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शिक्षा विभाग ने एक ही आदेश में साढ़े चार हजार से ज्यादा प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए तो राजधानी जयपुर में सबसे ज्यादा उथल-पुथल हुई। जयपुर सहित राज्यभर के सैकड़ों टीचर्स को दो सौ से पांच सौ किलोमीटर लंबी दूरी तय करके अब नए स्थान पर काम करना होगा। ये किसी क
जैसलमेर कम हो गए 11 प्रिंसिपल
जैसलमेर में कुल 96 प्रिंसिपल के ट्रांसफर हुए। इससे यहां 11 स्कूलों में अब प्रिंसिपल नहीं रहे। दरअसल, जैसलमेर से जैसलमेर में तो महज बीस ही ट्रांसफर हुए हैं। शेष 74 प्रिंसिपल को जैसलमेर से अन्यत्र भेज दिया गया। सिफारिश और डिजायर के आधार पर ये प्रिंसिपल अपने-अपने गृह जिलों में चले गए। वहीं अन्य जिलों से जैसलमेर में भी तबादले हुए। इससे ये संख्या बढ़कर 85 तक पहुंची, लेकिन 11 स्कूल फिर भी बिना प्रिंसिपल के रह गए। कमोबेश ऐसे ही हालात अन्य जिलों के भी है।
भरतपुर से छह सौ किलोमीटर दूर बांसवाडा ट्रांसफर
बांसवाड़ा को इस ट्रांसफर लिस्ट से फायदा हुआ है। यहां से 72 प्रिंसिपल का ट्रांसफर हुआ लेकिन 79 की पोस्टिंग हुई। 92 में से 53 को तो बांसवाड़ा से बांसवाड़ा में ही इधर-उधर किया गया था। वहीं अन्य जिलों से भी 39 प्रिंसिपल को बांसवाड़ा में लगाया गया है। इसमें मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर से तीन प्रिंसिपल का ट्रांसफर साढ़े छह सौ किलोमीटर दूर बांसवाड़ा में किया गया है।
सात सौ किलोमीटर दूर से बाड़मेर ट्रांसफर
कभी डार्क जोन में रहे बाडमेर को भी इस ट्रांसफर लिस्ट से फायदा हुआ है। दरअसल, यहां से 102 प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए गए हैं। जिसमें 37 को बाड़मेर में ही लगाया गया लेकिन 65 प्रिंसिपल बाडमेर छोड़ अपने गृह जिलों में या फिर सुविधाजनक जिलों में चले गए। वहीं बड़ी संख्या में प्रिंसिपल को अन्य जिलों से बाड़मेर भेजा गया है। इसमें सर्वाधिक नागौर से बीस प्रिंसिपल साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर बाड़मेर भेजे गए हैं। चार प्रिंसिपल को तो अलवर से बाड़मेर भेजा गया है। दोनों जिलों के बीच सात सौ किलोमीटर की दूरी है। करीब चार सौ किलोमीटर दूर अजमेर से भी सात प्रिंसिपल को बाडमेर भेजा गया है।
बिना आवेदन प्रति प्रिंसिपल एक लाख का खर्च
अगर किसी प्रिंसिपल को सरकार बिना आवेदन किए ट्रांसफर करती है तो एक लाख रुपए का खर्च आता है। ऐसे प्रिंसिपल को नए पोस्टिंग स्थल पर जाने के लिए दस दिन की छुट्टी के रुपए, चार जनों के टिकट, करीब बीस हजार रुपए ट्रक ट्रांसपोर्ट के रुपए देने पड़ते हैं। इनके अलावा भी कई छोटे बड़े खर्च को मिलाकर एक लाख रुपए का सरकार को भुगतान करना पड़ता है।
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