सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूर्व राजस्व मंत्री रामलाल जाट और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों की सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि कोई भी आपराधिक अदालत अपने ही आदे
राजस्थान हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले पूर्व मंत्री रामलाल जाट और अन्य के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया था। बाद में राज्य सरकार और अन्य पक्षों ने इस आदेश को चुनौती दी। हाईकोर्ट ने अपने पुराने आदेश को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी न्यायमूर्ति बीआर गवई और संजय करोल की द्वि-न्यायपीठ ने कहा-

एक बार जब कोई आपराधिक अदालत अपना फैसला सुना देती है, तो वह स्वयं उस पर दोबारा विचार या बदलाव नहीं कर सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि

अगर किसी शिकायतकर्ता की याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है, तो वह उसी मांग के साथ दोबारा याचिका दाखिल नहीं कर सकता। यह न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।


सुप्रीम कोर्ट का आदेश राजस्थान हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया गया। सीबीआई जांच का निर्देश निरस्त कर दिया गया। अदालत ने कहा कि केवल लिपिकीय त्रुटियों को ठीक किया जा सकता है, न कि फैसले को बदला या वापस लिया जा सकता है।
कानूनी विश्लेषण आपराधिक प्रक्रिया संहिता में समीक्षा का प्रावधान नहीं है। इसलिए आपराधिक अदालतें अपने आदेशों की समीक्षा नहीं कर सकतीं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आपराधिक आदेशों की अंतिमता के सिद्धांत को और मजबूत करता है। अब भविष्य में हाईकोर्ट सहित किसी भी आपराधिक अदालत द्वारा पुनर्विचार की याचिकाओं को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह निर्णय न्यायिक अनुशासन की दृष्टि से भी एक मील का पत्थर माना जाएगा।

ये था मामला पूर्व राजस्व मंत्री रामलाल जाट के खिलाफ 5 करोड़ के धोखाधड़ी केस में सीबीआई जांच होगी। पूर्व मंत्री सहित 5 लोगों के खिलाफ 17 सितंबर 2022 को कोर्ट के आदेश पर भीलवाड़ा के करेड़ा थाने में धोखाधड़ी और चोरी का मामला दर्ज किया गया था।
राजसमंद के माइनिंग व्यवसायी परमेश्वर जोशी ने आरोप लगाया था कि करोड़ों रुपए की ग्रेनाइट माइंस में 50 प्रतिशत शेयर रामलाल जाट ने छोटे भाई के बेटे और उसकी पत्नी के नाम करवाए थे। इसके बदले 5 करोड़ रुपए देने का वादा किया था। लेकिन, डॉक्यूमेंट नाम कराने के बाद रुपए नहीं दिए गए।
मामले में जोधपुर हाईकोर्ट के जज फरजंद अली ने कांग्रेस नेता रामलाल जाट के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए। दरअसल, कारोबारी परमेश्वर ने मामले में प्रभावी लोगों के शामिल होने के चलते सीबीआई जांच की मांग की थी।
50 प्रतिशत शेयर माइंस कारोबारी के नाम पर थे माइनिंग व्यवसायी राजसमंद के गढ़बोर निवासी परमेश्वर पुत्र रामलाल जोशी ने पुलिस को रिपोर्ट में बताया था कि वह करेड़ा के रघुनाथपुरा में मैसर्स अरावली ग्रेनि मार्मो प्रा.लि. नाम से ग्रेनाइट माइंस का काम करता है। माइंस में वह डायरेक्टर और शेयर होल्डर है।
इस कंपनी का रजिस्ट्रेशन श्याम सुंदर गोयल और चंद्रकांत शुक्ला के नाम से है। जिस समय कंपनी का रजिस्ट्रेशन हुआ था, उस समय परमेश्वर श्याम सुंदर और चंद्रकांत से 10 करोड़ रुपए मांगता था। इसके चलते इन दोनों ने माइंस के 50 प्रतिशत शेयर परमेश्वर और उसकी पत्नी भव्या जोशी के नाम पर कर दिए थे।
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