राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि बिहार के रहने वाले मजदूर मुन्ना ने नौकरी दिलाने के बहाने अपनी बहन बबीता और जीजा प्रदीप राव को जाेधपुर बुलाया था। बबीता पति के साथ कुशीनगर (UP) से जोधपुर आ गई और अपने भाई के साथ रहने लगी। कुछ दिन बाद भ
- आखिर मुन्ना ने अपनी बहन के पति की हत्या क्यों की?
- इस खतरनाक साजिश में कौन-कौन उसके साथ शामिल था?
जवाब जानने के लिए पढ़िए आगे की कहानी…

पुलिस की पूछताछ में बबीता ने अपने पति के लापता होने के मामले में अपने भाई मुन्ना पर शक जताया था। उसे नहीं पता था कि भाई ही उसके पति का हत्यारा निकलेगा। -फोटो AI से जनरेटेड
मर्डर में मुन्ना के 2 दोस्त भी साथ पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि मुन्ना 12 अगस्त 2008 की रात अपने साथी रविंद्र व एक अन्य दोस्त प्रदीप कुमार के साथ मिलकर अपने जीजा प्रदीप राव की हत्या कर दी। मुन्ना नौकरी लगाने का बहाना बनाकर प्रदीप राव को न्यू पावर हाउस क्षेत्र में रेलवे लाइन के पास झाड़ियों में ले गया था। वहां चाकू से गला रेत दिया था। इसके बाद चाकू वहीं छोड़कर वहां से निकल कर उसने अपने खून से सनी जींस व टी शर्ट थैले में डालकर फेंक दी। कपड़े बदल कर घर लौट आया। बहन बबीता को बताया कि उसका पति नाइट शिफ्ट कर रहा है।
मुन्ना ने बताया कि बबीता ने लव मैरिज की थी, जो उसके पिता और परिवार वालों को पसंद नहीं थी। वह प्रदीप राव को मारना चाहता था। इसीलिए उसने धोखे से बबीता और उसके पति प्रदीप राव को जोधपुर बुलाया। फिर अपने दोस्त रविंद्र और प्रदीप के साथ मिलकर अपने जीजा (प्रदीप राव) की हत्या कर दी।
मुन्ना को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने 20 अगस्त को प्रदीप कुमार को भी पकड़ लिया। रविंद्र सिंह उस समय फरार हो गया था। उसे तीन साल बाद 4 सितंबर 2011 को गिरफ्तार किया गया था।

मुन्ना ने अपने जीजा प्रदीप राव काे नौकरी के बहाने सुनसान इलाके में ले जाकर अपने साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी थी। -फोटो AI से जनरेटेड
कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद मुन्ना व प्रदीप कुमार के खिलाफ मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला। 30 अक्टूबर 2010 को दोनों को आजीवन कारावास व 30 हजार का जुर्माना और जुर्माना नहीं अदा करने पर एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। वहीं रविंद्र को 17 नवंबर 2014 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
इस सजा के खिलाफ मुन्ना व प्रदीप कुमार की ओर से 2011 में और रविंद्र सिंह की ओर से 2014 में हाईकोर्ट में अपील दायर की गई। जस्टिस निर्मलजीत कौर व जस्टिस विनीत माथुर के कोर्ट में सुनवाई चली।
वकील महेश बोड़ा ने तर्क दिया कि डॉक्टर पीसी व्यास ने 14 अगस्त को बॉडी का पोस्टमाॅर्टम किया, जिसकी रिपोर्ट में कहा गया कि शव चार से पांच दिन पुराना है। ऐसे में बबीता 12 अगस्त को गुमशुदगी बता रही है, जो संभव नहीं है।

युवक अपने साले के साथ नौकरी के लिए गया था, लेकिन तीन दिन बाद उसका शव मिला। -फोटो AI से जनरेटेड
इस पर पब्लिक प्रोसिक्यूटर धीरेंद्र सिंह व विष्णु कच्छवाह की ओर से दलील दी गई कि बॉडी 14 अगस्त को बरामद हुई। बरामदगी में कॉन्स्टेबल हीराराम के रिकवरी मेमो में 14 अगस्त को बरामदगी में साइन है। पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट 17 अगस्त 2008 की थी। उसमें शव पांच दिन पुराना बताया गया। इसका मतलब हत्या 12 से 13 अगस्त के बीच हुई थी।
दोनों पक्षों का तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि रविंद्र सिंह व प्रदीप कुमार के खिलाफ मुन्ना और बबीता के बयानों के अलावा कोई सबूत नहीं मिला है। ऐसे में संदेह का लाभ देकर दोनों को बरी किया जाता है। आरोपी मुन्ना की अपील को खारिज कर आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा गया था।
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