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ब्रजभूमि की ऐतिहासिक नगरी डीग, जो अपनी धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जानी जाती है, इस बार रामभक्ति के अद्भुत रंग में रंगने जा रही है। 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक लक्ष्मण मंदिर परिसर में भव्य रामलीला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष
डीग रामलीला समिति के अध्यक्ष पंकज सौखिया ने बताया कि इस बार रामलीला मंचन के लिए वृंदावन के श्री श्यामा श्याम लीला संस्थान की मंडली बुलाई गई है। समिति के महामंत्री पंकज पाराशर और इन्द्रमोहन शर्मा ने बताया कि 2 अक्टूबर को दशहरे पर मेला मैदान में रावण दहन का मंचन होगा।
वहीं 135 वर्षों से पंडित नारायण लाल आचार्य अखाड़ा डीग के तत्वावधान में हो रही परंपरागत रामलीला के अधिष्ठाता पंडित सूर्यभान आचार्य ने अनुशासनहीनता और अमर्यादित व्यवहार के चलते संचालन से इनकार कर दिया। उन्होंने भास्कर से अपनी पीड़ा भी साझा की।
भास्कर इनसाइट
रामलीला कार्यक्रम…. 6 नारद मोह एवं राम जन्म,7 चारों भाइयों का जन्म उत्सव, 8 विश्वामित्र आगमन, ताड़का वध, सुबाहु वध, 9 को धनुष यज्ञ,10 को लक्ष्मण-परशुराम संवाद एवं राम विवाह,11 को राम वनगमन एवं केवट प्रसंग होगा 16 अक्टूबर श्रीराम राज्याभिषेक होगा।
अधिष्ठाता बोले- रामलीला में शराब पीकर जूते चप्पलों से मंच पर चढ़ते हैं लोग – पंडित नारायण लाल के प्रपौत्र और वर्तमान अधिष्ठाता पंडित सूर्यभान आचार्य ने बताया कि इस वर्ष रामलीला में शामिल नहीं होने का मुख्य कारण मंच पर अनुशासनहीनता और मर्यादाओं का उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि “शराब पीकर, जूते-चप्पल पहनकर मंच पर चढ़ना, मंच पर अभद्र भाषा का प्रयोग करना और कुछ लोगों द्वारा रामलीला का अतिक्रमण एवं राजनीतिकरण करना” उनके निर्णय के पीछे मुख्य वजहें हैं।
पंडित सूर्यभान ने कहा कि पिछले वर्षों में ऐसे कई अवसर आए जब अनुशासनहीनता और अमर्यादित आचरण बढ़ते गए। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में पंडित हरि प्रसाद शर्मा और पंडित मदन मोहन आचार्य भी इसी वजह से आयोजन से हट चुके हैं।
ध्वजारोहण के साथ हुआ आगाज
डीग लक्ष्मण मंदिर परिसर में रामलीला महोत्सव के तहत बल्ली पूजन कार्यक्रम का आयोजन ध्वजारोहण और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ। मंत्रोच्चार मंदिर के मंहत पंडित मुरारी लाल पाराशर के नेतृत्व में ब्राह्मणों द्वारा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीताराम मंदिर के मंहत महामंडलेश्वर बाबा शिवराम दास जी महाराज ने की।
विशिष्ट अतिथि कृष्णानंद महाराज ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा यह रामलीला हमारे पूर्वजों की धरोहर है। रामजी और रामलीला में हमारे प्राण हैं। इस अवसर पर रामायण के आदर्शों और सनातन संस्कृति की महत्ता पर जोर दिया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
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