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राजस्थान हाईकोर्ट ने फेयर प्राइस शॉप (FPS) संचालकों की एक मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा FPS लाइसेंसधारक अपने क्षेत्र में नई दुकानें खुलने से रोकने का दावा नहीं कर सकते। हाईकोर्ट जस्टिस सुनील बेनीवाल ने शुक्रवार को 17 रिट याचिकाओं

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मुख्य याचिकाकर्ता नागौर निवासी मोहम्मद सलीम ने अपनी रिट याचिका में बताया था कि उसे साल 2000 में वार्ड नंबर 27, दादा मोहल्ला, गिनानी तालाब, नागौर शहर में एक राशन दुकान आवंटित की गई थी। सीमाओं के पुनर्निर्धारण के बाद इसे वार्ड नंबर 28 और बाद में वार्ड नंबर 34 का नाम दिया गया था। वर्तमान में सलीम राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत लगभग 500 राशन कार्ड धारकों को सेवा दे रहा है।

समस्या तब शुरू हुई जब राज्य सरकार ने 25 जून को एक विज्ञापन जारी कर स्थानीय विधायक और मंत्री की सिफारिश पर नई राशन दुकानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा। इसमें वार्ड नंबर 34, दादा मोहल्ला, गिनानी तालाब, नागौर शहर में एक नई दुकान शामिल थी, जो ठीक उसी स्थान पर थी, जहां सलीम पहले से दुकान चला रहा था।

विवाद 500 राशन कार्ड की शर्त का

सलीम सहित कुल 17 याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी थी कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जहां मौजूदा FPS में 500 या उससे कम राशन कार्ड धारक हों, वहां नई दुकान नहीं खोली जा सकती। उन्होंने 7 अप्रैल 2010, 17 मार्च 2016, 22 अक्टूबर 2019 और 26 दिसंबर 2019 के सरकारी परिपत्रों का हवाला दिया था।

जस्टिस वाधवा समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख

याचिकाकर्ताओं ने जस्टिस वाधवा समिति की रिपोर्ट का भी सहारा लिया था। इस समिति ने सुझाव दिया था कि प्रत्येक FPS में कम से कम 500 राशन कार्ड धारक होने चाहिए, ताकि दुकानदार को उचित कमीशन मिल सके और वह भ्रष्टाचार में न लिप्त हो। समिति का कहना था कि यदि राशन कार्ड की संख्या 1000 से अधिक हो जाए तो FPS को विभाजित कर देना चाहिए।

राज्य सरकार का नया सर्कुलर, शिथिलता संभव

राज्य सरकार ने अपने बचाव में 10 मई 2025 का एक नया सर्कुलर पेश किया। इसमें कहा गया है कि 500 राशन कार्ड की शर्त को बनाए रखा जाएगा, लेकिन भौगोलिक परिस्थितियों और जनहित को देखते हुए जिला कलेक्टर के स्तर पर इसमें शिथिलता दी जा सकती है।

कोर्ट- दुकानदारों का संख्या पर वैधानिक अधिकार नहीं

कोर्ट ने अपने फैसले में पूर्व में दिए गए फैसलों का उल्लेख किया। इनमें बाबूश्याम बनाम राजस्थान राज्य (2012) मामले में एक समन्वय पीठ ने FPS संचालकों के पक्ष में फैसला दिया था। लेकिन बाद में हरिओम मीणा बनाम राजस्थान राज्य (2015) मामले में डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कर दिया था कि मौजूदा दुकानदारों का कम से कम 500 राशन कार्ड पर कोई वैधानिक अधिकार नहीं है।

वर्ष 2017 का एक फैसला रहा अहम

इसी मुद्दे से संबंधित एक मामला नीरज शर्मा बनाम राजस्थान राज्य (2017) का था, जिसमें जयपुर पीठ की समन्वय पीठ ने कहा था कि FPS लाइसेंसधारक अपने संचालन क्षेत्र पर एकाधिकार का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 500 राशन कार्ड की आवश्यकता केवल कार्यकारी दिशा-निर्देश है, जो न तो कोई कानूनी अधिकार प्रदान करती है और न ही सरकार की नीति निर्माण शक्ति को सीमित करती है।

हाईकोर्ट का फैसला: सरकार का नीतिगत मामला है

जस्टिस सुनील बेनीवाल ने अपने फैसले में निम्नलिखित मुख्य बिंदु बताए:

  1. FPS की स्थापना और आवंटन राज्य सरकार का नीतिगत मामला है।
  2. समय-समय पर जारी दिशा-निर्देश न तो अनिवार्य हैं और न ही मौजूदा दुकानदारों को कोई अधिकार प्रदान करते हैं।
  3. न्यायाधीश वाधवा समिति की रिपोर्ट केवल सुझावात्मक है और निर्णय लेने में एक मार्गदर्शक कारक हो सकती है।
  4. मौजूदा FPS संचालकों का नई दुकानों की स्थापना के विरुद्ध कोई अंतर्निहित या संविदात्मक या कानूनी अधिकार नहीं है।

राजनीतिक प्रभाव के आरोप खारिज

कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि नई FPS दुकानें राजनीतिक प्रभाव से खोली जा रही हैं। कोर्ट ने कहा कि स्थानीय विधायक और मंत्री, जनप्रतिनिधि होने के नाते, जनता की मांग के आधार पर FPS खोलने की सिफारिश कर सकते हैं। यदि राज्य सरकार ने इस मांग को देखते हुए नई दुकानों के लिए विज्ञापन जारी करने का निर्णय लिया है, तो यह स्वचालित रूप से यह संकेत नहीं देता कि यह किसी खास व्यक्ति को लाभ पहुंचाने के लिए है।



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