुए फाइनल मुकाबले समेत 5 मुकाबलों में अश्विनी ने प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी को एक भी पॉइंट नहीं लेने दिया।
बता दें कि पिछले महीने 1 जुलाई को अश्विनी बिश्नोई ने वियतनाम में एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप अंडर-17 में भी भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता था। ग्रीस में हुई रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय टीम में भीलवाड़ा की दो महिला पहलवान शामिल थीं। अश्विनी बिश्नोई के अलावा कशिश गुर्जर भी टीम का हिस्सा रहीं।
राजस्थान कुश्ती संघ के अध्यक्ष राजीव दत्ता ने कहा- यह शुरुआत है। अब हर प्रतियोगिता में राजस्थान के पहलवान देश का नाम रोशन करेंगे।
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