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रैवासा धाम में पूर्व अग्रपीठाधीश्वर स्वामी राघवाचार्य की स्मृति में आयोजित होने वाले ‘श्री सियपिय मिलन समारोह’ की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंगलवार को श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर, रैवासा में 7 दिवसीय कार्यक्रम शुरू होगा जो 12 से 18 अगस्त तक चलेगा।

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कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत रैवासा धाम पधारेंगे। वे स्वामी राघवाचार्य की मूर्ति का अनावरण, गुरुकुल का लोकार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। श्री जानकीनाथ बड़ा मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष आशीष तिवाड़ी ने बताया कि सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संतों और श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग भोजन व्यवस्था, कथावाचक पं. इंद्रेश उपाध्याय के लिए मंच और बारिश से बचाव के लिए वाटरप्रूफ पांडाल तैयार है।

योगगुरु बाबा रामदेव व धीरेंद्र शास्त्री आएंगे

इससे पहले रविवार शाम को राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने रैवासा धाम पहुंचकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अग्रपीठाधीश्वर राजेन्द्रदास देवाचार्य महाराज से मुलाकात कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने समारोह की तैयारियों पर विस्तृत चर्चा की और वेदिक गुरुकुल का निरीक्षण भी किया।

कार्यक्रम में योगगुरु बाबा रामदेव, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री, श्रीगुरुशरणानन्द जी महाराज रमणरेती (गोकुल), जगद्‌गुरु रामानंदाचार्य श्रीवल्लभाचार्य जी महाराज, जगद्गुरु निवार्कपीठाधीश्वर अनंत श्री विभुषित श्रीश्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज, गीता मनीची स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज, महंत श्रीकिशोरदास देव जू महाराज श्रीगीरीलाल कुंज (वृंदावन), भक्तमाली श्री विहारीदास जी महाराज श्री धाम वृन्दावन व श्रीराधाकृष्ण जी महाराज सहित अनेक मठो के मठाधीश, पीठाधीश्वर व संत-महंत शामिल होंगे।

इसके अलावा कई केंद्रीय मंत्री, राज्य मंत्री, सीएम, डिप्टी सीएम के आने की संभावना भी जताई जा रही है। सांसद तिवाड़ी ने व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो, इसके लिए पार्किंग, पानी, बिजली और अन्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए चार अग्निशमन वाहन भी तैनात किए हैं। तिवाड़ी ने कहा कि यह महोत्सव क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करेगा, और श्रद्धालु भक्ति, सेवा और संतवाणी का अनूठा अनुभव प्राप्त करेंगे।

जानकीनाथ का सबसे पुराना मंदिर

1517 में बना जानकीनाथ का सबसे पुराना मंदिर यही है। पीठ के संस्थापक अग्रदेवाचार्य को साक्षात सीताजी के दर्शन का जिक्र भी मिलता है। 30 अगस्त 2024 को ब्रह्मलीन हुए डॉ. स्वामी राघवाचार्य ने 9 साल पहले 2015 में अपनी वसीयत में राजेंद्र दास महाराज को पीठ का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

संस्थापक को हुए थे सीताजी के दर्शन

आस्था का प्रमुख केन्द्र रैवासा धाम आध्यात्मिक रूप से भगवान श्रीराम व सीता से जुड़ा है। यहां न केवल संवत 1517 में बना जानकीनाथ का सबसे पुराना मंदिर है। बल्कि, काशी और अयोध्या तक प्रख्यात सीताराम की मधुरोपासना भी इसी पीठ की देन है। मां सीता की सहेली के रूप में ग्रंथों की रचना करने वाले रैवासा पीठ के संस्थापक महाराज अग्रदेवाचार्य को यहां सीताजी के साक्षात दर्शन का भी जिक्र है। वहीं, महाकाव्य रामचरित मानस के रचनाकार गोस्वामी तुलसीदासजी जी भी इस पीठ में पहुंचकर पदों की रचना कर चुके हैं।



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