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प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में सबसे प्राचीन ब्राह्मी लिपि को शामिल किया है। संस्कृत शिक्षा विभाग ने पहल करते हुए कक्षा 7वीं की संस्कृत प्रबोध (द्वितीय भाग) पाठ्यपुस्तक में ब्राह्मी लिपि शामिल की है। लिपि को पढ़ने के बाद विद्यार्थी कई ग्रंथ, पांडुलिपि
शिक्षाविदों का मानना है कि 7वीं से ही ब्राह्मी लिपि का अध्ययन विद्यार्थियों में भारतीय परंपरा की बौद्धिक धरोहर से गहराई से जोड़ेगा। संस्कृत शिक्षा की इस किताब में इस लिपि को शामिल करने की सिफारिश पाठ्यक्रम निर्माण समिति ने की थी। इस समिति के अध्यक्ष प्रो. वाई. एस. रमेश के नेतृत्व में समिति ने गहन अध्ययन और विमर्श के बाद यह निर्णय लिया।
छात्र ब्राह्मी लिपि को नियमित पाठ्यपुस्तक के रूप में पढ़ सकेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लालकिले से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ज्ञान भारतम् योजना का उल्लेख किया था। इसी संदेश को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान का यह कदम शिक्षा, संस्कृत शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श पहल माना जा रहा है।
शिक्षकों को देंगे लिपि का प्रशिक्षण
संस्कृत शिक्षा विभाग के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 25 से 30 अगस्त तक 7 संभागों में प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे। पहले चरण में 560 शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे।
लिपि विशेषज्ञ एवं वैदिक हेरिटेज पाण्डुलिपि शोध संस्थान के समन्वयक डॉ. सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि सबसे पहले हमारा लेखन ब्राह्मी लिपि से ही प्रारंभ हुआ था। वेद भी इसी लिपि में लिखे गए। इस सत्र में ब्राह्मी लिपि को सिलेबस में शामिल किया है। संस्कृत शिक्षा विभाग की योजना है कि अन्य प्रमुख लिपियां भी सिलेबस में शामिल की जाए। इनमें शारदा लिपि, मेवारी लिपि, ग्रंथ लिपि, नंदी लिपि और पुरानी देवनागरी लिपि को भी सिलेबस में शामिल किया जा सकता है।
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