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जयपुर में हर साल सावन में तीज और चैत्र में गणगौर माता की सवारियां निकाली जाती हैं। दोनों ही नगर भ्रमण पर निकलती हैं। इनके स्वरूप, सवारी के तरीके और धार्मिक भाव में फर्क है। दोनों पर्वों से जुड़ी ये शाही सवारियां केवल रस्म नहीं, बल्कि जयपुर राजपरिवार

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सिटी पैलेस के कला एंड संस्कृति विभाग के ओएसडी रामू रामदेव ने बताया- तीज और गणगौर दोनों देवी पार्वती के रूप हैं। दोनों सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में स्थित रावले में विराजमान रहती हैं और वहीं पूजन किया जाता है। तीज और गणगौर माता की सवारी सिटी पैलेस से शुरू होती है। इससे पहले सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी में पूर्व राजपरिवार के सदस्य पारंपरिक पोशाक में त्रिपोलिया गेट पर माता की आरती उतारते हैं।

आगे जानिए-तीज माता के बारे में…

दो दिन निकाली जाती है सवारी तीज और गणगौर की सवारी दो दिन तक निकलती है। तीज माता पहले दिन शहर भ्रमण के लिए निकलती हैं। पौंड्रिक उद्यान में जलपान करती हैं।

दूसरे दिन वापसी में माता एक बार फिर दर्शन देती हैं। सिटी पैलेस लौटती हैं। बाकी साल भर माता सिटी पैलेस की जनानी ड्योढ़ी स्थित रावले में विराजती रहती हैं।

अगले दिन उसी परंपरा से बूढ़ी तीज की सवारी निकाली जाती है। पौंड्रिक उद्यान में जलपान के बाद रावले में आकर विराजती हैं।

पौंड्रिक उद्यान क्यों चुना गया? पहले सवारी सिटी पैलेस के आस-पास ही रहती थी। हालांकि दर्शनार्थियों की भीड़ को देखते हुए इसे पौंड्रिक उद्यान तक ले जाया जाने लगा। यह स्थान सिटी पैलेस के बाद गणगौरी बाजार, छोटी चौपड़, गणगौरी गेट होते हुए आता है। इसके पास ही तालकटोरा और बादल महल है, जो सिटी पैलेस का ही हिस्सा है।

शाही परंपरा से लोक परंपरा तक आजादी के बाद राजस्थान टूरिज्म डिपार्टमेंट इस परंपरा से जुड़ा। अब लोक कलाकारों को भी इसमें शामिल किया जाता है। सवारी निकलने से आधा घंटा पहले रास्ते भर लोक कलाकार परफॉर्मेंस देते हैं। यह परंपरा आज भी जारी है।

जयपुर के सिटी पैलेस से निकलने वाली तीज और गणगौर माता की शाही सवारियां सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शाही इतिहास और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।

इनमें जनता की भागीदारी, राजपरिवार की परंपरा और सांस्कृतिक जीवंतता एक साथ दिखती है। यही कारण है कि आज भी लाखों लोग इन सवारियों का इंतजार करते हैं और दर्शन के लिए उमड़ते हैं।

आगे पढ़िए तीज पर ट्रैफिक व्यवस्था क्या रहेगी…

(नोट- तीज और गणगौर से जुड़ी सभी जानकारी सिटी पैलेस के कला एंड संस्कृति विभाग के ओएसडी रामू रामदेव ने भास्कर को बताई।)



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