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एक्सीडेंट स्पॉट का मंजर देख रूह कांप गई। जगह-जगह खून बहकर जम गया था। बच्चों के जूते-चप्पल, महिलाओं की चूड़ियां बिखरी थी। कुत्ते शवों के टुकड़े नोच रहे थे।

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ये कहना है उन चश्मदीदों का जो दौसा में पिकअप-कंटेनर टक्कर के बाद सबसे पहले मनोहरपुर–शाहपुरा नेशनल हाईवे (148) पर पहुंचे।

मंगलवार-बुधवार की रात 3:35 बजे सीकर के खाटूश्यामजी से दर्शन कर यूपी के एटा जिले के असरौली गांव का परिवार पिकअप में लौट रहा था।

सैंथल थाना क्षेत्र के बापी इंडस्ट्रियल एरिया में बंशीवाल पेट्रोल पंप के पास पिकअप खड़े ट्रोले में जा घुसी। हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई।

6 लोगों का इलाज जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में चल रहा है। भास्कर ने चश्मदीदों के बात कर हादसे का कारण और भयावहता जानने की कोशिश की।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

तस्वीर उस पिकअप की है, जिसमें ड्राइवर समेत 25 लोग बैठे थे। इनमें से 11 की मौत हो गई।

तस्वीर उस पिकअप की है, जिसमें ड्राइवर समेत 25 लोग बैठे थे। इनमें से 11 की मौत हो गई।

‘झपकी लगी, तिरपाल बांधने के एंगल अंदर घुसे, इसी से हुई ज्यादा मौतें’

रात की पुलिस गश्त पर पेट्रोलिंग टीम के साथ जो ड्राइवर थे, उन्होंने नाम न छापने की शर्त पर भास्कर से बात की। ड्राइवर ने बताया- पिकअप ड्राइवर को अचानक नींद की झपकी आई और वह गाड़ी को नियंत्रित नहीं कर सका।

हालांकि वह स्वयं तो बच गया, लेकिन हादसे में पिकअप में सवार उसकी बेटी की भी मौत हो गई। हादसे में मारे गए तीन बच्चों के शव पर सिर का ऊपरी हिस्सा था ही नहीं। सिर की ऊपरी हड्‌डी टूट गई थी।

पिकअप में तिरपाल लगाने के लिए लोहे के एंगल की छत सी बना रखी थी। ट्रोले से टकराने के बाद वह अंदर की ओर मुड़ गई। जिससे अंदर बैठे लोगों के सिर में गंभीर चोटें आई।

संभवतया: ज्यादा मौत का कारण यही है। पिकअप सवार एक ही गांव (एटा का असरौली) के रहने वाले थे और इनमें से दो–तीन लोग आपस में रिश्तेदार थे।

मौके पर पहुंची टीम ने देखा पिकअप बुरी तरह ट्रोले में फंसी हुई थी। घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद एक ट्रक की मदद से पिकअप निकालने की कोशिश की, लेकिन नहीं निकाल पाए।

बाद में ट्रोले के ड्राइवर से ही ट्रोला आगे लेने को कहा। इसके बाद पिकअप को बाहर निकाला जा सका। साढ़े चार बजे तक दौसा सरकारी अस्पताल में घायलों को पहुंचा दिया गया था।

महिला नींद में थीं, जब हादसा हुआ। बच गई तो लोगों से पूछने लगी- क्या हुआ है, मैं कहां हूं?

महिला नींद में थीं, जब हादसा हुआ। बच गई तो लोगों से पूछने लगी- क्या हुआ है, मैं कहां हूं?

भेजे का एक हिस्सा कुत्ते खा गए, सोते में आई मौत इसलिए संभल न सके

जहां हादसा हुआ, उसके ठीक सामने रवि कुमार का ढाबा है। हादसे के वक्त वह घर पर सो रहे थे। सूचना मिलने पर सुबह करीब चार बजे मौके पर पहुंचे।

रवि ने बताया कि घायलों के शरीर से बहुत ज्यादा खून बहकर हाईवे पर जगह–जगह जम गया था। भेजे का एक टुकड़ा भी वहां गिरा हुआ था जिसे कुत्ते नोचकर खा गए। बाद में खून पर मिट्‌टी डलवाकर हादसे की जगह को साफ करवाया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बासड़ी बायपास की ओर से पिकअप आई और पास के ढाबे के बाहर खड़े ट्रोले में जा टकराई। लोगों का दावा है कि ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दब जाने से हादसा इतना भीषण हुआ।

कई डेड पॉइट्स, रोड लाइट नहीं, आवारा पशु सबसे बड़ा कारण

दौसा से आंधी के बीच नेशनल हाईवे 148 पर 8 डेड पॉइंट्स हैं। रिपोर्टर ने करीब 3 किमी पैदल चलकर इन पॉइंट्स और खतरों को समझने का प्रयास किया।

  • दो किमी में चार महीने से रोड लाइटें बंद: इलाके के लोगों ने बताया कि चार महीने से बापी से लेकर बासड़ी बायपास के दो किमी एरिया में रोड लाइट्स बंद पड़ी हैं। दो–तीन बार विभाग को शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। अब हादसा होने के बाद एनएचआई, आरटीओ, पुलिस और अधिकारी सब आ गए। शिकायत पर कोई ध्यान नहीं देता।
  • आवारा पशु : इस पूरे हाईवे पर दौसा से आंधी तक करीब 12 किलाेमीटर में आवारा पशुओं का हाईवे पर टहलना आम है। लगभग हर 300 मीटर पर यह समस्या है। सबसे ज्यादा हादसे इसी वजह से होते हैं।
सड़क पर आवारा पशु इसी तरह घूमते रहते हैं। कई बार अचानक गाड़ी के सामने आ जाते हैं।

सड़क पर आवारा पशु इसी तरह घूमते रहते हैं। कई बार अचानक गाड़ी के सामने आ जाते हैं।

  • हाईवे पर घुमाव: बापी, बासड़ी, खुरी कलां और चाालाना बाजाली मोड़ पर एकदम सीधा हाईवे अचानक घुमाव ले लेता है। यहां से निकलने के बाद ड्राइवर अक्सर गाड़ी से नियंत्रण खो देते हैं क्योंकि सड़क किनारे ढाबे पर खड़े ट्रकों और हाईवे के बीच 5 से 8 फीट का ही गैप होता है।
  • ट्रक ले–बाय : जहां हादसा हुआ, वहां बासड़ी बयपास की ओर से आते समय करीब साढ़े पांच मीटर लंबा ट्रक ले बाय डिवाइडर बना हुआ है। इसके डिजाइन में भी खामी है। यह ड्राइवर को अचानक सड़क के बीचों बीच आए किसी डिवाइडर जैसा नजर आने लगता है। आरटीओ स्टाफ ने भी स्वीकारा कि कई बार कार, ट्रक बस ट्रैक्टर इन डिवाइडर्स पर चढ़कर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।
  • साइन बोर्ड, रिफ्लेक्टर्स की कमी : हाईवे पर हिंदी और इंग्लिश में डिवाइडर, ले बाय, खतरा, घुमाव और दुर्घटना प्रोन जोन जैसे जरूरी साइन बोर्ड नहीं है। हाइवे के बीचों बीच सफेद पटि्टयों से इशारा ज्यादातर ड्राइवर्स नहीं समझ पाते।
हादसे के बाद आरटीओ, एनएचआई और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हाईवे की इंजीनियरिंग का जायजा लिया।

हादसे के बाद आरटीओ, एनएचआई और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने हाईवे की इंजीनियरिंग का जायजा लिया।

सुबह सवा दस बजे एसडीएम की गाड़ी भी टकराई

बुधवार सुबह करीब सवा दस बजे दौसा एसडीएम की गाड़ी भी चारा लादकर ला रहे ट्रैक्टर ट्रॉली से टकरा गई। हालांकि किसी को चोट नहीं आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस हाईवे पर महीने में तीन से चार हादसे सामान्य बात हो गई है।

खाटू मेले के दौरान यूपी और एमपी से आने वाले श्रद्धालुओं के चलते इस हाईवे पर वाहनों और लोगों का अत्यधिक दबाव रहता है। पिछले साल चालाना बालाजी मोड़ पर हुए वाहन हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई थी।

परिजनों को सौंपे शव, घायलों को अस्पताल से छुट्‌टी

दौसा अस्पताल में भर्ती सभी घायलों को इलाज के बाद छुट्‌टी दे दी गई है। वहीं पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। गंभीर रूप से घायल लोगों का जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रोमा सेंटर में इलाज चल रहा है।

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