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राजस्थान हाईकोर्ट ने सीकर जिले के फतेहपुर शेखावाटी की एस एम निमावत स्कूल पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया हैं। जस्टिस अनूप ढंड की अदालत ने यह हर्जाना स्कूल में पढ़ाई कर चुके स्टूडेंट मनीष सैनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए लगाया।
याचिका में कहा गया था कि उसने स्कूल से 2012 में 12वीं की परीक्षा दी थी। जिसमें वह केमेस्ट्री सब्जेक्ट में फेल हो गया। इसके बाद उसने सप्लीमेंट्री की परीक्षा दी, उसमें भी वह फेल हो गया। इसके बाद स्कूल से उसका कंपार्टमेंट का फॉर्म भरा।
लेकिन स्कूल ने कंपार्टमेंट परीक्षा के फार्म में पूर्व में पास किए हुए सब्जेक्ट भरकर भेज दिए। एडमिट कार्ड में इसका खुलासा होने पर भी स्कूल ने छात्र को आश्वासन दिया कि वह केवल केमेस्ट्री की परीक्षा दें।
परीक्षा के बाद स्कूल ने उसे बिना मार्कशीट दिए टीसी (ट्रांसफर सर्टिफिकेट) जारी कर दी। जिसमें उसे पास बताया गया। इसके आधार पर उसने बीटेक में एडमिशन ले लिया। बीटेक पूरी होने के बाद जब उसने एमटेक में एडमिश्न लेना चाहा तो उससे 12वीं मार्कशीट मांगी गई। जब वह मार्कशीट लेने स्कूल गया तो उसे पता चला कि उसे चार अन्य पेपर नहीं देने पर अनुपस्थित बताते हुए फेल कर दिया गया हैं।
स्कूल ने फॉर्म भरा, छात्र की गलती नहीं कोर्ट ने सुनवाई के बाद कहा कि रिकार्ड पर पेश कंपार्टमेंट के फार्म को देखने से साफ है कि प्रार्थी छात्र ने फॉर्म पर सिर्फ दस्तखत किए थे। सब्जेक्ट और उनके कोड स्कूल के ही स्टॉफ ने भरे थे। केमेस्ट्री के स्थान पर बाकी सब्जेक्ट भी भर दिए गए।
छात्र को एडमिट कार्ड से यह गलती पता भी चल गई थी लेकिन स्कूल मैनेजमेंट के आश्वासन पर उसने सिर्फ केमेस्ट्री सब्जेक्ट की परीक्षा दी और बाकी की नहीं। इस कारण सीबीएसई ने चार सब्जेक्ट में उसे अनुपस्थित रहने के कारण फेल करार दिया। मार्कशीट आने से पहले ही स्कूल ने उसे पास बताकर टीसी दे दी।
स्कूल की गलती छात्र नहीं भुगतेगा कोर्ट ने कहा है कि पूरे मामले में स्कूल की गलती है। जिसकी गलती से छात्र ने तीन साल की बीटेक कर ली। स्कूल की गलती के कारण ही सीबीएसई को भी अनावश्यक रुप से कोर्ट आना पडा। कोर्ट ने स्कूल को एक महीने में छात्र को एक लाख रुपए हर्जाना और सीबीएसई को एक महीने में उसकी पास वाली मार्कशीट जारी करने के निर्देश दिए है।
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