राजस्थान में अब गर्भनिरोधक के लिए नसबंदी की जरूरत नहीं पड़ेगी। माचिस की तीली जितनी छोटी स्टिक ‘सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इंप्लांट’ से महिलाओं को अनचाहे गर्भ से मुक्ति मिलेगी। इस लचीली स्टिक को महिला की बांह में महज 5 मिनट में लगाया जा सकता है। विशेषज्ञ
भारत सरकार ने परिवार नियोजन के लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान में इस इंप्लांट की शुरुआत कर दी है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर के चुनिंदा अस्पतालों में इसकी सुविधा मिल रही है। अबतक 2500 से ज्यादा महिलाओं को यह लग चुकी है। जल्द ही प्रदेशभर के अस्पतालों में इसे शुरू करने के लिए महिला डॉक्टर्स की ट्रेनिंग चल रही है।
ये गर्भनिरोधक इंप्लांट क्या है? कैसे इसे लगाया जाता है? यह कैसे काम करेगी? पढ़िए इस एक्सक्लूसिव स्टोरी में…
सबसे पहले जानते हैं सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इंप्लांट क्या है? माचिस की तीली जैसा दिखने वाला सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इंप्लांट रबर के समान एक चिप होती है। इसे महिला के शरीर में फिट कर दिया जाए तो उसमें धीरे-धीरे प्रोजेस्टेरोन जैसा एक हार्मोन निकलता है। ये हार्मोन गर्भधारण होने से रोकने का काम करता है।

यह एप्लीकेटर है, जिसके जरिए सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इंप्लांट किया जाता है।
4 सेंटीमीटर लंबा और 2 मिलीमीटर चौड़े इंप्लांट को महिला की बांह में स्पेशल एप्लीकेटर के जरिए कोहनी से कुछ ऊपर स्किन के नीचे फिट किया जाता है। अगर महिला राइट हैंडेड है, तो स्टिक उलटी बांह में लगती है। लेफ्ट हैंडेड महिलाओं में यह सीधे बाजू में लगती है। इसको लगाने के बाद ये स्टिक बाहर से दिखता नहीं है, लेकिन इसका एहसास जरूर किया जा सकता है।
इसे लगाने के दौरान महिला को न तो बेहोश करने की जरूरत पड़ती है और न ही ऑपरेशन थिएटर किसी प्रकार के कोई ऑपरेशन की जरूरत होती है। महज 5 मिनट की ये प्रक्रिया पूरी तरह से पेनलेस है। खास बात यह है कि इंप्लांट जब चाहो तब निकलवाया जा सकता है। इससे महिला के गर्भ धारण करने की क्षमता (फर्टिलिटी) पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

सबडर्मल कॉन्ट्रासेप्टिव इंप्लांट को बांह में नीचे की तरफ इस तरह से बॉडी में फिट किया जाता है।
गर्भ निरोधक के रूप में कैसे काम करता है सबडर्मल इंप्लांट? सबडर्मल इंप्लांट को लगाने के बाद तीन साल तक 99.9 फीसदी प्रेग्नेंसी के चांस नहीं होते हैं। इसमें खास तरह की दवाई होती है। इस स्टिक में 68 मिलीग्राम इटोनोजेस्ट्रल सॉल्ट (Etonogestrel) होता है। ये धीरे-धीरे ब्लड में घुलता रहता है।

बीमार महिलाओं में नहीं लगाया जाता इस इंप्लांट को कुछ बीमारियों से ग्रसित महिलाओं में नहीं लगाया जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, माइग्रेन, लिवर कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर से ग्रसित महिलाओं में यह इंप्लांट नहीं लगाया जाता है।
इस इंप्लांट को लगाने के बाद महिलाओं में कुछ साइड इफेक्ट भी नजर आ सकते हैं। शुरुआती चार महीने में 20 फीसदी के पीरियड अनियमित हो सकते हैं। वहीं 1-2 किलो वजन भी बढ़ सकता है।
अब तक 150 गायनोकोलॉजिस्ट ने ली ट्रेनिंग प्रदेश में अब तक करीब 150 गायनोकोलॉजिस्ट ने इस इंप्लांट को लगाने की ट्रेनिंग ले ली है। राजधानी जयपुर में स्थित एसएमएस मेडिकल कॉलेज से सम्बद्ध महिला चिकित्सालय की डॉ. ओबी नागर सभी डॉक्टरों को प्रशिक्षण दे रही हैं। राजधानी में महिला चिकित्सालय के अलावा जनाना हॉस्पिटल, गणगौरी हॉस्पिटल, जयपुरिया हॉस्पिटल, कांवटिया हॉस्पिटल की डॉक्टर्स ने ट्रेनिंग ले ली है।
उदयपुर, अजमेर समेत कई जिलों की डॉक्टर्स ट्रेनिंग ले रही हैं। इन डॉक्टर्स को इंप्लांट के इंसर्टेशन, रिमूवल स्किल, काउंसलिंग, इन्फेक्शन प्रिवेंशन की ट्रेनिंग दी जा रही है।

महिला चिकित्सालय की सीनियर प्रोफेसर और इंप्लांट ट्रेनर डॉ. ओबी नागर ने बताया कि महिला डॉक्टर्स को इसे इंप्लांट करने की ट्रेनिंग दी जा रही है।
सिर्फ जयपुर में ही 1500 से अधिक महिलाओं ने लगवाया अब तक राजस्थान के चुनिंदा शहरों के 11 अस्पतालों में ढाई हजार से ज्यादा महिलाओं को ये इंप्लांट लगाया जा चुका है। इनमें उदयपुर, जयपुर और जोधपुर जिले के हॉस्पिटल शामिल है। राजधानी जयपुर के महिला चिकित्सालय में 880 और जनाना अस्पताल में 700 इंप्लांट लगाए जा चुके हैं। जबकि 85 महिलाएं इंप्लांट रिमूव भी करवा चुकी हैं।
एक्सपर्ट बोले- गर्भनिरोधक के और भी तरीके, ये ज्यादा कारगर महिला चिकित्सालय की सीनियर प्रोफेसर और इंप्लांट ट्रेनर डॉ. ओबी नागर कहती हैं- हमारे देश में अब इसकी शुरुआत हुई है। कई देशों में ये इंप्लांट काफी सालों से लगाया जा रहा है। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों में पहले से लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्तनपान कराने वाली महिला हो या बच्चे नहीं चाहने वाली महिलाओं को भी लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ये इंप्लांट नसबंदी की तरह ही गर्भनिरोधक में कारगर है। इसे आसानी से लगाया जा सकता है और जब बच्चा चाहो इसे निकाला जा सकता है।

गर्भनिरोधक इंप्लांट कब लगवाया जा सकता है?
पीरियड (मासिक धर्म) के किसी भी समय इंप्लांट लगाया जा सकता है, बशर्ते गर्भवती न हों। पीरियड के पहले पांच दिनों के दौरान लगवाते हैं, तो यह तुरंत गर्भधारण से बचाता है। पीरियड के पांच दिनों के बाद लगवाते हैं, तो 7 दिन के अंदर गर्भनिरोधक इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।
इसे लगाने में कितना पैसा खर्च करना पड़ता है?
डॉ. ओबी नागर ने बताया कि सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत इसे फ्री में लगाया जाता है।
3 साल के अंतराल में कारगर है इंप्लांट
डॉ. ओबी नागर ने बताया- एक बच्चे से दूसरे बच्चे के बीच 3 साल का अंतर रखना जच्चा और बच्चा दोनों के लिए ही फायदेमंद होता है। इसे लगाने पर गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर टी और अंतरा इंजेक्शन, नसबंदी कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

राजस्थान में 20 फीसदी फर्टिलिटी अनचाही
परिवार नियोजन सभी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। आज भी राजस्थान में 20 फीसदी फर्टिलिटी अनचाही है। करीब 52 फीसदी गर्भधारण अपर्याप्त अंतराल में होते हैं। जिसके अपने जोखिम होते हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने राजस्थान सहित 10 राज्यों में सबडर्मल इंप्लांट्स की शुरुआत कर गर्भनिरोधकों की श्रेणी का विस्तार करने की पहल की है। राजस्थान के कुछ अस्पतालों में एसडी इंप्लांट्स लगाने की शुरुआत हो चुकी है। लेकिन ज्यादातर जिलों में इस इंप्लांट को लगाने के लिए डॉक्टर्स की ट्रेनिंग चल रही है।

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