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एक नूर खालसा फौज की बैठक बुधवार को जंक्शन में जिला अध्यक्ष लखविंदर सिंह डबली की अध्यक्षता में संपन्न हुई।
एक नूर खालसा फौज की बैठक बुधवार को जंक्शन में जिला अध्यक्ष लखविंदर सिंह डबली की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में गोलूवाला गुरुद्वारा प्रकरण को लेकर समुदाय के प्रतिनिधियों, पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में सिक्ख संगत ने हिस्सा लिया। इन्होंने रिसीवर स
प्रदेश प्रवक्ता कुलदीप सिंह हनुमानगढ़ ने इस दौरान स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में सिख धर्म की मर्यादा और परंपराओं का पालन सर्वोपरि रहेगा। उन्होंने कहा कि गोलूवाला प्रकरण में जो रिसीवर नियुक्त किए गए हैं, वे गुरुद्वारा की मर्यादा का पूर्ण रूप से सम्मान करें। गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश करते समय बेल्ट और टोपी पहनना सिख धर्म के विरुद्ध है, इसलिए नियुक्त रिसीवर को भी इन धार्मिक नियमों का पालन करते हुए ही प्रवेश करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरु घर में प्रवेश करने वाला प्रत्येक व्यक्ति सिक्ख मर्यादाओं के अनुरूप वेशभूषा और आचरण रखे, यही समुदाय की अपेक्षा है। बैठक में प्रदेश प्रवक्ता ने यह भी मांग रखी कि गोलूवाला प्रकरण में जो रिसीवर नियुक्त किया जाए, वह सिक्ख समुदाय से ही संबंध रखने वाला हो।
ऐसा व्यक्ति सिख धर्म की परंपराओं, मर्यादाओं और धार्मिक अनुशासन से भलीभांति परिचित होगा और किसी भी प्रकार की धार्मिक असंगति की संभावना नहीं रहेगी। इसके साथ ही बैठक में सोशल मीडिया पर गोलूवाला प्रकरण को लेकर धर्म विरोधी व अभद्र टिप्पणियां करने वालों पर नाराजगी व्यक्त की गई।
समुदाय के नेताओं ने मांग की कि ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और सभी आपत्तिजनक टिप्पणियों को संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से तत्काल हटवाया जाए। उन्होंने कहा कि सिक्ख धर्म को बदनाम करने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में यह भी दोहराया गया कि गोलूवाला विवाद वर्तमान में अकाल तख्त साहब की निगरानी में है और इस मामले के समाधान के लिए अकाल तख्त ही सर्वोच्च धार्मिक प्राधिकरण है। इसलिए इस प्रकरण को किसी अन्य कोर्ट में स्वीकार न किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि सिक्ख समुदाय की एकता और मर्यादा को बनाये रखने के लिए सभी को अकाल तख्त के निर्णय पर भरोसा करना चाहिए।
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