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मंगलवार को विश्व छायांकन दिवस मनाया जाएगा। यह भरतपुर के लिए खास है, क्योंकि यहां 200 से ज्यादा फोटोग्राफर हैं, जो शौकिया तौर पर वन्य जीवन की फोटोग्राफी करते हैं। इसकी एक प्रमुख वजह भरतपुर में केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान होना है। इनमें से कई ऐसे ह
नत्थनलाल शर्मा भरतपुर रियासत में फोटोग्राफर थे। राजपरिवार के फोटो के अलावा उन्होंने केवलादेव घना में डक शूटिंग की फोटोग्राफी की। इस फोटो को दुर्लभ माना जाता है। यह फोटो केवलादेव घना से जुड़ी लगभग सभी पुस्तकों, कैटलॉग और वाइल्ड लाइफ की फिल्मों में उल्लेखित है। दूसरी पीढ़ी में दिनेश शर्मा दूरदर्शन में कैमरामैन रहे। तीसरी पीढ़ी में नवीन शर्मा मशहूर वाइल्ड फोटोग्राफर हैं। उन्होंने स्नेक बर्ड का फोटो खींचा, जिसमें 16 प्रयासों के बाद मछली का शिकार किया।
फोटोग्राफी की इस विरासत को चौथी पीढ़ी में उनके अभिनव शर्मा आगे बढ़ा रहे हैं। अभिनव शर्मा मुंबई में रहकर फिल्मों और वेब सीरीज में कैमरामैन हैं।
कांच की प्लेट का होता था नेगेटिव, ब्लैक एंड व्हाइट में भरते थे रंग
1839 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक ने फोटोग्राफी की खोज की थी। पहले कांच की प्लेट का नेगेटिव होता था। बाद में रील वाले कैमरे आए। इसके बाद 12, 16 और 36 फोटो वाला कैमरा आया। इस दौरान प्रिंट कैमरा भी आया, जिसमें फोटो खींचते ही प्रिंट निकलता था। बाद में डिजिटल और अब मोबाइल कैमरों का जमाना है। फिल्मों में डीएसएलआर सिनेमैटिक कैमरे उपयोग में आ रहे हैं। प्रारंभ में ब्लैक एंड व्हाइट फोटो में रंग भरकर उन्हें रंगीन बनाते थे।
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