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राजस्थान के कोटा का अपना घर आश्रम 13 साल में करीब 850 गुमशुदा लोगों को उनके परिवार से मिला चुका है। ये लोग अवसाद या मानसिक रूप से दिव्यांग होने से परिवार से बिछुड़ गए थे। अपने या परिवार के बारे में बता नहीं सके।
आश्रम की कार्यालय प्रभारी अंजलि प्रजापति बताती हैं कि इनमें से तीन के परिवार तो ऐसे रहे, जिन्होंने दूर-दूर तक इन्हें तलाशा। बरसों तक नहीं मिले तो थक-हार कर मृत मान लिया। उनका श्राद्ध तर्पण भी कर दिया था। ऐसे कई परिवारों की खुशियां जिंदा हो गईं, जब उन्हें अपना घर से सूचना मिली। बताया गया कि जिन्हें आप तलाश रहे हैं, वे हमारे यहां सकुशल हैं। आइए और ले जाइए। पढ़िए; अपनों से मिलन की ये कहानियां…
खोज… दक्षिण भारत के नेटवर्क से पहचान कराई
कोटा रेलवे स्टेशन से 2022 में मानसिक दिव्यांग महिला मिली। दक्षिण भारतीय लग रही थी। दक्षिणी राज्यों के पुलिस मुख्यालयों को सूचना दी। 2024 में उसकी पहचान हुई। वह तेलंगाना की मीना मुरकुल्ला हैं। पति ने 5 साल खोजने के बाद मृत मान श्राद्ध कर दिया।
लापता बुजुर्गों को पहुंचाने का तरीका
देश में अपना घर की 66 शाखाएं हैं। लापता की पूरी डिटेल सबको भेजते हैं। वीडियो कॉल कर कंफर्म करते हैं। आश्रम बुजुर्गों का रिकॉर्ड पुलिस में खंगालते हैं।
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