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राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की कथित अनुपस्थिति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि धनखड़ ने 22 जुलाई को इस्तीफा दिया था और आज 9 अगस्त तक उनकी कोई जानकारी नहीं है। सिब्बल ने गृह मंत्री अमित शाह से उनक

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पहले दिन मैंने उनसे संपर्क करने की कोशिश की थी। लेकिन उनके निजी सचिव का कहना था कि वह आराम कर रहे हैं। उसके बाद से दोबारा संपर्क नहीं हो पाया। सिब्बल ने यह भी चुटकी ली कि लापता लेडीज के बारे में तो सुना था, लेकिन लापता वाइस प्रेसीडेंट के बारे में पहली बार पता लगा है। सिब्बल के इस कटाक्ष पर राजस्थान में रह रहे धनखड़ के परिवार के सदस्य ने भास्कर को बताया कि वे वाइस प्रेसिडेंट हाउस में ही हैं। स्वास्थ्य कारणों से कहीं निकले नहीं हैं।

12 जुलाई को आखिरी बार IIIT के कार्यक्रम में कोटा आए थे

गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने से पहले अंतिम बार 12 जुलाई को राजस्थान आए थे। कोटा में ट्रिपलआईटी के एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। इससे पहले भी वे लगातार राजस्थान के दौरे पर आते रहे हैं। 22 जुलाई के बाद से अब तक 28 दिन में वे न किसी सामाजिक या अन्य कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे हैं और न ही अपने गांव आए। पद पर रहते पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उनका 23 जुलाई को जयपुर आने का कार्यक्रम था।

परिवार के सदस्य ने कहा- कहीं गए नहीं हैं, वीपी हाउस में हैं

कपिल सिब्बल के सोशल मीडिया पर इस पोस्ट के बाद दैनिक भास्कर ने राजस्थान में रह रहे उनके भतीजे हरेंद्र धनखड़ से पूर्व उपराष्ट्रपति के बारे में जानकारी ली। हरेंद्र धनखड़ का कहना है कि फिलहाल वे अभी भी दिल्ली में ही सरकारी उपराष्ट्रपति भवन में रह रहे हैं। उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसलिए उनका कहीं भी आना-जाना नहीं हो रहा है। गौरतलब है कि झुंझुनूं के रहने वाले धनखड़ नियमित राजस्थान के दौरे पर आते रहे हैं, लेकिन इस्तीफा देने के बाद से अब तक वो यहां नहीं आए।

लोकसभा चुनाव से पूर्व भी कई दौरे चर्चा में रहे

विधानसभा चुनाव से पूर्व धनखड़ के राजस्थान दौरे को लेकर जमकर सियासत हुई थी। तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत ने कहा था- मैं उपराष्ट्रपति का सम्मान करता हूं और उनसे कई दशकों से अच्छे रिश्ते भी हैं, लेकिन उन्होंने तो पूरा राज्य ही छान मारा। उनसे मिलने वालों में अधिकतर भाजपा नेता थे। ऐसा होता है क्या? सरकार को संवैधानिक संस्थाओं के प्रमुखों पर दबाव नहीं बनाना चाहिए। गहलोत ने यह भी कहा था- धनखड़ राष्ट्रपति बनेंगे तब भी हम उनका स्वागत करेंगे, लेकिन अभी तो मेहरबानी करें।



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