भास्कर न्यूज |चित्तौड़गढ़ बांसवाड़ा के सांसद व आदिवासी समाज के नेता राजकुमार रोत ने कहा कि आदिवासी दिवस की शुरुआत आदिवासी समुदाय के अधिकार और संरक्षण के लिए की गई थी, लेकिन यह दुख की बात है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कोई शुभकामना नहीं दी।
विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने आए सांसद रोत ने मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि राज्य सरकार ने एक कार्यक्रम के लिए 50 लाख रुपए का बजट तय किया था। इसमें से 25 लाख रुपए सागवाड़ा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम पर खर्च किए गए। कहा गया था कि मुख्यमंत्री इसमें शामिल होंगे, लेकिन न तो वे आए और न ही कोई कैबिनेट मंत्री। सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस दिवस के नाम पर 50 लाख रुपए का घोटाला किया है। सांसद राजकुमार रोत ने चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक और सामाजिक पहलुओं को लेकर कहा कि चित्तौड़ का इतिहास न सिर्फ राजस्थान बल्कि पूरे भारत के लिए गौरवशाली रहा है। सांसद रोत ने महाराणा प्रताप और राणा पूंजा का नाम लेते हुए कहा कि इन महापुरुषों के साथ जिन लोगों ने युद्ध में भाग लिया, उनमें सबसे अहम भूमिका भील समुदाय की रही। फिर भी भील समुदाय समाज में सबसे पिछड़ा हुआ है।भील समुदाय को न तो प्रशासनिक स्तर पर प्रतिनिधित्व मिल पाया है और न ही राजनीतिक स्तर पर। चित्तौड़गढ़ में भीलों की आबादी सबसे अधिक है, इसके बावजूद भी वे शिक्षा, रोजगार, भूमि अधिकार जैसी सुविधाओं से वंचित हैं।
सांसद रोत ने पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयानों की तुलना करते हुए कहा कि तीनों के बयान अलग-अलग थे। इससे यह साफ होता है कि सरकार इस मुद्दे पर एकमत नहीं थी और अमेरिका के दखल की वजह से भारत को झुकना पड़ा। उन्होंने इसे देश की जनता का अपमान बताया और कहा कि इससे देश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इस संघर्ष में भारत का ज्यादा नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर पाकिस्तान ने कोई गलत कदम उठाया है, तो उसे करारा जवाब दिया जाए, न कि झुककर समझौता किया जाए।
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