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भास्कर न्यूज | नागौर विजयादशमी पर जिला स्टेडियम में गुरुवार शाम को रावण दहन किया गया। यह नजारा देखने के लिए शहरवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी। दहन के दौरान रोचक नजारा भी देखने को मिला। करीब 70 फीट का रावण जल तो गया, लेकिन उसका ढांचा नहीं गिरा। उसे गिराने के
ट्रैफिक पुलिस की ओर से भी बेहतर यातायात व्यवस्था की गई। मानासर चौराहे से आगे ही बैरिकेड लगा जाम की स्थिति बनने से रोकी। वहीं कॉलेज रोड से स्टेडियम की ओर वाहनों की आवाजाही तैनात पुलिस कर्मियों ने रोकी। यहां से शहरवासियों को स्टेडियम तक पैदल ही जाना पड़ा। जिससे दहन होने के बाद मैदान के बाहर भीड़ व वाहनों के जाम की स्थिति नहीं बनी।
साढ़े 6 बजे कार्यक्रम समाप्त होने के साथ ही लोगों ने भीड़ से बचने के लिए मैदान से बाहर आना शुरू कर दिया। युवा मैदान में खड़े रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के दहन को देखने के लिए उत्साहित हो रहे थे। इधर साढ़े 5 बजते-बजते राम जी की सवारी स्टेडियम में आते ही सभी ने जयश्री राम के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। रामजी की सवारी शाम सवा 4 बजे हाथी चौक राम मंदिर से शुरू होकर आर्य समाज, नकास गेट, मानासर कॉलेज रोड होते हुए स्टेडियम पहुंची। ये सवारी 150 साल से रथ पर सवार होकर रावण वध में शामिल होती रही है। रघुनाथ मंदिर से मैदान पहुंचे युद्ध स्वरुप में प्रत्यंचा चढ़ाए भगवान राम पहुंचे। राम का रूप धरे बालक भी नजर आए। बालिकाओं ने महिषासुर रूप धरे तलवार लिए कलाबाजी भी की। रावण दहन शुरू हुआ तो 6 मिनट में रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद तीनों के पुतले धराशायी हो गए। रावण का दहन की शुरुआत सभापति की बजाय कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने की। . 5 बजकर 30 मिनट पर स्टेडियम पहुंची रामजी की सवारी। . 06:07 पर सबसे पहले लगाई मेघनाद को आग। . 06:08 पर कुंभकर्ण का हुआ दहन . 06.09 पर रावण जलने लगा। . 06:11 बजे तक तीनों का दहन हो गया।
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