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दौसा कलेक्टर देवेंद्र कुमार की पहल पर जिले में वर्षा जल संरक्षण के कई अभिनव प्रयास किए जा रहे हैं।

दौसा जिले में पंचायती राज विभाग नाकारा एवं सूख चुके बोरवेल का रिचार्ज शाफ्ट के माध्यम से जल पुनर्भरण कार्य करवा रहा है। सिकंदरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत गंडरावा में चल रहे इस कार्य का निरीक्षण कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने किया और अधिकारियों को कार्य के सम

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उसी क्रम में पंचायती राज विभाग के माध्यम से जिले में पानी की समस्या को देखते हुए एक नई पहल की है। इसके तहत जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) के 11 नाकारा बोरवेल का चिह्नीकरण कर रिचार्ज शाफ्ट के माध्यम से पुनर्भरण कार्य करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सिकंदरा ब्लॉक में 4, बसवा में 3, बांदीकुई में 2 तथा दौसा एवं महवा में एक-एक नाकारा और सूखे बोरवेल को चिह्नित कर पुनर्भरण कार्य करवाया जा रहा है।

बोरवेल रिचार्ज सॉफ्ट की प्रक्रिया

बोरवेल रिचार्ज सॉफ्ट की प्रक्रिया

जलग्रहण क्षेत्र में बनाए जाते हैं पुनर्भरण गड्डे

एक्सइएन सीताराम मीना ने बताया कि सबसे पहले पुनर्भरण गड्डे बनाए जाते हैं, जो ऐसी कृत्रिम संरचना होती है जिससे पानी का जमीनी स्तर ऊंचा किया जा सकता है। पुनर्भरण गड्डों में संरचना पूर्ण होने के बाद कुओं की तरह खुली जगह नहीं होती है जिससे दुर्घटना होने का खतरा नहीं रहता है। यह गड्डे ऐसे स्थानों पर बनाये जाते हैं जहां पर्याप्त जलग्रहण क्षेत्र उपलब्ध हो, जमीन में पानी का रिसाव तेजी से हो, ट्यूबवैल, कुएं अथवा जमीन के नीचे बने स्टोरेज टैंक के पास हो तथा घाटीनुमा स्थान हो। पुनर्भरण के लिए जमीन के अन्दर पानी का तल, जमीन की सतह व इसके नीचे मिट्टी का प्रकार अति महत्वपूर्ण है। यदि सतही मिट्टी काली हो व इसके नीचे बालू मिट्टी हो तो यह पुनर्भरण के लिए उपयुक्त होती है।

आधे से तीन मीटर व्यास के होते हैं गड्डे

एक्सइएन ने बताया कि पुनर्भरण गड्डे आधे से तीन मीटर व्यास के हो सकते हैं। यदि जलग्रहण क्षेत्र पर्याप्त है व जल रिसाव की दर अधिक हो तो गड्डे बड़े आकार के बनाए जाते हैं। इन गड्डों की गहराई 2 से 3 मीटर रखी जाती है। जहां तक संभव हो गड्डों की गहराई बिखरी हुई चट्टानों तक या पोरस मिट्टी तक होनी चाहिए। गड्डों के अन्दर उल्टी फिल्टर सामग्री की तीन परत बिछायी जाती है। सबसे नीचे मोटी गिट्टी अथवा बोल्डर को एक तिहाई हिस्से में भरा जाता है, उसके बाद बारीक गिट्टी इसके दूसरे एक तिहाई हिस्से में भरी जाती है तथा इसके ऊपर तारों की बारीक जाली लगाकर शेष एक तिहाई हिस्से में मोटी रेत भर दी जाती है। गड्डों को बरसात का अत्यधिक जल आने वाले निचले स्थानों पर बनाया जाता है।

कलेक्टर ने लोगों से बारिश का जल संरक्षण की अपील की है

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भूजल ऊंचा करने की सस्ती संरचना

उन्होंने बताया कि पुनर्भरण गड्डे जमीनी जल ऊंचा करने की काफी सस्ती संरचना है। गांव या शहर के हैंडपम्प व नलकूपों का जल जहां सड़क से बहता हुआ बेकार चला जाता है वहां भी छोटे आकार के गड्डे निर्मित कर जल को बचाया जा सकता है व हैंडपम्प एवं नलकूपों की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। पुनर्भरण गड्डों के जलग्रहण क्षेत्र में जीवाणु अथवा रासायनिक पदार्थ नहीं होने चाहिए तथा पुनर्भरण जल प्रदूषण मुक्त होना चाहिए।



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