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सीकर में रविवार को आफत की बारिश ने कहर बरपा गई। बारिश में शहर का गंदा पानी नानी गांव (2 किमी दूर) तक पहुंच गया। इससे पूरा गांव पानी-पानी हो गया।

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सड़क किनारे 100 से ज्यादा खेत में फसलें खराब हो गई। सरकारी स्कूल, श्मशान और कई घरों के अंदर तक 2-2 फीट तक पानी भर गया। नेशनल हाईवे-52 भी पानी-पानी हो गया।

बारिश में गांव में बने गंदे पानी का कच्चा बांध टूटने से ग्रामीणों को इस परेशानी से जूझना पड़ा। इस गंदे पानी के कारण शरीर में खुजली तक चलने लग जाती है। गांव वालों का कहना है- 40 साल बाद ऐसा मंजर देखने को मिला है।

शहर में नवलगढ़ रोड, जाट बाजार, बजाज रोड, सूरजपोल गेट सहित ज्यादातर इलाकों में भी जलभराव के हालात हो गए। भास्कर ने प्रभावित इलाके में जाकर हालात देखें। बारिश से बिगड़े हालातों को मंजर साफ दिख रहा था।

सीकर शहर से 2 किमी दूर स्थित नानी गांव का ड्रोन व्यू, जिसमें नेशनल हाईवे-52 के दोनों ओर भरा पानी नजर आ रहा है। ये हाईवे जयपुर को बीकानेर से जोड़ता है।

सीकर शहर से 2 किमी दूर स्थित नानी गांव का ड्रोन व्यू, जिसमें नेशनल हाईवे-52 के दोनों ओर भरा पानी नजर आ रहा है। ये हाईवे जयपुर को बीकानेर से जोड़ता है।

गांव में भरा गंदा पानी, शरीर में खुजली हो जाती सीकर शहर से करीब ढाई किलोमीटर दूर नानी गांव है। गांव के सरपंच मोहनलाल बाजिया ने बताया- सीकर में रविवार दोपहर और रात को दो घंटे (9 से 11 बजे) तक जमकर बारिश हुई। शहर का गंदा पानी गांव में न आए, इसलिए कच्चा बांध बनाया गया था। रविवार दोपहर सड़क के दोनों तरफ बना ये बांध टूट गया। रात को बारिश ने नमक पर जले का काम किया।

बारिश के साथ गंदा पानी गांव में घुस गया। सरपंच ने बताया- गंदा पानी नालों के जरिए नई बीहड़ में छोड़ा जाता है। इस पानी में कई केमिकल और कचरा भी होता है। यदि यह पानी शरीर पर लग जाए तो खुजली तक चलना शुरू हो जाती है।

सरपंच ने बताया- इससे पहले 1985 में गांव में बारिश से ऐसे हालात हुए थे। अब करीब 40 साल बाद गांव में खेतों और घरों में इतना पानी आया है।

नानी गांव में बना गंदे पानी का कच्चा बांध, जिसकी मिट्‌टी की दीवार टूट गई। इस दीवार के टूटने से शहर का गंदा पानी बारिश के पानी के तेज बहाव के साथ गांव के अंदर घुस गया।

नानी गांव में बना गंदे पानी का कच्चा बांध, जिसकी मिट्‌टी की दीवार टूट गई। इस दीवार के टूटने से शहर का गंदा पानी बारिश के पानी के तेज बहाव के साथ गांव के अंदर घुस गया।

सीकर से सालासर वाली सड़क लबालब दो घंटे की तेज बारिश से सीकर से सालासर की तरफ जाने वाली 2 किमी लंबी सड़क भी पानी-पानी हो गई। इस सड़क पर आवाजाही हो रोका गया। इस सड़क से पानी होता हुआ नेशनल हाईवे संख्या-52 पर नए चौराहे से लेकर भढाढर गांव (करीब 4 किलोमीटर ) तक सड़क के दोनों तरफ चला गया।

100 से ज्यादा खेतों में खड़ी फसल खराब नेशनल हाईवे तक पानी आने से इसके दोनों तरफ खेत भी लबालब हो गए। सड़क किनारे बने करीब 100 से ज्यादा खेतों में पानी भर गया। सभी खेतों में फसल खराब हो गई। एक भी किसान ऐसा नहीं बचा कि उसे नुकसान न हुआ हो।

नेशनल हाईवे-52 का ड्रोन व्यू, जिसमें पानी भरा नजर आ रहा है।

नेशनल हाईवे-52 का ड्रोन व्यू, जिसमें पानी भरा नजर आ रहा है।

सरकारी स्कूल की दीवार गिरी, खाट 2 फीट पानी में डूबी सरपंच ने बताया- रात का समय था, गांव वाले सो रहे थे। तेज बारिश की आवाज से जागे। देखा तो, आंगन में रखी खाट करीब दो फीट पानी में डूबी हुई थी। गांव के चौराहे पर सरकारी स्कूल है, जिसकी करीब 20 फीट चौड़ी दीवार भी पानी के तेज बहाव में टूट गई।

स्कूल में करीब 4 से 5 फीट तक जलभराव हो गया। करीब तीन बीघा में फैला स्कूल का खेल ग्राउंड तालाब में बदल गया। अब गांव वालों को डर सता रहा है कि पानी के बढ़ते वेग से मिट्टी कटाव न हो जाए। ऐसा होता है तो मकानों के गिरने का डर रहेगा।

सरकारी स्कूल के सामने ही सार्वजनिक श्मशान भूमि है। इस श्मशान भूमि में भी करीब 2 फीट तक पानी भर गया। पानी निकासी का कोई समाधान नहीं है। पानी घरों में नहीं आए इसके लिए लोगों ने गलियों में मिट्टी के टीले से बना दिए हैं।

नानी गांव की श्मशान भूमि में भरा गंदा पानी। ग्रामीणों का कहना है कि ये गंदा पानी शरीर पर लग जाता है तो खुजली चलने लगती है।

नानी गांव की श्मशान भूमि में भरा गंदा पानी। ग्रामीणों का कहना है कि ये गंदा पानी शरीर पर लग जाता है तो खुजली चलने लगती है।

ग्रामीणों ने क्या कहा- मकान गिरने का डर, कमाने कैसे जाए गांव में रहने वाले मजदूर शंकर शर्मा ने बताया- हर बार बारिश में गांव में जलभराव होता है। इस बार तो हालात ज्यादा खराब है। दो दिन से घर के बाहर पानी है। रात को नींद तक नहीं आ रही है। परिवार के लिए कमाना भी जरूरी है। इस पानी के बीच परिवार को छोड़कर कैसे जाएं।

हमेशा डर रहता है कि पानी में डूब न जाए, ज्यादा बड़ा नुकसान ना हो जाए। इस जगह तो सरकार भी ध्यान नहीं दे रही है। अब यदि बारिश में हमारा मकान गिर जाता है तो दूसरा मकान भी कैसे बनाएंगे क्योंकि इस जलभराव में तो खाने के भी लाले पड़े हैं। खाने के लिए हम लोग मोहताज हो रहे हैं।

होटल ठप, बाजरे की फसल बर्बाद सीकर से सालासर जाने वाली सड़क पर सारांश होटल चलाने वाले हरिराम निठारवाल ने बताया- बारिश के सीजन में जलभराव होने से होटल तो ठप पड़ी ही रहती है। होटल के पीछे ही मकान और खेत है। करीब 7 से 8 बीघा में बाजरे की खेती की हुई थी। पूरे खेत में पानी आ चुका है। फसल तो पूरी की पूरी ही इस बार बर्बाद है।

ट्यूबवेल में गंदा पानी जाना शुरू सीकर सालासर रोड पर रहने वाले राकेश कुमार ने बताया- मुख्य सड़क पर ही उनका मकान है। यहां उनके घर के चारों तरफ पानी ही पानी है। रात से वह घर के बाहर है। घर में ट्यूबवेल भी है, उसमें भी गंदा पानी जाना शुरू हो चुका है। सड़क पर हरे रंग का गंदा पानी शरीर पर लगा जाए तो खुजली चलना शुरू हो जाती है।

10 दिन पहले आंदोलन किया, अब वही हालत हुई सरपंच ने बताया- बारिश के बाद सोमवार सुबह कई अधिकारों मौका मुआयना करने आए। सरपंच ने कहा- अधिकारियों के दौरे से क्या होगा? पहले भी कई बार अधिकारी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं। गांव के हालात सुधार की बजाय और ज्यादा खराब हो जाते हैं।

नानी बीहड़ के गंदे पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने 10 दिन पहले नई चौराहे पर करीब 5 घंटे तक धरना दिया और करीब 10 मिनट तक नेशनल हाईवे को जाम भी किया था। ऐसे में मौके पर सीकर एडीएम रतन कुमार पहुंचे थे। जिन्होंने मौके पर जाकर आश्वासन दिया था कि नवंबर महीने तक नगर परिषद के 2 एसटीपी प्लांट शुरू हो जाएंगे। ऐसे में बीहड़ में पानी छोड़ने की बजाय एसटीपी प्लांट पर लाकर उसका ट्रीटमेंट किया जाएगा।

नानी गांव में बिगड़े हालातों को कुछ तस्वीरों में देखें…

गांव का सरकारी स्कूल, जिसके खेल मैदान में 4 से 5 फीट तक जलभराव हो गया।

गांव का सरकारी स्कूल, जिसके खेल मैदान में 4 से 5 फीट तक जलभराव हो गया।

खेतों में ज्यादा पानी न जाए, इसके लिए ग्रामीणों ने मिट्टी और कट्‌टे डालना शुरू किया है।

खेतों में ज्यादा पानी न जाए, इसके लिए ग्रामीणों ने मिट्टी और कट्‌टे डालना शुरू किया है।

नेशनल हाईवे, खेत और स्कूल के खेल मैदान में भरा पानी।

नेशनल हाईवे, खेत और स्कूल के खेल मैदान में भरा पानी।

गांव के सरकारी स्कूल के अंदर भरा पानी। बारिश के तेज बहाव में स्कूल की दीवार भी टूट गई।

गांव के सरकारी स्कूल के अंदर भरा पानी। बारिश के तेज बहाव में स्कूल की दीवार भी टूट गई।

सड़क किनारे स्थित करीब 100 खेतों में पानी भर गया। इससे फसलें बर्बाद हो गई।

सड़क किनारे स्थित करीब 100 खेतों में पानी भर गया। इससे फसलें बर्बाद हो गई।

गांव के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है कि भरवा क्षेत्र में न जाए। कोई जाता है और दुर्घटना होती है तो, उसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।

गांव के बाहर चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। इस पर लिखा है कि भरवा क्षेत्र में न जाए। कोई जाता है और दुर्घटना होती है तो, उसके जिम्मेदार आप स्वयं होंगे।

शहर में नवलगढ़ रोड फिर पानी-पानी नवलगढ़ रोड पर रहने वाले आइसक्रीम व बेकरी विक्रेता रवि कुमावत पिछले 20 साल से यहां दुकान चला रहे। रवि कहते हैं- नवलगढ़ रोड पर गंदगी, जलभराव की समस्या नई नहीं है। यह समस्या दशकों से चली आ रही है। थोड़े से बारिश के पानी से यह रोड पानी से लबालब हो जाती है। जिसके कारण यहां कीचड़, गंदगी पसरना शुरू हो जाती है। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने हुए हैं, जिनसे आए दिन सड़क हादसे होते हैं।

प्रिंस डिपार्टमेंटल स्टोर के संचालक नरेश कुमार बताते हैं- सरकारें आती हैं, चली जाती हैं। लेकिन नवलगढ़ रोड़ पर जलभराव की समस्या आज भी वहीं बनी हुई है। बारिश के दिनों में नवलगढ़ रोड पर 3 से 4 फीट पानी भर जाता है। स्थिति यह हो जाती है कि पानी दुकानों के अंदर घुस जाता है और कई दिनों तक दुकानदार दुकानें नहीं खोल पाते। जिससे हमारा काम प्रभावित होता है।

हर साल बारिश में शहर की नवलगढ़ रोड पर पानी भर जाता है। इस बार भी वो ही हालात रहे। इतना पानी भर गया कि आवागमन बंद करना पड़ा।

हर साल बारिश में शहर की नवलगढ़ रोड पर पानी भर जाता है। इस बार भी वो ही हालात रहे। इतना पानी भर गया कि आवागमन बंद करना पड़ा।

नीट की तैयारी कर रही छात्रा शुभांगी का कहना है- सीकर एजुकेशन सिटी में पढ़ाई भले ही अच्छी हो, लेकिन क्या फायदा जब हम बारिश के मौसम में लगातार कई दिनों तक क्लासेस मिस करना पड़े। छाता सिर्फ सिर ढकने के काम आता है, बाकी जूतों में पानी भर जाता है और ड्रेस खराब हो जाती है। विकास के नाम पर सीकर जीरो है।

हॉस्टल संचालक प्रियंका चौधरी बताती है- सीकर में बारिश आने के कारण स्टूडेंट्स को बहुत परेशानियां होती हैं। वह पैदल नहीं चल पाते। नवलगढ़ और पिपराली रोड पर 3 से 4 फीट पानी भर जाता है। सड़क के दोनों साइड फुटपाथ तो बनाया गया है लेकिन उस पर हमेशा अतिक्रमण रहता है। स्टूडेंट्स उस पर चल नहीं पाते। शहर में पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं है, जिस कारण फुटपाथ के एरिया में भी गाड़ियां खड़ी रहती है।

बारिश के बाद रेलवे पटरियों पर भरा पानी।

बारिश के बाद रेलवे पटरियों पर भरा पानी।

ड्रोन सहयोग : हेमंत महरिया,ब्यूटी ऑफ़ सीकर



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