भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जैसलमेर जिले में एक बड़े रिश्वत मामले में नया खुलासा किया है। इस मामले में पहले 17 फरवरी को भणियाणा तहसीलदार सुमित्रा चौधरी और फतेहगढ़ तहसीलदार शिवप्रसाद शर्मा को 15 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया था

तत्कालीन सांगड़ पटवारी हनुमानराम।
जमीन के नामांतरण और रजिस्ट्री में रिश्वत
जैसा कि जांच में सामने आया है, यह मामला फतेहगढ़ क्षेत्र में एक निजी कंपनी को लगभग 200 बीघा जमीन आवंटन से जुड़ा हुआ था। जमीन की रजिस्ट्री, नामांतरण और पैमाइश की प्रक्रिया में तहसीलदार शिवप्रसाद शर्मा ने कुल 15 लाख रुपए की रिश्वत की मांग की थी।
17 फरवरी को एसीबी की टीम ने भणियाणा और फतेहगढ़ में एक साथ कार्रवाई करते हुए दोनों तहसीलदारों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई में पता चला कि तहसीलदारों ने अलग-अलग जमीनों की रजिस्ट्री और नामांतरण की सुविधा के लिए परिवादी से धन की मांग की थी। भणियाणा तहसीलदार सुमित्रा चौधरी ने भी उसी दिन अलग से रिश्वत लेने की कोशिश की थी।
सांगड़ पटवारी हनुमानराम की भूमिका
जोधपुर एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चक्रवर्तीसिंह राठौड़ ने बताया कि इस पूरे मामले में तत्कालीन सांगड़ पटवारी हनुमानराम भी सीधे शामिल था। 15 लाख रुपए की कुल रिश्वत में से 5 लाख रुपए पटवारी की हिस्सेदारी थी। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि पटवारी ने तहसीलदारों के साथ मिलकर रिश्वतखोरी को अंजाम दिया। 7 महीने की जांच के बाद एसीबी ने हनुमानराम को गिरफ्तार किया। गौरतलब है कि इस मामले में फरार हुए तत्कालीन पटवारी हनुमान राम को जिला कलेक्टर ने पहले ही निलंबित कर दिया था।

तत्कालीन फतेहगढ़ तहसीलदार शिवप्रसाद शर्मा और भणियाणा तहसीलदार सुमित्रा चौधरी।
जांच की पूरी टाइमलाइन
- 17 फरवरी: एसीबी ने भणियाणा और फतेहगढ़ में तहसीलदारों को गिरफ्तार किया।
- फरवरी–अगस्त: मामले की गहन जांच, एसीबी ने सभी दस्तावेज, जमीन के रजिस्ट्री रिकॉर्ड और गवाहों के बयान जुटाए।
- सितंबर: जांच के खुलासे के बाद तत्कालीन सांगड़ पटवारी हनुमानराम की मिलीभगत सामने आई।
- अंतिम कार्रवाई: 7 महीने बाद पटवारी को गिरफ्तार कर लिया गया।
सांगड़ पटवारी हनुमान राम निलंबित:2 तहसीलदारों पर एसीबी कार्रवाई के बाद कलेक्टर ने लिया एक्शन, पटवारी फरार
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