राजस्थान में SI भर्ती का संग्राम थम नहीं रहा है। एक तरफ सफल अभ्यर्थी अब सड़क पर हैं तो दूसरी तरफ कानून मंत्री के बयान ने अजब हलचल मचा दी है। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की खरी-खरी सुनिए…
1. ‘भर्ती रद्द थोड़े हुई है’
सब इंस्पेक्टर भर्ती-2021 को कोर्ट ने रद्द कर दिया। सरकार को नए पदों के साथ नए सिरे से भर्ती करने का सुझाव भी दिया। कोर्ट के आदेश के साथ ही ‘कहीं खुशी कहीं गम’ वाली नौबत आ गई। श्रेय लेने के लिए नेतागण आपस में भिड़ गए। राजनीति अपनी जगह, लेकिन उनका क्या कसूर, जिन्होंने खून-पसीना एक कर ईमानदारी से पर्चा दिया और पास हुए।
क्या जयपुर, क्या कोटा और क्या अजमेर…हर जगह से अभ्यर्थी सड़क पर आकर आंसू बहा रहे हैं। न्याय मांग रहे हैं। इस बीच कानून मंत्री जोगाराम पटेल का एक बयान आ गया। बोले- कोर्ट ने SI भर्ती को रद्द नहीं किया है। कोर्ट ने अपना ऑब्जर्वेशन सरकार को भेजा है। इसकी जांच कर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को भेजेंगे।

कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने यह कहकर हलचल बढ़ा दी है कि एसआई भर्ती रद्द नहीं हुई।
2. ‘प्राण जाए पर वचन न जाई’
अब बात बोतल वाली पार्टी के हनुमान बेनीवाल की। युवा वर्ग उनकी शक्ति है। जोश में रहते हैं। एसआई भर्ती रद्द होने के बाद श्रेय लेने की होड़ में एक चैनल पर कृषि मंत्री बाबा किरोड़ी से उलझ बैठे थे।
खैर, जीत का जश्न मनाया जा रहा था। खबरनवीस कैमरा और माइक लेकर पहुंच गए। बाबा किरोड़ी से हुई गर्मा-गर्मी को लेकर सवाल पूछ बैठे तो हनुमानजी को भी रामायण की पंक्तियां याद आ गईं।
बोले- उन्होंने जब इस्तीफा दिया था। तब एक ट्वीट किया था- रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाय पर वचन न जाई। फिर इस्तीफा वापस ले लिया… तो एक हिसाब से प्राण त्याग देने चाहिए थे…पर वे प्राण नहीं त्याग सकते। डॉक्टर साब से ज्यादा लड़ाका मैं हूं। मैं भी चाहता तो ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता था। मैं भी राजस्थान में पार्टी चला रहा हूं। मुझे इन बातों का ध्यान रखना पड़ता है।
मेरे उनके लंबे रिश्ते रहे हैं। मैंने रिश्ता निभाया। उनसे आप-आप कहकर बात कर रहा था। वे पंचायती में कूद पड़े। उनका क्या लेना-देना था? उनको कौन पूछ रहा है?
खैर, बाबा किरोड़ी बेनीवाल जी से बहस के बाद हर्ट हुए। वे इस किस्से को पीछे छोड़ एसआई भर्ती के बाद आरएएस परीक्षा के अगले मुद्दे की ओर कूच कर चुके हैं।

सांसद हनुमान बेनीवाल ने डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को याद दिलाया इस्तीफे का किस्सा।
3. ‘घर का भेदी लंका ढहाए’
माननीय न्यायालय ने एसआई भर्ती पर फैसला सुनाते हुए कहा था- घर का भेदी लंका ढहाए। 28 अगस्त का दिन था। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने फैसला सुनाया था। बोले- इन लोगों ने विश्वास का संकट पैदा कर दिया।
न्यायालय ने घर के भेदियों को लिस्ट भी जारी की। एक के पास हमारे रिपोर्टर पहुंचे। बात की तो सफाई समारोह शुरू हो गया। वे बोले- इंटरव्यू में अकेला कोई व्यक्ति किसी को फेवर कर ही नहीं सकता। अगर मैं किसी को फेवर करना चाहता तो क्या 50 में से सिर्फ 28 नंबर देता?
हाईकोर्ट ने जो यह टिप्पणी की है, सब इंस्पेक्टर की परीक्षा रद्द होने को लेकर की है। इसमें जो मेंबर्स की भूमिका सामने आई थी, जिनकी जांच चल रही है, हो सकता है उन्होंने उसके संदर्भ में कही हो।
खैर, अपन तो इस पर कुछ नहीं कह सकते। हमें तो उन सैकड़ों युवाओं का ध्यान आ रहा है, जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की थी। लगन से नौकरी हासिल की थी। भर्ती रद्द होने के बाद उन पर क्या बीत रही होगी? वे तो मुन्नाभाई वाला गाना गुनगुना कर खुद को संभाल रहे होंगे- सपना टूटा है तो दिल कभी जलता है, हां थोड़ा दर्द हुआ…पर चलता है..

एसआई भर्ती रद्द होने के बाद युवा सड़कों पर हैं। साढ़े चार साल का हिसाब मांग रहे हैं।
4. चलते-चलते..
रामायण की बातें बहुत हुईं। अब बात करते हैं, मगरमच्छ की। चर्चा है कि जैसलमेर में खुदाई में 20 करोड़ साल पुराने मगरमच्छ के जीवाश्म मिले हैं। ये जेएनवीयू जोधपुर के भूविज्ञान विभाग के डीन डॉ. वीएस. परिहार का दावा है। वे कहते हैं कि ये हडि्डयां फाइटोसौर यानी मगरमच्छ की ही एक प्रजाति की है। खोज बीन चलती रहेगी।
वैसे पेपर-लीक में भी भारी-भरकम मगरमच्छ लपेटे में आ गए हैं। खुदाई चल रही है। पुराने कांड निकलेंगे। एक्सपर्ट जांच में लगे हैं। कौन मगरमच्छ है, कौन मछली और कौन कछुआ, सब साफ हो जाएगा। मंच से सीएम साहब भी दहाड़ लगा चुके हैं। कह रहे थे-पूर्व सीएम के पीएसओ तक पहुंच गए। किसी को नहीं छोड़ेंगे। जय-जय राजस्थान।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कह दिया कि पूर्व सीएम के पीएसओ तक तो पहुंच गए। सारे मगरमच्छ पकड़े जाएंगे।
वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब मंगलवार सुबह 7 बजे फिर मुलाकात होगी…
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