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प्रदेश की बिजली वितरण निगमों की रेगुलेटेड ऐसेट्स (नियामकीय बकाया देनदारियां) की वसूली का भार छोटे व कृषक उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर सरकार ने गरीब, जरूरतमंद और कृषक उपभोक्ताओं पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त बोझ नह

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बताया जा रहा है कि रेगुलेटेड ऐसेट्स की बड़ी राशि सरकार वहन करेगी, लेकिन यह राशि विनियामक आयोग के आगामी फैसले और सरकार के नीतिगत निर्णय के बाद ही तय होगी। सुप्रीम कोर्ट के 6 अगस्त के आदेश से राज्यों की विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) की रेगुलेटेड ऐसेट्स 31 मार्च 2028 तक समाप्त की जानी हैं।

यह है रेगुलेटेड ऐसेट्स

बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लंबे समय से चले आ रहे बकाया, जिसे रेगुलेटेड ऐसेट्स कहा जाता है। राजस्थान में 2010 से बकाया राशि चल रही है। यहां 31 मार्च 2024 तक डिस्कॉम्स की रेगुलेटेड ऐसेट्स 49 हजार 842 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी थीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें चरणबद्ध रूप से समाप्त करने की प्रक्रिया प्रारम्भ की जाएगी।

किसानों को मिलती रहेगी सब्सिडी

सरकार प्रदेश के 20 लाख 9 हज़ार 714 कृषक उपभोक्ताओं का अतिरिक्त भार भी खुद वहन करेगी। रेगुलेटेड ऐसेट्स की राशि का एक हिस्सा केवल 300 यूनिट से अधिक मासिक उपभोग वाले उपभोक्ताओं से वसूला जाएगा। इस दायरे में 15 लाख 37 हज़ार बड़े उपभोक्ता आते है। इनकी बिजली महंगी होगी।

ऐसे मिलेगी जनता को राहत प्रदेश के एक करोड़ 35 लाख घरेलू उपभोक्ताओं में से एक करोड चार लाख उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली योजना में सब्सिडी दी जा रही है। इनमें से 100 यूनिट तक उपभोग करने वाले 62 लाख उपभोक्ताओं का बिजली बिल शून्य ही रहेगा। सरकार के फैसले के अनुसार 51 से 150 यूनिट मासिक उपभोग करने वाले 37 लाख उपभोक्ताओं को 50 पैसे प्रति यूनिट की राहत तथा मासिक फिक्स्ड चार्ज 250 रुपये से घटाकर 150 रुपए किया गया है। साथ ही 150 से 300 यूनिट मासिक पर भी शुल्क में 35 पैसे प्रति यूनिट की राहत दी जाएगी।



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