☜ Click Here to Star Rating


राजस्थान के चार जिलों में ‘जीवन-चक्र’ (लाइफ साइकिल) तबाह हो गया है। 26.40 लाख पेड़ कट चुके हैं। अगले पांच साल में और 38.54 लाख पेड़ और काटे जाएंगे। इससे बड़ी संख्या में तितली, पक्षी और अन्य कीट-पतंगें खत्म हो गए हैं। इसका सीधा असर पेड़-पौधों पर पड़ा है। प

.

इन पांचाें बर्बादी की एक ही वजह है- सोलर प्लांट

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

क्यों काटे जा रहे हैं लाखों पेड़ बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में सोलर प्लांट के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा चुके हैं। इनमें अधिकांश खेजड़ी के पेड़ थे। इसका स्थानीय लोग विरोध भी कर रहे हैं।

बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय में पर्यावरण विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉक्टर अनिल छंगाणी ने बताते हैं- प्रदेश भर में 26,452 मेगावाट बिजली का उत्पादन सोलर से हो रहा है।

लगभग 1.32 लाख एकड़ जमीन पर प्लांट लगे हैं। एक मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 4 से 5 एकड़ भूमि पर सोलर प्लेट लगती है। राजस्थान में प्रति एकड़ 15 से 20 पेड़ और दस फीट तक लंबी 25 से 30 झाड़ियां हैं। ऐसे में सोलर प्लांट के लिए करीब 26 लाख पेड़ व 40 लाख झाड़ियां काटी गई हैं।

प्रदेश की रिन्युएबल एनर्जी पॉलिसी के अनुसार 2030 तक सोलर से 65 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य है यानि 38,548 मेगावाट क्षमता का प्लांट लगेगा। इसके लिए 92 लाख एकड़ जमीन चाहिए होगी। ऐसे में पांच साल में और 38.54 लाख पेड़ और काटे जाएंगे।

तीनों सैटेलाइट इमेज बीकानेर के नूरसर की हैं। पहली तस्वीर में इलाके में लगे पेड़ नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर तब की है, जब सोलर प्लांट के लिए पेड़ काट दिए गए। तीसरी तस्वीर पेड़ काटने के बाद की है।

तीनों सैटेलाइट इमेज बीकानेर के नूरसर की हैं। पहली तस्वीर में इलाके में लगे पेड़ नजर आ रहे हैं। दूसरी तस्वीर तब की है, जब सोलर प्लांट के लिए पेड़ काट दिए गए। तीसरी तस्वीर पेड़ काटने के बाद की है।

कहां, कितना बड़ा प्लांट

  • फलोदी : 13 हजार 800 एकड़ में सबसे बड़ा भड़ला सोलर प्लांट जो 2245 मेगावाट का है।
  • जैसलमेर : 3 हजार 500 एकड़ भूमि पर 1300 मेगावाट का रिन्यू सोलर प्रोजेक्ट, एनटीपीसी का 296 मेगावाट का फतेहगढ़ सोलर प्लांट, भीमासर में अडाणी का 250 मेगावाट प्लांट।
  • बीकानेर : गजनेर में हिंदूजा रिन्यूवल का 25 मेगावाट, कोलायत में 550 मेगावाट, नोखा, नोखा दहिया, नोखा तहसील में अलग-अलग स्थानों पर 500 मेगावाट तथा नूरसर, छतरगढ़, जालवाली आदि क्षेत्रों में 200 मेगावाट के सौर ऊर्जा प्लांट लगे हैं।

प्लांट के लिए बेच दी जमीन, अब रोजगार की तलाश में छोड़ रहे गांव

बीकानेर के नूरसर गांव में ग्रामीणों ने 90 प्रतिशत जमीन सोलर प्लांट के लिए कंपनी को बेच दी। गांव में हर 500 मीटर से एक किलोमीटर की दूरी पर मुख्य सड़क के एक किनारे सोलर प्लांट है। वहां एक पेड़ भी नजर नहीं आता, वहीं दूसरी ओर पेड़ व झाड़ियां हैं।

  • गांव के गणपत ने बताया कि उसने 80 बीघा जमीन प्लांट वालों को बेच दी। जमीन बेचकर आया पैसा परिवार में बंट गया। पांच साल में वो पैसा खत्म हो गया। अब हम बेरोजगार हैं। पशुओं के लिए चारा भी पैसा देकर मंगवाना पड़ता है। काम नहीं होने से परिवार के ज्यादातर लोग गांव छोड़ चुके हैं।
  • किसान जुगराम ने बताया कि गांव में 200 से 250 घर हैं। सभी का यही हाल है। अधिकतर बेरोजगार हैं। सोलर प्लांट पर 15-20 लोगों की ड्यूटी लगी हुई है। वहां 12 घंटे ड्यूटी पर 400 रुपए मिलते हैं। बाकी लोगों के पास वो काम भी नहीं है।

साेलर प्लांट के लिए हर सप्ताह 4 करोड़ लीटर पानी खर्च

चारों जिलों में सोलर प्लांट को ठंडा व साफ रखने के लिए एक सप्ताह में चार करोड़ लीटर पानी खर्च किया जाता है। इतना पानी तीन लाख लोगों की प्यास बुझा सकता है। प्लांट प्राकृतिक जल स्रोतों से दोहन कर रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र का जल दोहन भी बढ़ रहा हैं। सैटेलाइट इमेज के जरिए देखें तो 2014 से 2022 के बीच नाड़ी कुओं से काफी संख्या में दोहन हुआ है। वहीं सोलर प्लांट की वजह से इस क्षेत्रों में पांच डिग्री तापमान भी बढ़ा है।

खाजूवाला की तरफ यह नहर खेती के लिए है( यहां लगे प्लांट इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं।

खाजूवाला की तरफ यह नहर खेती के लिए है( यहां लगे प्लांट इसी पानी का उपयोग कर रहे हैं।

पक्षी-तितलियां, कीट-पतंगें खत्म होने से पेड़-पौधों में नहीं बन रहे फल-बीज

एग्रोनोमिस्ट और हार्टिकल्चरिस्ट संतोष बाेहरा ने बताया कि फलौदी से देचू बेल्ट में अनार व खजूर के कई फॉर्म हैं। यहां सोलर हब के लिए लाखों पेड़ काटने के कारण पक्षी-तितलियां, कीट-पतंगें खत्म हो गए हैं।पक्षी-तितलियां, कीट-पतंगें न होने के कारण अब किसानों को आर्टिफिशियल पॉलिनेशन (कृत्रिम परागण) करना पड़ रहा है। आर्टिफिशियल पॉलिनेशन में तितली या पक्षियों द्वारा नहीं बल्कि मनुष्य पराग को एक फूल से दूसरे फूल तक पहुंचाता है।

असर : खजूर-अनार का उत्पादन घटा

पॉलिनेशन या परागण की प्रक्रिया प्रभावित होने से अनार-खजूर का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पहले जहां 1 पौधे से एक क्विंटल खजूर का उत्पाद होता था, अब ये घटकर 20 से 25 किलो रह गया। पिछले तीन सालों में ये समस्या ज्यादा बढ़ गई है। मूंग, मोठ, बाजरा आदि की फसलों के भी यही हाल है।

सोलर प्लांट के आस-पास भूमि बंजर हो रही

संतोष बाेहरा ने बताया कि पॉलिनेशन नहीं होने से पौधों में प्रजनन नहीं हो पा रहा। बीजारोपण भी करते हैं तो अंकुर नहीं निकल रहा। बढ़ते तापमान की वजह से इस बार किसानों से दो से तीन बार बिजाई कर दी। ऐसे में धीरे-धीरे आस-पास की भूमि में फसलें और पेड़ों पर फल-फूल कम हो रहे हैं। जमीन बंजर होती जा रही है।

खेजड़ी काटने के विरोध में 1 साल से धरना

खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष हैं। इसे रेगिस्तान का कल्पवृक्ष भी कहा जाता है। यह मिट्टी को स्थिर रखने, रेत के कटाव को रोकने और रेगिस्तान की पारिस्थितिकी(इकोसिस्टम) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

खेजड़ी की पत्तियां और सूखे फल पशुओं के लिए एक महत्वपूर्ण चारा स्रोत हैं। इस पर लगने वाली सांगरी सब्जी के रूप में काम आती है और इसका औषधीय महत्व भी है। खेजड़ी पर मधुमक्खियां छत्ते बनाती है जड़ों में रेप्टाइल व अन्य जीव के आवास होते हैं।

बीकानेर के नोखा दहिया में लगे सोलर प्लांट में खेजड़ी कटने के बाद वहां पर्यावरण प्रेमी भोमाराम भादू पर्यावरण संघर्ष समिति खेजड़ला के तत्वावधान में 18 जुलाई 2024 से धरना दे रहे है। इसके बावजूद इस वर्ष मई माह में नोखा दहिया, जयमलसर की दोही आदि क्षेत्र में 140 से अधिक खेजड़ी के पेड़ काट दिए थे।

लैंड यूज पैटर्न को समझना जरूरी : पर्यावरणविद्

पर्यावरणविद् प्रोफेसर अनिल छंगाणी ने बताया कि सोलर एनर्जी हमारी जरूरत है लेकिन इससे पहले यह देखना पड़ेगा कि जिस जगह पर सोलर प्लांट लगाया जा रहा है, वहां का प्रजेंट लैंड यूज पैटर्न क्या है। जमीन की सोशल इकॉनोमिक वैल्यू क्या है। वहां कितनी खेती हो रही है। उसमें से कितनी बारानी या ट्यूबवैल से खेती हो रही है।

बडे़ प्रोजेक्ट के लिए काट रहे पेड़

सोलर कंपनी के ऑनर बीकानेर के शरद आचार्य बताते हैं कि पश्चिमी राजस्थान में दो तरह के प्रोजेक्ट हैं। कुसुम योजना के अधीन प्रोजेक्ट लग रहे हैं, वो स्टेट के हैं। अन्य सेंट्रल प्रोजेक्ट है जो सीधा सेंट्रल ग्रिड से केंद्र में बिजली भेजते हैं। सेंट्रल के बड़े प्रोजेक्ट हैं। जिसके लिए पेड़ काटे जा रहे हैं।



Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Comments

Leave a Reply

error: Content is protected !!

Sign In

Register

Reset Password

Please enter your username or email address, you will receive a link to create a new password via email.

Discover more from Kuchaman City Directory

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading