वाटिका निवासी छोटा देवी पिछले दो सालों से बिस्तर पर लेटकर अपना जीवन व्यतीत कर रही थीं।
जयपुर के एसआरके हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने एक 62 वर्षीय बुजुर्ग महिला को नया जीवन दिया है। वाटिका निवासी छोटा देवी पिछले दो सालों से बिस्तर पर लेटकर अपना जीवन व्यतीत कर रही थीं।
हॉस्पिटल के जॉइंट रिप्लेसमेंट एंड ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. विकास गुप्ता के निर्देशन में बुजुर्ग महिला का सफल इलाज किया गया। डॉ. विकास ने बताया- महिला कूल्हे के अंदर एक गांठ से सात वर्षों से परेशान थी। पिछले दो सालों से वह पूरी तरह से चलने-फिरने में असमर्थ थी।
अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि महिला के कूल्हे की बॉल से जांघ की हड्डी तक मेलिगनेंट कोड्रोसारकोमा फैला हुआ था। इस स्थिति में पैर काटने तक की नौबत आ सकती थी। परिजनों की सहमति के बाद मरीज का ऑपरेशन किया गया।

डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में एक सिंगल डिसेक्शन में पूरा ट्यूमर हटाया गया।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस जटिल ऑपरेशन में एक सिंगल डिसेक्शन में पूरा ट्यूमर हटाया गया। आमतौर पर इस तरह के ट्यूमर हटाते समय वह टूट जाता है और आसपास फैल जाता है। लेकिन चिकित्सकीय अनुभव के कारण इसे एक बार में ही पूरा निकाल दिया गया।
ऑपरेशन के दौरान मरीज के कूल्हे से जितना हिस्सा निकाला गया, उतने ही हिस्से में टाइटेनियम मेटल के ट्यूमर मेगा प्रोस्थेसिक से इम्प्लांट करके कूल्हे का जोड़ पुनर्निर्मित किया गया। सफल ऑपरेशन के बाद महिला अगले ही दिन से अपने पैरों पर चलने लगी और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।
अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि मॉडर्न तकनीकों और एक्सपर्ट चिकित्सकों की टीम के कारण वे जटिल समस्याओं का समाधान आसानी से कर पा रहे हैं। इससे सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।
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