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इस बार रक्षाबंधन पर्व 9 अगस्त को मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि के साथ शुरू हो रही भद्राकाल 8 अगस्त की रात 1:49 बजे समाप्त हो जाएगा। यानी 9 अगस्त की सुबह तक भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा, जिससे राखी बांधने में कोई बाधा नहीं आएगी। दोपहर बाद चौघडिय़ों के हिसा
श्रावण पूर्णिमा के दिन हेमाद्रि संकल्प और श्रावणी उपाकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाएंगे। साधक इस दिन दशविधि स्नान के साथ पितरों का तर्पण करेंगे। इसके बाद ऋषियों का आवाहन और पूजन होगा। फिर नया जनेऊ धारण किया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा पर यज्ञोपवीत बदलने से लेकर भाई-बहनों के रक्षाबंधन तक, शुभ संकल्पों के साथ कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। इधर, घरों में रक्षा बंधन पर्व की तैयारी शुरु हो गई है। दूर-दराज रहने वाले भाइयों को बहनों द्वारा राखियां भेजी जा रही हैं। इसलिए राखियों का बाजार सज गया है। शहर में 200 से ज्यादा राखियों के फड़ लगे हैं जहां 10 रुपए से 250 रुपए तक की राखी मौजूद हैं।
विक्रेता संजय गुप्ता ने बताया कि अभी शुरुआत है। शनिवार और रविवार से तेजी आएगी। खगोलीय दृष्टि से ऐतिहासिक इस बार रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि खगोलीय दृष्टि से भी ऐतिहासिक बन गया है। 95 साल बाद वही दुर्लभ संयोग दोहराया जा रहा है, जो 1930 में बना था। तारीख वही 9 अगस्त, दिन शनिवार, पूर्णिमा तिथि भी महज 5 मिनट के अंतर से उसी समय शुरू हो रही है। भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी, जिससे राखी बांधने का संपूर्ण शुभ मुहूर्त मिलेगा। बहनों को सुबह से दोपहर तक 7 घंटे 37 मिनट का विशेष समय मिलेगा। साथ ही हेमाद्रि संकल्प और शनि श्रावणी उपाकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान भी इसी मुहूर्त में संपन्न होंगे। ज्योतिषी सुभाष व्यास ने बताया कि इस बार रक्षाबंधन पर 1930 जैसा ही अद्भुत संयोग बन रहा है। 9 अगस्त को रक्षाबंधन शनिवार को ही पड़ रहा है, जैसे उस वर्ष पड़ा था।
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