स्मार्ट मीटर हटाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर बुधवार को झुंझुनूं बंद है। शहर की प्रमुख बाजारों में सुबह से ही दुकानों के शटर बंद हैं। बस स्टैंड जैसे इलाकों में दुकानें बंद हैं। जहां रोजाना सुबह से रौनक दिखती है। सिर्फ मेडिकल स्टोर और दूध-सब्जी जैसी आवश
वहीं संघर्ष समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ साबित हो रहे हैं। बिजली कटौती की समस्या पहले से है, अब प्रीपेड और महंगे बिल ने हालात और खराब कर दिए हैं।
निजी स्कूल बन्द
बंद के असर का दायरा सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं रहा। निजी स्कूलों ने मंगलवार रात ही घोषणा कर दी थी कि बुधवार को संस्थान बंद रहेंगे। सुबह से ही स्कूलों में न तो बच्चे पहुंचे, न शिक्षक। इसी तरह निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी बसें खड़ी रखीं, जिससे आम यात्रियों को परेशानी हुई। झुंझुनूं कोर्ट में भी बार यूनियन ने कार्य बहिष्कार किया। वकीलों ने अदालत परिसर में नारेबाजी कर स्मार्ट मीटर विरोधी आंदोलन का समर्थन जताया।
इधर सरकार ने भी स्मार्ट मीटर से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के लिए दावे किए हैं-
- दावा है कि स्मार्ट मीटर लगाने से बिजली बिल अधिक नहीं आएगा। यह बिलिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाता है।
- स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ता को कोई भुगतान नहीं करना है और न ही अन्य कोई चार्ज उनके बिल में जुड़ेगा।
- स्मार्ट मीटर में बिजली बिल निर्धारित तिथि को ऑटो जनरेट होगा। भुगतान के लिए सभी मौजूदा विकल्प उपलब्ध रहेंगे।
- सरकार के आदेश के तहत पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदलना जरूरी है। सभी उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर लगवाना अनिवार्य है।

देखें बंद का असर कैसा रहा…
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