‘मैं, खेताराम और वीरेंद्र अपनी गाड़ी में थे, NSG कमांडो चंपालाल की गाड़ी को टक्कर लगी थी…कुछ देर बाद वो और उसके साथी आए…मैंने कहा था कोई झगड़ा नहीं हैं हम निकलते हैं…चंपालाल मेरा दोस्त ही है….पता नहीं अचानक क्या हुआ? धारिया (फसल काटने वाला धारदार हथियार) से अटैक किया….मुझे पकड़कर गाड़ी से बाहर पटका….।
हमले से बचने के लिए मैंने पैर ऊपर उठाए तो जूते कट गए….फिर दोनों हाथ आगे किए, तो उसने हाथ काट दिए…अस्पताल में ऑपरेशन के बाद ही होश आया….उन दोनों के साथ क्या हुए पता नहीं।’
जोधपुर एम्स में भर्ती हरलाल उर्फ हरखाराम बाड़मेर के सरनू में 17 सितंबर को रात को हुए हमले में जिंदा बच गया। लेकिन शराब कारोबारी खेताराम की दर्दनाक मौत हो गई। NSG कमांडो चंपालाल व उसके साथियों ने दो लोगों के हाथ काट दिए थे। चंपालाल कई VVIP लोगों की सुरक्षा में तैनात रहा।
कड़ी ट्रेनिंग के बाद बीएसएफ से चुनकर डेपुटेशन पर दिल्ली भेजा गया था। अचानक क्या हुआ जो इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दिया? इसकी पूरी कहानी भास्कर टीम ने हमले में जिंदा बचे हरखाराम से जानी। साथ ही कमांडो चंपालाल की कुंडली भी खंगाली। पढ़िए ये ग्राउंड रिपोर्ट….

हरखाराम की जुबानी 17 सितंबर की रात खौफनाक हमले की पूरी कहानी…
हरखाराम ने बताया- गुरुवार (17 सितंबर) की शाम को कैंपर गाड़ी में शराब कारोबारी खेताराम और वीरेंद्र मेरे साथ थे। सरनू में हम हरीश की दुकान पर रुके। वीरेंद्र गाड़ी से नीचे उतरा और पानी की बॉटल लेने पहुंचा। उस दिन दुकान मालिक वहां मौजूद नहीं था। उसके वहां काम करने वाला लड़का था, जिससे विरेंदर की बनती नहीं थी।
वीरेंद्र ने उस लड़के को ताना मारा कि- तेरा मालिक कभी दुकान पर रहता है या नहीं….धंधा कैसे करेगा…इस पर दुकान पर काम करने वाले ने पलट के जवाब दिया। इससे दोनों में बहसबाजी हुई। इसी दौरान वहां एनएसजी कमांडों चंपालाल व उसके साथी वहां आ गए।

हरखाराम की जुबानी… 17 सितंबर की रात को क्या हुआ था…
हरखाराम ने बताया- गुरुवार (17 सितंबर) की शाम को कैंपर गाड़ी में शराब कारोबारी खेताराम और वीरेंद्र मेरे साथ थे। सरनू में हम हरीश की दुकान पर रुके। वीरेंद्र गाड़ी से नीचे उतरा और पानी की बॉटल लेने पहुंचा। उस दिन दुकान मालिक वहां मौजूद नहीं था।
उसके वहां काम करने वाला लड़का था, जिससे वीरेंद्र की बनती नहीं थी। वीरेंद्र ने उस लड़के को ताना मारा कि- तेरा मालिक कभी दुकान पर रहता है या नहीं….धंधा कैसे करेगा…इस पर दुकान पर काम करने वाले ने भी पलट के जवाब दिया। इससे दोनों में बहसबाजी हुई। इसी दौरान वहां एनएसजी कमांडों चंपालाल व उसके साथी आ गए।

यह Unique video कैंपर गाड़ी का स्कॉर्पियो को टक्कर मारते हुए का है।
हरखाराम आगे बताते हैं- इस घटना से चंपालाल को गुस्सा आ गया। वह पास में ही स्थित अपने पैट्रोल पंप पर गया। वहां से स्कूटी पर सवार होकर आया और धारदार हथियार लाया। कैंपर में बैठे खेताराम व मुझ पर हमला किया।
किसी ने बचाव के लिए आने की कोशिश की तो बौखलाए चंपालाल ने उसे धमकी दी कि वह घायल कर देगा। धक्का-मुक्की में वीरेंद्र चौधरी हाईवे किनारे खाई में गिर गया।
चंपालाल अपने कमांडो होने का रोब हमेशा जताता था। लेकिन उससे अच्छा व्यवहार था। इतनी छोटी सी बात पर वह इस तरह वार करेगा कभी सोचा नहीं था।

इस हत्याकांड में मृतक खेताराम के परिजनों ने नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। 17 सितंबर की घटना के बाद से NSG कमांडो चंपालाल फरार है।
एनएसजी से रिलीव होकर वापस बीएसएफ जॉइन करनी थी
आरोपी चंपालाल नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) में स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG) में पोस्टेड थे। एनसएसजी कमांडो की 12 एसआरजी यूनिट देश के वीवीआईपी लोगों की सिक्योरिटी संभालती है। चंपालाल दिल्ली में वीआईपी लोगों की सुरक्षा संभालता था। वहां वो प्रशासनिक कार्य भी देखता था।
कड़ी ट्रेनिंग के बाद चंपालाल को एनएसजी में बतौर कमांडों डेपुटेशन पर लिया गया था। हाल ही में उसका डेपुटेशन पीरियड पूरा हो चुका था। एनएसजी से उसे रिलीव कर दिया गया था। 5 साल का डेपुटेशन पीरियड पूरा कर चंपालाल पिता के रिटायरमेंट फंक्शन को अटैंड करने आया था। इसके बाद उसे बीएसएफ की नॉर्थ ईस्ट बटालियन में जॉइन करना था। नॉर्थ ईस्ट बटालियन बांग्लादेश बॉर्डर पर ड्यूटी देती है।

पिता बोले- किस उकसावे में घटना हुई, समझ ही नहीं पा रहा
आरोपी कमांडो के पिता लाखाराम ने बताया कि चंपाराम 2011 में BSF में भर्ती हुआ था। अब तक 14 साल की सर्विस हो चुकी है। जम्मू कश्मीर में आतंकवादी इलाकों में भी ड्यूटी कर चुका है।
परिवार बच्चों सहित दिल्ली में रहता है। वो अगस्त महीने में छुट्टी पर घर आया था। उसकी छुट्टियां खत्म हो गई थी, वह वापस जाने ही वाला था। ऐसे में घटना कैसे हुई, किस उकसावे के कारण हुई, मैं खुद समझ नहीं पा रहा हूं।

आरोपी कमांडो के पिता लाखाराम का कहना है कि उनके मृतक के परिवार से अच्छे संबंध रहे हैं।
क्या है SRG?
एनएसजी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड भारत का एक विशेष सैन्य बल है। इस स्पेशल फोर्स को आतंकवाद या किसी गंभीर आंतरिक खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है। इन्हें ब्लैक कैट कमांडो के नाम से भी जाना जाता है। NSG एनएसजी (राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड) में तीन स्पेशल रेंजर ग्रुप (एसआरजी) होते हैं, जिनमें 11, 12 और 13 एसआरजी शामिल हैं। 12 स्पेशल रेंजर ग्रुप एक क्लोज-प्रोटेक्शन या वीआईपी सुरक्षा युनिट है। यह युनिट देश के महत्वपूर्ण व्यक्तियों को उच्च-स्तरीय सुरक्षा देती है।

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