रवींद्र मंच पर मंचित लोकनाट्य ‘श्रीकृष्ण दर्शन’ ने दर्शकों को भक्ति, संगीत और लोकनाट्य के रस में सराबोर कर दिया।
जयपुर के रवींद्र मंच पर मंचित लोकनाट्य ‘श्रीकृष्ण दर्शन’ ने दर्शकों को भक्ति, संगीत और लोकनाट्य के रस में सराबोर कर दिया। वीणापाणी कला मंदिर समिति द्वारा आयोजित और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से प्रस्तुत इस नाट्यकृति का निर्देशन डॉ. सौर
शिव और कृष्ण के प्रेम-भाव पर आधारित कथानाट्य प्रस्तुति की कथा भगवान शिव और बालकृष्ण के प्रेम-भाव पर आधारित थी। जब शिव कैलाश से सीधे गोकुल आकर बालकृष्ण के दर्शन करना चाहते हैं, तो माता यशोदा उन्हें साधु-वेश में देखकर यह कहकर रोक देती हैं कि बालक डर जाएगा।

शिव और कृष्ण के प्रेम-भाव पर आधारित कथानाट्य प्रस्तुति की कथा भगवान शिव और बालकृष्ण के प्रेम-भाव पर आधारित थी।
भगवान शिव की तड़प-व्याकुलता का चित्रण
दर्शन से वंचित शिव द्वार पर बैठ जाते हैं, और भीतर बालकृष्ण का रोदन शुरू हो जाता है। यह दृश्य शिव की तड़प, कृष्ण की व्याकुलता और अंत में प्रेमिल मिलन को इतनी भावनात्मक गहराई से प्रस्तुत करता है कि संपूर्ण सभागार भक्ति रस में डूब जाता है।
प्रमुख कलाकारों में विशाल भट्ट ने भगवान शिव की भूमिका को संजीवनी दी, जबकि रेखा शर्मा ने माता यशोदा की भूमिका में गहरी संवेदना उकेरी। अनिस कुरैशी ने नंद बाबा, और रवि कुमार ने नारद की भूमिका को प्रभावशाली अंदाज़ में निभाया।

प्रमुख कलाकारों में विशाल भट्ट ने भगवान शिव की भूमिका को संजीवनी दी।
पियूषा, झिलमिल, धनवी, पाखी, अभिनय, अविनाश, मौली और जोयेश जैसे युवा कलाकारों ने गोप-गोपिकाओं के रूप में भक्ति, आनंद और नृत्य का वातावरण रच दिया, जिससे मंच जीवंत हो उठा। कोरस की संगत ने प्रस्तुति को संगीतमय गरिमा प्रदान की।
डॉ. सौरभ भट्ट के निर्देशन में यह नाटिका सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि लोकपरंपरा, सांगीतिक सौंदर्य और धार्मिक संवेदनाओं की समृद्ध झांकी बनकर दर्शकों के हृदय में उतर गई।
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