बनारस की आत्मा और घाटों की शाश्वत छवि अब गुलाबी नगरी जयपुर में रंगों और ब्रश स्ट्रोक्स के माध्यम से जीवंत हुई।
बनारस की आत्मा और घाटों की शाश्वत छवि अब गुलाबी नगरी जयपुर में रंगों और ब्रश स्ट्रोक्स के माध्यम से जीवंत हुई। आईसीए गैलरी में शुक्रवार से शुरू हुई ग्रुप एग्जीबिशन ‘बनारस: द सेक्रेड घाट्स’ में 5 राज्यों से आए 12 नामचीन आर्टिस्ट्स के 36 आर्टवर्क्स प्र
प्रदर्शनी का उद्घाटन विद्यासागर उपाध्याय, विनय शर्मा, मनीष शर्मा, अभिनव बंसल और आनंद एम. बेकवाड़ ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस आयोजन को हेम राणा, अमित शर्मा और रवि ठाकुर ने क्यूरेट किया।

यह प्रदर्शनी गंगा घाटों की पवित्रता, रहस्य और वहां की रात्रिकालीन शांति को नए कलात्मक दृष्टिकोण से सामने लाती है।
कैनवास पर घाटों की मौनता और जीवन के रंग प्रदर्शनी में उड़ीसा, वेस्ट बंगाल, राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र के कलाकार आनंद एम. बेकवड़, दिपांकर चंदा, मानष रंजन जेना, मनीष शर्मा, मुकेश साह, परमेश पॉल, संजय एन. राउत, सौमेन साहा, सुकांता दास, तृप्ति जोशी, विनय शर्मा और विवेक निम्बोलकर की कृतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इनमें इंस्टॉलेशन, इंक ऑन पेपर, ऐक्रिलिक ऑन कैनवास और मिक्स-मीडिया का प्रयोग कर बनारस के घाटों को स्थायित्व और अस्थायित्व के बीच एक जीवित सेतु के रूप में चित्रित किया गया।

12 नामचीन आर्टिस्ट्स के 36 आर्टवर्क्स प्रदर्शित किए गए।
कलाकारों की पेंटिंग्स में गंगा और शिव की प्रतीकात्मकता, बनारस का भक्तिमय जीवन, रात्रिकालीन शांति और पूर्वजों व सृजन के बीच संवाद जैसी विविध थीम दिखीं। परमेश पॉल ने गंगा और शिव को ऐक्रेलिक पेंटिंग्स में नया रूप दिया। दिपांकर चंदा ने अपनी शृंखला से एकांत और आध्यात्म को उकेरा। तृप्ति जोशी ने साधारण अनुष्ठानिक वस्तुओं को दृश्य मंत्रों में बदला। विवेक निम्बोलकर ने जीवन, ऊर्जा और अध्यात्म के चक्रों को दर्शाया। सुकांत दास ने ज्योतिर्लिंग और शिव की पुनर्कल्पना की।

कलाकारों की पेंटिंग्स में गंगा और शिव की प्रतीकात्मकता, बनारस का भक्तिमय जीवन, रात्रिकालीन शांति और पूर्वजों व सृजन के बीच संवाद जैसी विविध थीम दिखीं।
इस मौके पर आईसीए गैलरी से अभिनव बंसल ने कहा कि जयपुर को अक्सर छोटी काशी कहा जाता है। ऐसे में यह प्रदर्शनी बनारस और जयपुर की आध्यात्मिक विरासत को जोड़ने का कार्य करती है।
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