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राजयोगिनी मोहिनी दीदी ने इंद्रियों पर विजय पाना सच्ची विजयादशमी मानना बताया है।
टोंक जिले में गुरुवार का दशहरे का पर्व मनाने को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। शाम के समय हर साल की जिला मुख्यालय समेत जिले के विभिन्न हिस्सों में बुराई के प्रतीक रावण समेत कुंभकरण, मेघनाथ के पुतले जलाए जाएंगे।
दशहरे के पर्व को लेकर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी ने कहा कि अपनी ज्ञानेंद्रियों और कर्मेंद्रियों पर विजय प्राप्त करना ही सच्ची विजयादशमी मानना है, तभी हम दैवीय स्वरूप बनते जायेंगे।
‘एक बुराई छोड़े, दूसरी हावी हो जाती है’ उन्होंने कहा कि आज प्रवृति में रहते हुए 5 विकार नर में है और 5 विकार नारी में हैं, यह 10 विकारों का प्रतीक ही रावण को 10 सिर दिखाते हैं और जब एक को काटते हैं, तो दूसरा आ जाता है। ऐसे ही मनुष्य जब एक बुराई को छोड़ता है तो दूसरी उस पर हावी हो जाती है, लेकिन इन सब का मूल है देह अभिमान है,उसे समाप्त करके ही हम इन विकारों पर जीत का सकते हैं।
उन्होंने कहा कि रावण को एक तरफ मूर्ख बताते हैं तो वही उसको पढ़ा लिखा और विद्वान भी बताते है। साथ यह भी बताते हैं कि वह प्रकृति के पांचों तत्वों को अपने अधीन कर लिया था। वास्तव में वर्तमान के मनुष्य कि मनोस्थिति का चित्रण किया गया है। रामायण में वर्णित युद्ध हमारे मन में हमारी उच्चतर आत्मा और हमारी कमजोरियों के बीच चल रहे संघर्ष का एक रूपक है। ईश्वर हमें बुराई का प्रतिरोध करने की शक्ति और अपनी वास्तविक पहचान के अज्ञान से उत्पन्न छल-कपट से बचने की बुद्धि देकर इस संघर्ष में हमारी सहायता करते हैं।
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