झालावाड़ में स्कूल के कमरे की छत ढहने से 7 बच्चों की हुई मौत ने प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है। हजारों करोड़ रुपए मुफ्त योजनाओं स्कूल ड्रेस, स्कूटी, टैबलेट बांटने में खर्च कर दिए। लेकिन स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए पिछले दो बजट में हुई 625 करोड़ र
पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंघवी ने अफसरों की लेटलतीफी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि ज्यादातर अधिकारी फाइलों पर लिख देते हैं कि चर्चा कर रहे हैं। फाइलें पड़ी रहती है।
स्कूल हादसे के बाद भास्कर टीम ने शिक्षा विभाग के पिछले दो बजट की बड़ी घोषणाओं की पड़ताल की। जाना कि उन योजनाओं की वर्तमान स्थिति क्या है? फाइलें आखिर कहां अटकी हुई हैं? कब तक इन योजनाओं से वंचित रहना पड़ेगा?
पिछले दो साल में जर्जर स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट
बजट 2024-25 में प्रदेश के 750 स्कूलों की बिल्डिंग की मरम्मत के लिए 250 करोड़ रुपए की घोषणा हुई। वहीं, बजट 2025-26 में जर्जर स्कूलों की नई बिल्डिंग के निर्माण-मरम्मत के लिए 375 करोड़ रुपए की घोषणा। इनमें…2 हजार स्कूलों के भवनों की मरम्मत के लिए 175 करोड़ रुपए का प्रावधान था। वहीं, 225 करोड़ रुपए क्लासरूम, लैब, कंप्यूटर लैब और और टॉयलेट निर्माण के लिए थे।

बजट 2025-26 में शिक्षा विभाग की प्रमुख घोषणाएं
- 50 नए प्राथमिक स्कूल खोलने।
- 100 स्कूलों का क्रमोन्नयन। 100 उच्च माध्यमिक स्कूलों में नवीन विषय प्रारंभिक करने की घोषणा।
- प्रत्येक ब्लॉक पर एक उच्च माध्यमिक स्कूल।
- कॉलेजों में रानी लक्ष्मीबाई केंद्र।
- 10 जिला मुख्यालयों पर गर्ल चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट।
- कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय स्कूलों में डाइनिंग हाल व्यवस्था 65 करोड़ ।
- विद्यार्थियों की सुविधा के लिए करीब 4 हजार नव क्रमोन्नत स्कूलों में फर्नीचर।
- 15 हजार स्कूलों में 75 करोड़ खर्च कर सीसीटीवी कैमरों लगाना।
- 1500 स्कूलों में अटल लैब स्थापित करने की घोषणा।

शिक्षा पब्लिक से जुड़ा सेक्टर है, इसलिए इसमें बड़ी घोषणाएं की जाती हैं। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री दीया कुमारी की एक पुरानी तस्वीर।
बजट 2024-25 में शिक्षा विभाग की बड़ी घोषणाएं
- स्कूलों में 350 करोड़ की लागत से लाइब्रेरी और टॉयलेट सहित बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
- प्रदेश में 20 नए आईटीआई खुलेंगे।
- 8वीं, 10वीं, 12वीं में मेरिट में आने वाले स्टूडेंट्स को टैबलेट मिलेंगे।
- मेरिट में आए बच्चों को इंटरनेट कनेक्शन मुफ्त मिलेगा।
- सभी अनुदानित हॉस्टल में मेस भत्ता 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपए करने की घोषणा
दावों की हकीकत : औसत 30-40 फीसदी काम हुआ बजट घोषणा 30-40 फीसदी ही पूरी हो पाई है। काम बहुत धीमी गति से चल रहा है। 50 हजार से ज्यादा काम अभी लंबित चल रहे हैं। हालांकि, शिक्षा विभाग की रिपोर्ट में काम करने का दावा किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक जल कार्य की मरम्मत के लिए 20730 कार्य, बिजली संबंधी मरम्मत के 20470 कार्य। जर्जर फर्नीचर के 37535 कार्य और पंखों की मरम्मत से संबंधित 21408 कार्य करवाएं गए हैं। अधिकारियों ने स्कूलों में 70 हजार से अधिक काम करने का दावा किया है।

फाइलें कहां अटक रही हैं?
1. जिम्मेदारों के पास मीटिंग तक का समय नहीं 7-8 महीने हो गए, लेकिन फाइलों की पेंडेंसी खत्म करने के लिए शिक्षा सचिव के पास समय नहीं है। शिक्षा विभाग में धीमी गति का आलम ऐसा है कि विभाग के कानून से जुड़े केस जनवरी से पेंडिंग चल रहे हैं।
एक बार भी मीटिंग नहीं हुई है। जबकि यह मीटिंग महीने में दो बार करनी जरूरी होती है, लेकिन जनवरी से एक बार भी नहीं हुई है। शिक्षा सचिव हर मीटिंग कैंसिल कर देते हैं। हाईकोर्ट के आदेशों की पालना करने में ही शिक्षा विभाग गंभीर नहीं है। बजट घोषणाओं पर धीमी गति से काम हो रहा है।

काम के प्रस्ताव से लेकर बजट पास होने की प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि कई महीनों तक फाइलें दबी रहती हैं।
2. वित्त विभाग में स्वीकृति के इंतजार में पड़ी रहती है फाइलें बजट घोषणाएं पूरी करने के लिए वित्त विभाग बजट स्वीकृत करता है। वित्त विभाग ने राजनीतिक दृष्टि से जुड़ी घोषणाएं जैसे- छात्रों को मुफ्त में टैबलेट, स्कूटी, ड्रेस और फ्री इंटरनेट से जुड़ी घोषणाओं पर स्वीकृति देने में तत्परता दिखाता है, लेकिन स्कूलों के आधारभूत ढांचे से जुड़ी फाइलों पर गंभीरता नहीं दिखाता है।
शिक्षा विभाग में फाइलों की पेंडेंसी बढ़ रही है। वित्त विभाग के लिए फाइल भेजने पर वह स्वीकृति के इंतजार में पड़ी रहती है। बजट स्वीकृति की देरी पर जब वित्त विभाग के शासन सचिव से वैभव गालरिया से पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। वहीं, शिक्षा विभाव के शासन सचिव कृष्ण कुणाल से संपर्क नहीं हो पाया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री बोले- अधिकारी स्टैंड चेंज करें पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक प्रताप सिंघवी का कहना है कि अधिकारियों के रवैये की वजह से बजट घोषणाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। वित्त विभाग को गंभीरता दिखानी चाहिए।
प्रताप सिंह सिंघवी का कहना है कि स्कूलों के जर्जर हालातों को लेकर उन्होंने 16 जुलाई को शिक्षामंत्री मदन दिलावर को पत्र लिखा था, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। उनका कहना है कि ज्यादातर अधिकारी लिख देते हैं कि चर्चा कर रहे हैं। फाइल पड़ी रहती है। यह मनोवृत्ति अधिकारियों की ठीक नहीं है। फाइलों का निपटारा समय पर करना चाहिए।

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‘दिखाने की कोई चीज है तो वह है दया’
क्लास रूम की दीवार पर लिखी ये लाइन झालावाड़ जिले के पिपलोदी गांव के बच्चे रोज पढ़ते थे। उन्हें क्या पता था सरकारी सिस्टम के पास दया नहीं होती। हां, दिखाने के लिए घड़ियाली आंसू जरूर होते हैं, जो हर हादसे के बाद जमकर बहाए जाते हैं। इसी स्कूल के 7 बच्चों की मौत हुई है और 27 घायल हुए हैं। कई बच्चे अब तक बेसुध हैं…(CLICK कर पूरा पढ़ें)
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