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डिजिटल क्रांति के इस दौर में जहां बच्चे और युवा सुबह की शुरुआत मोबाइल नोटिफिकेशन से करते हैं और रात तक सोशल मीडिया की दुनिया में डूबे रहते हैं, वहीं डीग जिले का श्रीजड़खोर गोधाम एक अलग ही मिसाल पेश कर रहा है। यहां स्थित श्री गणेशदास भक्तमाली वेद विद्

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दिन की शुरुआत प्रार्थना, सूर्य उपासना, वेद पाठ और यज्ञ से होती है। दिनचर्या में योग, ध्यान, व्यायाम और पारंपरिक खेल शामिल हैं। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर सख्त प्रतिबंध है। इतना ही नहीं, विद्यार्थी अपने अभिभावकों से सप्ताह में केवल एक बार बात कर सकते हैं और महीने में केवल एक बार ही मिल पाते हैं। अनुशासन का यह कठोर

अनुशासन की मिसाल – प्रेरणादायक दिनचर्या

ब्रह्म मुहूर्त में जागरण और प्रार्थना,वेद अभ्यास, यज्ञ, ध्यान और गायत्री जप,योग और पारंपरिक खेलों के जरिए शारीरिक मजबूती,त्रिकाल संध्या और सेवा भाव का अभ्यास,नियमित गोसेवा और स्वच्छता पर विशेष बल,अभिभावकों से सीमित संवाद, पूर्ण आत्मनिर्भरता

अवसाद से जूझते युवाओं के लिए पॉजिटिव संदेश

नरसिंह मंदिर के महंत धनंजय दास महाराज ने कहा कि आज जब समाज की नई पीढ़ी प्रतिस्पर्धा, तनाव और मानसिक अस्थिरता की गिरफ्त में है, तब श्रीजड़खोर गोधाम का यह गुरुकुल आशा की किरण बनकर सामने आ रहा है। यहां शिक्षा केवल ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। बच्चे करुणा, कृतज्ञता और सेवा भाव जैसे मूल्यों को जीना सीखते हैं।यह गुरुकुल इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि तकनीक और आभासी जीवन से दूर रहकर भी एक नई पीढ़ी न सिर्फ संस्कारी और विद्वान बन सकती है, बल्कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा में अग्रिम पंक्ति में खड़े होने वाली शक्ति भी बन सकती है।

श्रीजड़खोर गोधाम का यह वेद विद्यालय सचमुच एक ऐसी मिसाल है, जो आने वाले भारत की तस्वीर को बदलने की क्षमता रखता है। यह वह केंद्र है जहां सनातन संस्कृति के बीज बोए जा रहे हैं, जिनसे भविष्य में चरित्रवान, संतुलित और सशक्त भारत की फसल लहलहाएगी।



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