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एसीपी राजेंद्र प्रसाद दिवाकर (फाइल फोटो)
जोधपुर के एसीपी सूचना एवं सुरक्षा पुलिस आयुक्तालय के राजेंद्र प्रसाद दिवाकर 31 जुलाई को सेवानिवृत हो जाएंगे। दिवाकर की पहचान एक बेहतरीन पुलिस अधिकारी के तौर पर रही है।
16 मार्च 1966 को पाली जिले के देवली कला गांव में जन्मे राजेंद्र प्रसाद दिवाकर का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। पिता लक्ष्मण दास लघु सीमांत किसान और मजदूर थे जबकि माता भंवरी देवी गृहिणी के साथ ही फ़ैमिन का काम भी किया करती थी।
मजदूरी के साथ की पढ़ाई
दिवाकर ने कक्षा 10 तक की पढ़ाई गांव में पूरी की और आगे की की पढ़ाई के लिए अजमेर के किशनगढ़ में मजदूरी करने के साथ साथ ग्रेजुएशन की। साल 1989 में पुलिस उप निरीक्षक के पद पर भर्ती हुए। साल 1997 में निरीक्षक पुलिस के पद पर प्रमोशन हुआ। 2014 में राजस्थान पुलिस सेवा में प्रमोशन हुआ। प्रमोशन के दौरान ज्यादातर कार्यकाल जोधपुर और जोधपुर के आसपास रहा।
दिवाकर ने आबूरोड सिरोही में अपनी ड्यूटी तैनाती के दौरान जहुरखानी गैंग को गिरफ्तार कर 24 वाहन बरामद किए थे। इसके अलावा शास्त्री नगर जोधपुर में 27 दोपहिया वाहन और चार पहिया वाहन भी बरामद किए थे।
महामंदिर को बनाया आदर्श थाना
राजस्थान पुलिस अकादमी से सर्वश्रेष्ठ पुलिस अनुसंधान का पारितोषिक भी मिल चुका है। महामंदिर थाना अधिकारी रहते हुए पुलिस थाना महामंदिर को आदर्श पुलिस थाना बनाया। इसके अलावा भीलवाड़ा जिले में नाकाबंदी के दौरान दो पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपी राजू फौजी की गिरफ्तारी में लगे दल का नेतृत्व कर गिरफ्तार किया। वहीं मेड़ता शहर के धार्मिक जुलूस में सदैव रहने वाले धार्मिक तनाव को खत्म करने के लिए सभी वर्गों के सहयोग से चार जुलूस का मार्ग परिवर्तन करवाकर स्थायी समाधान किया।
दिवाकर को उत्तम सेवा चिन्ह, अति उत्तम सेवा चिन्ह, डीजीपी डिस्क पुलिस पदक भी मिल चुका है। दिवाकर की पहचान ईमानदार छवि के अवसर की होने के चलते कई बार कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर इन्हें इस तरह के इलाकों में भेजा जाता था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उनकी पहचान एक साइलेंट वर्कर के तौर पर रही है।
ये मिले पारितोषिक
उन्हें उत्तम सेवा चिन्ह, अति उत्तम सेवा चिन्ह, डीजीपी डिस्क, पुलिस पदक मिले हैं।
साइलेंट वर्कर की पहचान
पुलिस अधिकारियों के बीच दिवाकर की पहचान साइलेंट कर्मी की रही है। वे शहर की नब्ज बहुत गहराई से समझते हैं। मानवीय चेहरा ईमानदार छवि के कारण कभी भी कानून व्यवस्था की स्थिति नहीं बिगड़ी वरन जहां भी स्थिति बिगड़ी इन्हें वहां भिजवाया जाकर स्थिति को नियंत्रित किया गया।
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