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किसान वेशभूषा धारण कर ठाकुर जी भ्रमण को निकले हैं ।

मेवाड़ क्षेत्र के ऐतिहासिक भगवान श्रीचारभुजानाथ जिन्हें कोटड़ी श्याम के नाम से भी जाना जाता हैं। आज शुभ मुहूर्त 3:15 बजे अपने हजारों भक्तों के साथ निज धाम छोड़कर बाहर निकले। करीब 18 घंटे तक भक्तों के कंधों पर रजत रेवाड़ी में बिराजमान होकर जलझूलन करने

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रजत रेवाड़ी में सवार ठाकुरजी

श्रीचारभुजानाथ के इस ऐतिहासिक एवं धार्मिक पर्व जलझूलनी एकादशी पर सुबह कोटड़ी श्याम का विद्वान पंडितों के षोडशोपचार, मंगलाचरण के साथ दुग्धाभिषेक एवं त्रिवेणीधाम से कावड़ में लाए जल से अभिषेक किया गया, इसके बाद भगवान को स्वर्णाभूषण से मंडित पोषाक धारण करा महाआरती करके किसान का रूप धारण करवाया गया।

18 घंटे तक रहेंगे भ्रमण पर

तीसरे पहर के शुभ मुहूर्त में भगवान चारभुजानाथ की अनुमति मिलते ही पुजारी व भक्त निज मूर्त ठाकुरजी को रजत रेवाड़ी में बिराजमान करवाते है। कोटड़ी श्याम का सिंहासन इस दौरान 18 घंटे तक सालिगराम जी संभालते हैं। कस्बे के पटेल द्वारा लाए सूती लाल टूल के कपड़े व दर्जी समाज द्वारा बनाई गई पोशाक को धारण कर ठाकुरजी किसान का रूप धरते हैं। उसके बाद भक्तों के कंधों पर सवार होकर जैसे ही ठाकुरजी निज धाम से बाहर निकलते तो दर्शन को आतुर हजारों भक्त पुष्प वर्षा व कोटड़ी श्याम का दीदार करने उमड़ पड़ते हैं।

तस्वीरों में देखें नगर भ्रमण

बारिश के बीच भीगते हुए भक्त अपने आराध्य के दर्शन को आतुर नजर आए।

बारिश के बीच भीगते हुए भक्त अपने आराध्य के दर्शन को आतुर नजर आए।

भक्त छतों पर चढ़कर ठाकुर जी के दर्शन करने पहुंचे हैं

भक्त छतों पर चढ़कर ठाकुर जी के दर्शन करने पहुंचे हैं

भक्त भक्ति भाव में नाचते गाते भक्त नगर भ्रमण में शामिल हुए

भक्त भक्ति भाव में नाचते गाते भक्त नगर भ्रमण में शामिल हुए

बड़ी संख्या में भक्त ठाकुर जी के नगर भ्रमण में शामिल हुए

बड़ी संख्या में भक्त ठाकुर जी के नगर भ्रमण में शामिल हुए

चौकी के मंदिर के पास बड़े भाई से अद्भुत मिलन

शोभायात्रा के रूप में बाजार होते हुए कोटड़ी श्याम का बेवाण जैसे ही चौकी मन्दिर पहुंचता हैं तो चौकी मन्दिर के चारभुजा कोटड़ी श्याम के बड़े भाई दोनों बैवाण का मिलन राम भरत सा मिलन सा नजारा रहता है। कस्बे के सभी मंदिरों के 11 बेवाण कोटड़ी श्याम के विमान के साथ जलझूलन को रवाना होते हैं। हजारों भक्त कोटड़ी श्याम के भजनों पर नाचते गाते झूमते हुए पवित्र सरोवर के घाट पर पहुंचते हैं। उसके बाद भगवान को जल में झूलन कराया जाता है और इसके बाद महाआरती होती है।

घर घर के बाहर पूजा अर्चना, दर्शन देते श्याम

जल झूलन पर कोटड़ी श्याम पूरे दिन कस्बे में भक्तों के कंधे पर सवार रहते हैं हर घर के बाहर ठाकुर जी की पूजा अर्चना की जाती है, ग्रामीणों ने बेसब्री से ठाकुर जी का इंतजार करते है, पूरी रात कोटड़ी श्याम के भक्त भजनों पर श्याम की मस्ती में झूमते रहते हैं। जगह-जगह आरती की जाती है, अगले दिन अपने निज धाम आकर सिंहासन पर विराजते हैं। भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्त भी कोटड़ी श्याम की थकान दूर करने के लिए कई प्रकार के शीतल पेय बनाकर उन्हें रिझाने का प्रयास करते हैं।



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