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उदयपुर में चातुर्मास कर रहे राष्ट्रसंत आचार्य पुलक सागर ससंघ के सान्निध्य में सात दिवसीय ऋषभ कथा का भव्य आयोजन 27 सितंबर से 3 अक्टूबर तक उदयपुर में होगा।
मुनि पुलक सागर ने बताया कि मेरे मन में बहुत दिनों से था जिस तरह से रामकथा, भागवत कथा को कथावाचवकों, वैदिक संतों ने जन-जन तक फैलाई। जो राम को नहीं जानते या कृष्ण के जीवन को पूरी तरह से नहीं जानते वे भी कथा के जरिए राम और कृष्ण के बारे में विस्तार से जानने लगे।
मुनि ने कहा कि इतिहास में प्रथम जैन तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव का कितना बड़ा योगदान इस देश में रहा है उसको स्मृति में वापस लाने की शुरूआत करने के लिए ऋषभ कथा कराने का सोचा।
कथा के रूप में और नाटय मंचन के रूप में भी इसके बारे में बताया जाएगा। भगवान ऋषभदेव के जीवन का पूरा वर्णन किया जाएगा। राम भगवान और ऋषभदेव का वंश एक ही है, अयोध्या में दोनों का जन्म हुआ है। उदयपुर के ऋषभदेव में इसकी शुरूआत चातुर्मास में की थी और इसके बाद डूंगरपुर में भी आयोजन किया था।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष विनोद फान्दोत ने बताया कि 27 सितम्बर को प्रात: 7.30 बजे शोभायात्रा (घट यात्रा) सर्वऋतु विलास से टाउन हॉल, प्रात: 8.30 बजे ऋषभ कथा का शुभारंभ, सायं 5.30 बजे ऋषभ कथा, महाराज नाभिराय राज दरबार, आरती, तीर्थंकर माता के सोलह स्वप्न का मंचन, गरबा गरबा नृत्य होगा।
दूसरे दिन 28 सितम्बर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा एवं सायं 5.30 बजे भगवान जन्मोत्सव आरती, पालना झुलाना, डांडिया, गरबा नृत्य, तीसरे दिन 29 सितम्बर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा, सायं 5.30 बजे बाल क्रीड़ा, ऋषभ कुमार युवराज पद, विवाह प्रस्ताव, ऋषभ कुमार की भव्य बारात, गरबा नृत्य होगा।
चौथे दिन 30 सितम्बर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा एवं सायं 5.30 बजे युवराज का राज्याभिषेक, पुत्र-पौत्र उत्पत्ति, ब्राह्मी सुन्दरी की प्रस्तुति नीलांजना नृत्य एवं वैराग्य आरती, गरबा नृत्य, कवि सम्मेलन होगा। पांचवे दिन 1 अक्टूबर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा एवं सायं 5.30 बजे भरत चक्रवर्ती दरबार, भरत चक्रवर्ती दिग्विजय यात्रा, ऋषभ कुमार की दीक्षा, भगवान की आहार चर्या आरती, भरत-बाहुबली युद्ध, गरबा नृत्य होगा।
छठे दिन 2 अक्टूबर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा एवं सायं 5.30 बजे समवशरण रचना दिव्य ध्वनि, आरती, गरबा नृत्य का समापन एवं अन्तिम सातवें दिन 3 अक्टूबर को प्रात: 8 बजे ऋषभ कथा एवं सायं 5.30 बजे तक ऋषभ विधान आरती, नाटिका, सम्मान समारोह का आयोजन होगा
ये होंगे ऋषभ कथा के मुख्य पात्र मुख्य संयोजक पारस सिंघवी एवं अशोक शाह ने बताया कि ऋषभ कथा में माता पिता बनने का सौभाग्य विनोद सीमा फांदोत, ऋषभ कुमार बनने का सौभाग्य उज्ज्वल भारती जैन, सौधर्म इंद्र सुनील निवेदिता महतिया अजमेर वाले, ब्रह्मोत्तर इंद्र विरेन्द्र कुमार राजकुमारी गदिया, कपिष्ट इन्द्र देवीलाल विद्या गंगावत एवं ब्रह्म इन्द्र सुशील पुष्पा चित्तौड़ा को प्राप्त हुआ है ।
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