एक सितंबर 2025… चूरू जिले का सोनपालसर गांव। अचानक जमीन धंसने लगी। सपाट बीहड़ में महज 8 घंटे में 50 फीट गहरा गड्ढा हो गया।
यह इलाका राजस्थान के प्रसिद्ध थार मरुस्थल का हिस्सा है। पिछले करीब सवा साल में इस रेगिस्तान में इस तरह से मिट्टी धंसने का यह तीसरा मामला है।
जमीन धंसने से सोनपालसर के लोग दहशत में हैं। किसी को समझ में नहीं आ रहा कि ये क्या हो रहा है?
इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने भू-गर्भ विशेषज्ञ से बात की। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं पांच बड़ी वजहों से होती हैं।
पहले जानिए, क्या हुआ है सोनपालसर गांव में…

प्रशासन ने गड्ढे के चारों ओर रस्सी बांध दी है। ग्रामीणों को भी गड्ढे के पास जाने से मना किया गया है।
चूरू जिले के सोनपालसर गांव में एक सितंबर को सुबह सात बजे एक ग्रामीण ने जमीन में मिट्टी को धंसते हुए देखा। जहां मिट्टी धंस रही थी, वहां लगातार गड्ढा होता जा रहा था। उसने ग्रामीणों को खबर दी।
जब लोग मौके पर पहुंचे तो यह गड्ढा काफी बड़ा हो चुका था। घबराए हुए ग्रामीणों ने प्रशासन को इसकी सूचना दी। ऐहतियात के तौर पर प्रशासन ने मौके पर लोगों को जाने से रोका है। यहां चारों ओर रस्सी बांध दी गई है।
लोग बोले- रिस्क है, पता नहीं कब कहां से जमीन धंस जाए दैनिक भास्कर ऐप के रिपोर्टर इस पूरे मामले को जानने मौके पर पहुंचे। थोड़ा पास जाने लगे तो लोगों ने ही रोक दिया। कहा- रिस्क है, पता नहीं कब कहां से जमीन धंस जाए। कल छोटा-सा गड्ढा था। अब यह 50 फीट का हो चुका है।
जहां गड्ढा हुआ है, उसके आसपास चार-पांच गांव हैं। सोनपालसर गांव यहां से तीन किमी है। जहां आबादी रहती है। जिस जगह घटना हुई, उस जगह से करीब 300 फीट की दूरी पर गुसाईं जी महाराज की बणी है। लोगों को डर है कि कहीं पूरा गांव इसमें न समा जाए।

ग्रामीण पूसाराम नाई का कहना है कि प्रशासन गड्ढ़े को देखकर वापस चला गया। उन्होंने बताया नहीं कि ऐसा क्यों हो रहा है।
ग्रामीण पूसाराम नाई का कहना है- हम ढाणी वालों को इस गड्ढे को देखते ही घबराहट हो रही है। इसकी जांच होनी चाहिए। प्रशासन यहां आया और गड्ढे को देखकर वापस चला गया। मुझे डर है कि ये गड्ढा और बड़ा हो गया और ढाणी तक पहुंच गया तो क्या होगा?
राजस्थान में अचानक किसी जगह पर ऐसा गड्ढा होना कोई नई बात नहीं है। चूरू की इस घटना से पहले बीकानेर जिले में पिछले करीब सवा साल में दो ऐसी बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं ने कई बड़े सवाल खड़े किए हैं-
- ऐसी घटनाएं किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की ओर इशारा कर रही हैं?
- क्या राजस्थान का रेगिस्तान एक खाई में तब्दील होने वाला है?
- मरुस्थल की ओर बढ़ रहा शहरीकरण अब तबाही की ओर लेकर जा रहा है?
इन सवालों को लेकर दैनिक भास्कर ऐप की टीम राजस्थान यूनिवर्सिटी (आरयू), जयपुर के जिओलॉजी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विजयपाल मीणा से मिली। डॉ. विजयपाल मीणा ने वैज्ञानिक तरीके से राजस्थान की भू-गर्भीय स्थिति के बारे में समाझाया।

डॉ. विजयपाल मीणा ने चूरू, बीकानेर जैसे क्षेत्र में सॉइल क्वालिटी और उसकी लेयर के बारे में जानकारी देते हुए जमीन धंसने के 5 बड़ी वजह बताई-

जब किसी क्षेत्र में ट्यूबवेल से बहुत ज्यादा मात्रा में ग्राउंड वाटर निकाल लिया जाता है, तो जमीन के नीचे मौजूद जलस्तर खाली हो जाता है। इससे ऊपर की मिट्टी को सहारा देने वाली परतें सूख जाती हैं। समय के साथ नीचे की लेयर इतनी कमजोर हो जाती है कि वो मिट्टी का भार नहीं सह पाती और जमीन में धंस जाती है।

चूरू और बीकानेर जिले में रेतीली मिट्टी है। इसमें अगर नमी न हो तो कणों में आपसी पकड़ भी नहीं होती। डार्क जोन एरिया में समय के साथ जमीन के अंदर भी नमी खत्म होती जा रही है। इसी वजह से ही इन क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं।

जमीन के अंदर कई बड़े वाटर पॉकेट होते हैं। बारिश के दिनों में इन वाटर पॉकेट्स में पानी बहने लगता है। ये चट्टानों को काटता है। इससे जमीन में खाली जगह बनती हैं। कई जगह पर ये कटाव बड़े स्तर पर हो जाता है। इस वजह से जमीन की ऊपरी सतह को नीचे से सपोर्ट नहीं मिलता है तो वो धंस जाती है।

कुछ जगहों पर जमीन की निचली लेयर में चूना पत्थर या घुलनशील चट्टानें होती हैं। बारिश के दिनों में पानी के कॉन्टैक्ट में आने की वजह से घुलने लगती हैं। धीरे-धीरे ये चट्टानें पानी के साथ पूरी तरह से घुल जाती हैं। इस वजह से भी ऐसी घटनाएं होती हैं। इसे कार्स्ट भू-प्रक्रिया कहते हैं।

भारी निर्माण कार्य होने, हाईवे पर भारी वाहनों के चलने, खुदाई जैसे कार्य और बड़ी मशीन चलने से जमीन में वाइब्रेशन होता है। ऐसे में रेतीली जमीन नीचे से बैठने लगती है। ये प्रक्रिया कई लेयर में होती है। सबसे पहले नीचे की लेयर फिक्स होती है। इससे ऊपर की लेयर के लिए स्पेस मिलने लगता है। लगातार इस प्रोसेस से इस तरह के बड़े गड्ढे बन जाते हैं।
प्रशासन ने जांच के लिए बुलाई एक्सपर्ट की टीम सरदार शहर के नायब तहसीलदार प्रह्लाद राय पारीक ने बताया- इस घटना के बारे में ग्रामीणों से जानकारी मिली थी। हमारी टीम मौके पर गई थी। प्रशासन ने गड्ढे की घेराबंदी कर रस्सी बांध दी है। ग्रामीणों को गड्ढे के पास जाने से रोका गया है।
प्रह्लाद राय ने कहा- अभी अनुमान लगाया जा रहा है। हो सकता है जमीन में किसी जमाने में कोई कुआं या कुंड हो। जिस वजह से मिट्टी अंदर की ओर गिर रही है। हालांकि, एक्सपट्र्स की टीम को बुलाया गया है जो जांच करेगी कि ये गड्ढा हुआ क्यों है?
अब जानिए, सालभर में हुई दो घटनाओं के बारे में…
बीकानेर: रातों-रात हुआ 100 फीट गहरा गड्ढा तारीख- 15-16 अप्रैल 2024

बीकानेर जिले के सहजरासर गांव से गुजर रहे हाईवे से सुबह करीब चार बजे पिकअप ड्राइवर दूध लेकर जा रहा था। उसे अचानक जमीन धंसती महसूस हुई। वह अचानक इस गड्ढे में गिरते-गिरते बचा। उसने ही गांव में लोगों को कॉल कर इसके बारे में बताया। गांव के लोग यहां पहुंचे तो देखा कि पिकअप का एक टायर गड्ढे में झूल रहा था। ट्रैक्टर से खींचकर किसी तरह पिकअप को वहां से निकाला। अचानक बने इस गड्ढे को देखकर हर कोई हैरान था।
ग्रामीणों ने पुलिस और अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इसके बाद बीकानेर से भू-विशेषज्ञों की टीम भी यहां पहुंची थी। उन्होंने यहां से कुछ मिट्टी और पानी के सैंपल भी लिए थे। इसके बाद जयपुर से भी जीएसआई की टीम तीन बार यहां आ चुकी है। जीएसआई की टीम ने भी यहां से मिट्टी और पानी के सैंपल लिए हैं। बाद में एक्सपर्ट इस नतीजे पर पहुंचे कि लोग ट्यूबवेल के माध्यम से लगातार ग्राउंड वाटर का दोहन कर रहे थे। इसी वजह से वहां जमीन धंसी है। (पूरी खबर पढ़ें)
बीकानेर: दो मकान जमीन में धंस गए तारीख- 1 अगस्त, 2025

बीकानेर के नोखा में बारिश के बाद दो मकान 30 फीट गहरे गड्ढे में धंस गए। बताया गया कि मकान के नीचे जमीन खोखली थी। प्रशासन ने ढाई बीघा के एरिया में बैरिकेड्स लगा दिए। असुरक्षित मकानों को रेड मार्क कर चिह्नित कर दिया है। धीरे-धीरे जमीन का धंसना बढ़ता रहा। प्रशासन ने सुरक्षा को देखते हुए 7 मकानों को खाली करवाया। वहां रह रहे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है। (पूरी खबर पढ़ें)
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चूरू में देखते ही देखते जमीन धंस गई और 50 फीट गहरा गड्ढ़ा हो गया। सूचना पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। लोगों को गड्ढ़े के पास जाने से रोकने के लिए चारों तरफ रस्सी बांध दी है। घटना सोमवार सुबह करीब 7 बजे सोनपालसर गांव से तीन किलोमीटर दूर स्थित गुसाई जी महाराज की जमीन में हुई। (पूरी खबर पढ़ें)
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