ऋषभदेव में दूसरे दिन रथयात्रा में भगवान की भक्ति में गेर खेलते भक्तगण।
ऋषभदेव कस्बे में दिगम्बर जैन समाज के पर्यूषण पर्व की समाप्ति पर आयोजित दो दिवसीय रथोत्सव का उल्लास मंगलवार रात डेढ़ बजे समाप्त हुआ।
दूसरे दिन चून्दड पहने महिलाओं के गरबा और पागधारी पुरूषों की गेर का आयोजन हुआ। आधी रात बाद रथों को निज मन्दिर लौटाने और जिन विग्रह को विराजित करने के साथ उत्सव का समापन हुआ।
रात आठ बजे भण्डार धूलेव के जवानों ने रथों को सलामी दी और भगवान जिनेन्द की आरती उतारी गई। इसके बाद पाटूना चौक से दूसरे दिन की यात्रा शुरू हुई। इससे पहले पगडीधारी पुरूषों ने गेर रमना शुरू किया।

मंगलवार की रात को ऋषभदेव में महिलाएं डांडियां खेलती हुई।
चौक पर उनके अनुशासित फेरों और नर्तन देखने के लिए हजारों लोग जुटे थे। आर्केस्ट्रा और ढोल की धुनों पर एक घंटा गेर रमी गई। इसके बाद चुन्दड साडी पहने महिलाओं का गरबा नृत्य हुआ।
रात दस बजे तक अलग-अलग युवक युवतियों के जोड़ो ने डांडिया रमा। चौक से रवानगी के बाद रथयात्रा नेहरू बाजार होती हुई सदर बाजार पहुंची। जहॉ पर गेरियों के साथ महिलाओं का गरबा हुआ।
यही भण्डार धुलेव बैण्ड ने स्वर लहरियां बिखेरी। विश्राम के दौरान जगह-जगह गेर डांडिया और तीन ताली गरबा के साथ यात्रा ने कदम बढाये। रात्री 1.30 बजे रथयात्रा ऋषभ चौक स्थित समाजसेवी राजमल कोठारी की दुकान के पास पहुंचा।

रथ में भगवान के दर्शन करते भक्त और पास में बैठे समाज के प्रमुखजन।
यहां पर गरबा नृत्य प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित कर पारितोषिक तथा सहयोग करने वालों का आभार व्यक्त किया गया। दो बजे भगवान ऋषभदेव के निज मन्दिर में रथों का प्रवेश हुआ। भगवान के जयघोष के बीच रथोत्सव का समापन हुआ।
रथयात्रा में दिगम्बर जैन दसा नरसिंहपुरा समाज, तीर्थ रक्षा कमेटी, नवयुवक मण्डल, महिला मण्डल, पुलक जन चेतना मंच, महिला जागृति मंच, वसुनिधि क्लब, तरूण क्रान्ति मंच, युवा परिषद आदि ने सहयोग दिया।

समाज की महिलाएं एक ड्रेस कोड में।
इनपुट : शैलेंद्र जैन, ऋषभदेव
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