‘इस दुनिया से जाने से पहले यह खत लिख रहा हूं…मैं सुरेश भोपालगढ़ में जेसीबी का मिस्त्री हूं…कई सालों की मेहनत के बाद भी कार नहीं खरीद पाया था…दूसरी तरफ 12वीं पास मेरा मौसेरा भाई प्रिंस है।
जिसने अपनी मंगेतर को सगाई में फॉर्च्यूनर गाड़ी दी…उसकी चकाचौंध से प्रभावित होकर मैंने पूछा- ऐसी क्या कमाई है?….इस पर उसने बताया कि वो फॉरेक्स ट्रेडिंग (विदेशी करेंसी) कर कई गुना कमाता है।
उसने मुझसे 12 लाख रुपए मांगे और एक महीने में स्कॉर्पियों देने का वादा किया…लेकिन दी नहीं बल्कि लालच देकर 58 गाड़ियों के हिसाब से 3 करोड़ 25 लाख रुपए मिलने वालों और रिश्तेदारों से और ले लिए…मेरी सरकार से विनती हैं कि यह पैसा वापस दिलाएं…।’
प्रिंस ने अपने भाई सुरेश की तरह कई निवेशकों को दिवाली पर 250 स्कॉर्पियो बांटने का झांसा दिया था। प्रिंस SOG के हत्थे चढ़ चुका है।
अमेरिकी डॉलर और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर ठगने का यह इकलौता केस नहीं है। ऐसी कई कंपनियां अभी भी कारोबार कर रही हैं। कई पैसा लेकर भाग चुकी हैं। ठगी के शिकार पीड़ित धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
भास्कर ने प्रिंस की तरह ही मोटी कमाई, विदेश में यात्रा और लग्जरी गाड़ियां गिफ्ट में देने का झांसा देने वाली कंपनियों की सोशल मीडिया पर पड़ताल की। पढ़िए- संडे बिग स्टोरी में…

एसओजी ने हार्वेस्ट कंपनी के जरिए ठगी करने वाले तीन आरोपियों को 21 सितंबर को गिरफ्तार किया था।
भाई ने वीडियो बनाकर खोले राज- मंगेतर को दी फॉर्च्यूनर तो झांसे में आया
भोपालगढ़ (जोधपुर) के धोरू गांव का रहने वाला प्रिंस उर्फ बंशीलाल इस गिरोह का मास्टरमाइंड है। प्रिंस पर दो सहयोगियों ममता भाटी और दिनेश बागड़ी के साथ फर्जी कंपनियां बनाकर 55 करोड़ की ठगी का आरोप है।
प्रिंस के मोसेरे भाई सुरेश ने वीडियो बनाकर और एक नोट लिखकर इस ठगी का खुलासा किया है। नोट में उसने बताया कि प्रिंस की सगाई हो चुकी थी। उसने अपनी मंगेतर को फॉर्च्यूनर गिफ्ट की थी।

अपनी मंगेतर को फॉरच्यूनर गिफ्ट देने के बाद उसने सोशल मीडिया के जरिए ये जानकारी शेयर की थी।
सुरेश ने नोट में लिखा कि- प्रिंस ने अपनी कमाई का जरिया फॉरेक्स और क्रिप्टो ट्रेडिंग बताया था। अगले दिन मिलने बुलाया और झांसा दिया कि उसे भी अमीर बना देगा।
इसके बाद 12 लाख लेकर सुरेश के नाम से 58 गाड़ियां बुक की थीं। रामेश्वर सोलंकी के नाम से 46, बाबू देवड़ा के नाम से 9, नेमाराम देवड़ा के नाम से 4, बसीनी मामा के नाम से 14, श्रवण देवड़ा के नाम से 28, सुनिल सांखला के नाम से 13, रवि के नाम से 13 और प्रिंस ने अपने पिता के नाम से 77 गाड़ियां बुक की और कुल 251 गाड़ियां लाने का वादा किया था।

तीनों आरोपी राजस्थान SOG की गिरफ्त में हैं।
मॉडल के हिसाब से 4.30 से 8.51 लाख रुपए में बुकिंग
सुरेश ने नोट में लिखा कि स्कॉर्पियो कि प्रिंस ने स्कॉर्पियो के अलग-अलग मॉडल के हिसाब से 4 लाख 50 हजार, 5 लाख 50 हजार, 7 लाख 40 हजार और 8 लाख 51 हजार रुपए तय किए थे।
251 गाड़ियों के हिसाब से लोगों से करीब 55 करोड़ रुपए ले लिए थे। वहीं, उससे 3 करोड़ 30 लाख रुपए लिए। नोट में उसने सरकार व एसओजी से गुहार लगाई और लिखा – ‘मैं दुनिया से जाने से पहले यही कहता हूं कि सभी गाड़ियों का पेमेंट प्रिंस उर्फ बंशीलाल से वापस दिलाया जाए।
भास्कर ने जब प्रिंस के भाई सुरेश सैनी से इस नोट व वीडियो के बारे में बात करनी चाही। लेकिन नंबर स्विच ऑफ होने के कारण बात नहीं हो सकी। रिपोर्टर उनके घर तक भी गया, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। परिवार के मुताबिक इस खुलासे के बाद से वह घर नहीं आया है।

ठगी का मास्टरमाइंड प्रिंस लोगों को झांसा देने के लिए सेमिनार के वीडियो सोशल मीडिया पर डालता था।
पहले 2 बार कर चुका है बड़ी ठगी
प्रिंस ने पहले ‘ट्रोनेक्स वर्ल्ड’ कंपनी खोलकर और 54 लोगों से करीब 6.50 लाख रुपए लेकर कंपनी बंद कर दी। फिर ऑनलाइन पढ़ाई का झांसा देकर भी 66 लाख रुपए की ठगी की।
हाल ही में उसने हारवेस्ट नाम की कंपनी बनाकर 22 लाख रुपए की स्कॉर्पियो महज 6 लाख रुपए देने का दावा करते हुए ठगी करना शुरू कर दिया था।

आरोपी प्रिंस के भाई सुरेश का नोट सामने आने के बाद पुलिस ने इस पूरे मामले की जांच शुरू की।
20 लोगों से पैसा लेता 4 को स्कॉर्पियो बांटकर जीतता भरोसा
पिछले दो तीन महीनों से सोशल मीडिया पर प्रिंस उर्फ बंशीलाल की रीलें भोपालगढ़ और जोधपुर के आसपास के इलाकों में काफी चर्चा में थी, वह 22 लाख रुपए की स्कॉर्पियो सिर्फ 6 लाख रुपए में देने का दावा करता था।
उसने कुछ लोगों को स्कॉर्पियो एस-11 दी भी थी। फिर सोशल मीडिया पर ऐसा प्रचार किया कि स्कॉर्पियो लेने वालों की होड़ लग गई। प्रिंस दावा करता था कि वह क्रिप्टो में रुपए इंवेस्ट करता है। उससे हुए मुनाफे की रकम से वह लोगों को स्कॉर्पियो दे रहा है।

प्रिंस जिन लोगों को स्कॉर्पियो देता था, उनके जरिए मार्केटिंग भी करता था। उसका बड़ा फोकस ग्रामीण इलाकों में होता था।
एसओजी ने 12वीं पास प्रिंस को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो खुलासा हुआ कि वह सैकड़ों लोगों से 55 करोड़ रुपए से ज्यादा ठग चुका है।
शुरू में 20 लोगों ने 6-6 लाख रुपए प्रिंस को दिए थे। उनमें से 4 लोगों को हाथों हाथ नई स्कॉर्पियो S-11 दे दी। फिर 20 और लोगों से पैसा लिया और उनमें से 4 को स्कॉर्पियो दी।
8 लोग नई स्कॉर्पियो लेकर मार्केट में घूमने लगे तो आसपास के जिलों में भी प्रिंस की कंपनी का प्रचार होने लगा।
इसके बाद प्रिंस ने दावा कर प्रचार शुरू किया कि- इस दिवाली के अवसर पर 250 लोगों को स्कॉर्पियो देगा। प्रिंस के इस ऐलान पर राजस्थान के कई जिलों सहित आसपास के राज्य के लोगों ने भी प्रिंस से संपर्क किया और स्कॉर्पियो के लालच में उसकी कंपनी में लाखों रुपए निवेश किया। अब कई पीड़ित धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं।
भास्कर पड़ताल : प्रदेश भर में चल रही कई ‘ठग’ कंपनियां
भास्कर टीम ने प्रिंस की तरह सोशल मीडिया पर लुभावने ऑफर देने वाली कंपनियों की पड़ताल की। ऐसी कई कंपनियां सामने आई जो क्रिप्टो व फॉरेक्स में ट्रेडिंग करती हैं। इनके सैकड़ों हजारों ग्राहक प्रदेश के कई जिलों में है…..

कंपनी द्वारा टारेगट पूरे करने पर इस तरह से लग्जरी कार और गिफ्ट के लुभावने ऑफर दिए जाते हैं।
एजेंट बोला- रूस में रजिस्ट्रेशन, इंवेस्ट करवाओ विदेश घुमाएंगे
भास्कर रिपोर्टर ने घरेलू महिला बनकर निवेश में रुचि दिखाते हुए XPO.ru नाम की एक कंपनी के एजेंट को कॉल किया। एजेंट ने दावा किया कि 1 लाख रुपए के निवेश पर 10 हजार महीना का रिटर्न मिलेगा।
वहीं, 10 लाख एक साथ निवेश पर नवंबर में यूरोप का टूर बिल्कुल फ्री करवाएंगे। अगर अन्य लोगों को कंपनी में जोड़कर उनसे निवेश करवाते हैं तो महंगी गाड़ी गिफ्ट में मिलेगी।

कंपनी के एजेंट ने बातचीत में कई बड़े-बड़े दावे किए।
कंपनी के एजेंट ने फोन पर बताया कि उनके राजस्थान में कई निवेशक हैं। अकेले जोधपुर में 3 हजार लोगों ने पैसा लगा रखा है। जब एजेंट से पूछा गया क्या भारत में कोई रजिस्ट्रेशन है या फिर कंपनी का PAN नंबर या अन्य कोई ऐसा दस्तावेज जो लीगल हो।
तब उसने बताया- भारत में कोई रजिस्ट्रेशन नहीं है, न ही कंपनी भारत में कोई टैक्स भरती है। कंपनी रूस में रजिस्टर्ड है। देशभर में कंपनी के निवेशक हैं।
डीमेट अकाउंट की तरह निवेशक अपना अकाउंट खुलवाते हैं। उसमें निवेश करते हैं। XPO 100 से अधिक गाड़ियां जिनमें मर्सिडीज, रेंज रोवर, जगुआर, लैंड क्रूज आदि बांट चुकी हैं। इसके अलावा बाइक व विदेश के टूर तक करवा चुका है।

प्रमोशन के लिए कंपनी के बड़े-बड़े बैनर लगाकर लोगों को निवेश के झांसे में लिया जाता है।
इनकम टैक्स ऑफिसर बोले- कंपनी कही की हो टैक्स देना जरुरी
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर बीएस माथुर ने टेलिफोनिक बातचीत में बताया कि कंपनी अगर फॉरेन में रजिस्टर्ड है और भारत के लोगों का पैसा निवेश करवा रही है तो उसे टैक्स देना होगा।
ऐसी कंपनियां टैक्स के दायरे में आती हैं। उन्होंने बताया कि इनकम टैक्स विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग बनी है जो ऐसी कंपनियों पर नजर रखती है।
क्रिप्टो करेंसी या हवाला में ट्रांजैक्शन, ठगी के बाद रिकवरी नामुमकिन
साइबर एक्सपर्ट माधव गौड़ की सहायता से जब कंपनी की डिटेल जानी तब सामने आया कि कंपनी रूस में तो रजिस्टर्ड है, लेकिन भारत में इसका कोई वजूद नहीं है।
यह भारतीय बैंक खातों या भारतीय मुद्रा में लेनदेन नहीं करती। कंपनी के एजेंट कैश में पैसा लेते हैं। उसे हवाला के जरिए भिजवाकर क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करवाते हैं।

साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि इस तरह की कंपनियों की पूरी जांच करने के बाद ही इंवेस्टमेंट करने का फैसला लेना चाहिए।
साइबर एक्सपर्ट के अनुसार इस तरह की अधिकांश कंपनियां प्रॉक्सी सर्वर का इस्तेमाल करती हैं। इससे इनका कारोबार पकड़ में नहीं आता है। कुछ ही समय में ये कंपनियां पैसा लेकर फरार हो जाती हैं।
ये क्रिप्टो में ट्रांजैक्शन करती हैं। क्रिप्टो में ट्रांजैक्शन की कोई डिटेल नहीं रहती। कोई धोखाधड़ी होने पर शिकायत कर भी दे तो ट्रांजैक्शन का सबूत नहीं होता।


प्रदेश से भाग चुकी कई कंपनियां, हजारों निवेशकों से करोड़ों की ठगी
जोधपुर के किशोर मेडिकल लाइन में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि सतलाना निवासी दिनेश सिंह व बाड़मेर निवासी खेतसिंह ने सोशल मीडिया पर गाड़ियों की रील दिखा कर और जैसलमेर व अन्य स्थानों पर फाइव स्टार होटलों में मीटिंग व गाला डिनर का आयोजन कर उसे निवेश के लिए प्रोत्साहित किया।

बाएं से तीसरा दिनेश सिंह (कोट-पेंट में) फॉरेक्स एरिना के नाम से ठगी करके फरार हो गया।
फॉरेक्स एरिना नाम की कंपनी में उसने 10 लाख से अधिक का निवेश किया था। पिछले चार साल से कंपनी का कोई पता नहीं। निवेश कराने वाले दिनेश का नंबर बंद है। अब जुलाई माह में कंपनी के खिलाफ बनाड़ थाने में एफआईआर दर्ज करवाई है।
फॉरेक्स एरिना जोधपुर की कंपनी ही थी, जिसने करीब 10 से 12 करोड़ का फ्रॉड किया और अब गायब है। फॉरेक्स एरिना की तरह ट्रेजर एनएफटी, सी बेक्स, आईसी ऑर्गन, बॉट ब्रो आदि कंपनियां हैं जो निवेशकों को लालच देकर निवेश करवा कर अब गायब हो चुकी हैं।

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