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राजस्थान में गौ तस्करी और गौवध की रोकथाम के लिए सरकार ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं। गोपालन निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर कहा है कि तस्करी से बचाए गए गौवंश की जानकारी तय समय पर भेजना अनिवार्य होगी। साथ ही हाईवे प
गोपालन विभाग के निदेशक पंकज ओझा ने बताया कि राजस्थान गोवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध और अस्थायी प्रवृजन निर्यात का विनियमन) अधिनियम 1995 के तहत यह प्रावधान है कि जब भी पुलिस की कार्रवाई में गौवंश को बचाया जाता है तो उन्हें सक्षम प्राधिकारी के आदेश से पंजीकृत गौशाला या नगरीय निकायों और पंचायत संस्थाओं द्वारा संचालित कांजी हाउस में रखा जाए। उन्होंने कहा कि कई जिलों से नियमित रूप से जानकारी नहीं भेजी जाती या विलंब से भेजी जाती है। इस कारण अब सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि हर माह की 5 तारीख से पहले वध से बचाए गए गौवंश की पूरी रिपोर्ट ई-मेल के जरिए निदेशालय को भेजना अनिवार्य होगा।
निदेशालय ने पुलिस को यह भी कहा है कि बचाए गए हर गौवंश की सूचना केवल निर्धारित फॉर्मेट में ही दी जाए और इसके साथ दर्ज एफआईआर की कॉपी भी अनिवार्य रूप से जोड़ी जाए। यदि किसी जिले में कार्रवाई नहीं हुई है तो भी शून्य सूचना भेजना जरूरी होगा। इसके अलावा रिपोर्ट की एक प्रति जिला कलक्टर को भी भेजी जानी चाहिए ताकि आगे की कार्यवाही समय पर की जा सके।
गौशालाओं की जिम्मेदारी तय
पत्र में गौशालाओं की जिम्मेदारी भी तय की गई है। वध से बचाए गए गौवंश को यथासंभव संबंधित थाना क्षेत्र की गौशाला या नजदीकी गौशाला में रखा जाएगा। यदि कोई गौशाला संचालक बिना कारण उन्हें रखने से मना करता है तो मामला तुरंत जिला कलक्टर के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके बाद उस गौशाला को दी जा रही आर्थिक सहायता पर रोक लगाने या अन्य कार्रवाई करने का प्रावधान है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वध से बचाए गए पशुओं के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता 2015-16 से दी जा रही है। वर्तमान में बड़े गौवंश के लिए 50 रुपये प्रतिदिन और छोटे पशु के लिए 25 रुपये प्रतिदिन की दर से यह राशि दी जाती है। इस सहायता का भुगतान जिला कलक्टर और जिला गोपालन समिति के माध्यम से किया जा रहा है।
गोपालन निदेशालय ने हाईवे पर पेट्रोलिंग बढ़ाने के भी निर्देश दिए
निदेशालय ने पुलिस को हाईवे और अन्य मुख्य मार्गों पर विशेष पेट्रोलिंग बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं ताकि गौ तस्करी और अवैध परिवहन पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके। साथ ही, सभी जिलों को आदेश की प्रति अधीनस्थ अधिकारियों तक पहुंचाने और निदेशालय को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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