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चित्तौड़गढ़ शहर की एक कॉलोनी में रहने वाले आरटीओ विभाग के प्राइवेट गार्ड द्वारा तीन नाबालिग बच्चों के साथ अनैतिक हरकत करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपी को 21 जुलाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, लेकिन हैरान करने वाली बात यह रही कि पुलिस ने

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यह शर्मनाक घटना सदर थाना क्षेत्र की है, जहां एक कॉलोनी निवासी RTO का प्राइवेट गार्ड अपने ही मोहल्ले के तीन नाबालिग बच्चों का लंबे समय से यौन शोषण कर रहा था। मामला उस समय खुला जब 20 जुलाई को 14 वर्षीय एक बालक ने साहस दिखाते हुए अपने साथ हुई घटना की जानकारी परिवार को दी। परिवार ने तुरंत संज्ञान लिया और जब अन्य बच्चों से बात की गई तो दो और पीड़ित सामने आए। एक 17 वर्षीय किशोर ने बताया कि पिछले दो महीने से गार्ड द्वारा उसके साथ गलत हरकत की जा रही थी, वहीं एक अन्य 14 वर्षीय बालक ने एक साल से शोषण किए जाने की बात कही।

तीनों बच्चों के परिजनों ने 21 जुलाई को थाने में मामला दर्ज करवाया, जिसके बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। 23 जुलाई को पुलिस ने मुख्यमंत्री के दौरे का हवाला देकर मामला टाल दिया, वहीं 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या का बहाना बनाकर आरोपी को मीडिया से दूर रखा गया। जब पत्रकारों ने दबाव डाला तो जवाब मिला “आरोपी को जेल भेज दिया गया है, अब प्रेस नोट की क्या जरूरत है?”

हालांकि मामला दर्ज होने के बाद आरोपी को डिटेन किया गया, लेकिन जिस तरह से पुलिस ने मामले को दबाने और मीडिया से छिपाने की कोशिश की, वह बेहद सवाल खड़े करता है। क्या पुलिस ऐसे गंभीर अपराधों में भी ‘सिस्टम बचाने’ की कोशिश कर रही है? या फिर आरोपी के विभागीय संबंधों के चलते उसे संरक्षण दिया जा रहा है?

यह कोई पहला मामला नहीं है जब ऐसा रवैया देखने को मिला हो। इससे पहले भी पुलिस कई मामलों में ऐसा कर चुकी है। लेकिन हाल ही में जब कपासन में भी एक शिक्षक का ऐसा मामला सामने आया था, तब भी बच्चों की अस्मिता का पूरा ध्यान रखा गया था। आरोपी के खिलाफ सख्त रुख बहुत जरूरी होता हैं।

पुलिस की इस चुप्पी से न सिर्फ समाज में गलत संदेश जाता है, बल्कि अपराधियों को भी हौसला मिलता है। यदि ऐसे मामलों को दबाया जाएगा, तो पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा का भरोसा कैसे मिलेगा? जरूरत इस बात की है कि पुलिस ऐसे मामलों में खुलकर सामने आए, दोषियों को समाज के सामने लाए और पीड़ितों के साथ न्याय करे।



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