हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सोमवार को एकलपीठ के SI भर्ती-2021 रद्द करने के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। जस्टिस एसपी शर्मा और संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने 3 आधार पर यह रोक लगाई।
डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा- सिंगल बेंच ने जिन रिपोर्ट्स को आधार बनाया है। वे रिपोर्ट्स अप्रमाणिक थीं, ऐसे में सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सिंगल बेंच के फैसले की नए सिरे से जांच आवश्यक है।
मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को तय की जाती है, सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए जाते हैं। वहीं, अगली तारीख तक सिंगल बेंच के 28 अगस्त के फैसले की क्रियान्विति पर रोक लगाई जाती है।

3 रिपोर्ट्स जो बनी रोक का आधार जो 3 रिपोर्ट्स एकलपीठ के फैसले का मुख्य आधार बनी थीं। वही, 3 रिपोर्ट इस फैसले पर रोक का भी आधार बनी। डिवीजन बेंच ने अपने आदेश में कहा कि एकलपीठ के याचिकाकर्ताओं ने एसआईटी की 13 अगस्त 2024 की रिपोर्ट याचिका के साथ प्रस्तुत की।
इस रिपोर्ट में कहा गया कि एसआईटी चीफ एडीजी वीके सिंह ने SI भर्ती रद्द करने की सिफारिश की हैं। एकलपीठ ने अपने फैसले में इस रिपोर्ट को व्यापक आधार माना। हालांकि बहस के दौरान यह तथ्य भी आया कि यह रिपोर्ट वीके सिंह के शपथ-पत्र के बिना ही कोर्ट में सब्मिट हुई।
वहीं याचिकाकर्ताओं ने यह रिपोर्ट आरटीआई के तहत भी प्राप्त नहीं की। याचिकाकर्ताओं के पास यह रिपोर्ट कहां से आई। इसका जवाब उनकी ओर से पेश वरिष्ठ एडवोकेट नहीं दे पाए। यह रिपोर्ट पब्लिक डोमेन में भी नहीं थी।
डीजीपी का लेटर भी अप्रमाणिक डिवीजन बेंच ने कहा कि डीजीपी के 22 अगस्त 2024 के जिस लेटर में उन्होंने भर्ती रद्द करने की सिफारिश की और एकलपीठ ने भरोसा किया है। वह लेटर भी याचिकाकर्ताओं की ओर से ही पेश किया गया। यह लेटर भी डीजीपी के शपथ-पत्र के साथ कोर्ट में पेश नहीं हुआ। ऐसे में इसे भी प्रमाणिक नहीं माना जा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स को बनाया आधार डिवीजन बेंच ने कहा कि कैबिनेट सब कमेटी की 10 अक्टूबर 2024 की पहली रिपोर्ट, जिसमें भर्ती रद्द करने की सिफारिश की गई थी। उस पर भी कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स पर भरोसा किया। यह रिपोर्ट भी प्रमाणिक तरीके से कोर्ट में पेश नहीं हुई।
ऐसे में हमारे सामने चुनौती है कि जिन 5 रिपोर्ट्स के आधार पर एकलपीठ ने SI भर्ती को रद्द किया और RPSC सदस्यों के खिलाफ गंभीर टिप्पणियां की। वह तीनों रिपोर्ट ही अप्रमाणिक हैं। ऐसे में हमें नए सिरे से सभी पहलुओं की जांच करने की आवश्यकता है।

SI भर्ती 2021 रद्द करने के आदेश पर रोक के बाद चयनित सब इंस्पेक्टरों ने खुशी जाहिर की थी।
अब जानिए एकलपीठ ने क्या कहा था
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 28 अगस्त को फैसला सुनाते हुए आदेश में कहा था कि इस भर्ती का पेपर पूरे प्रदेश में फैला। पेपर लीक में आरपीएससी के 6 सदस्यों की भूमिका थी।
ब्लूटूथ गैंग के पास भी भर्ती का पेपर पहुंचा था। इन हालातों में इस भर्ती को जारी नहीं रखा जा सकता है।
कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि साल 2025 की भर्ती में इस भर्ती के पद भी जोड़े जाए। वहीं एसआई भर्ती 2021 के सभी अभ्यर्थियों को इसमें फिर शामिल किया जाए।
आरपीएससी को लेकर क्या कहा था?
1. RPSC के तत्कालीन अध्यक्ष की भी गड़बड़ी मानी थी
कोर्ट ने अपने 202 पेज के आदेश में कहा था- इस भर्ती के पेपर लीक होने में आरपीएससी के चेयरमैन सहित 6 सदस्यों की सक्रिय भूमिका भी सामने आई थी। इससे साबित है कि घर के भेदियों ने ही लंका को ढहा दिया था। भर्ती की गोपनीयता तब ही भंग हो गई थी, जब आरपीएससी के पूर्व सदस्य ने हाथ लिखित पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था। आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन संजय श्रोत्रिय के भी मामले में शामिल होने से इसकी गंभीरता बढ़ती है।
2. आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी पर सवाल उठाए थे
श्रोत्रिय ने न केवल रामूराम राईका को उनके बेटे और बेटी के साक्षात्कारों से संबंधित भविष्य की कार्रवाई के बारे में निर्देश दिए थे, बल्कि खुद ने भी साक्षात्कार पैनल में सक्रिय तौर पर भाग लिया था।
कोर्ट ने RPSC के सदस्यों की गंभीर लिप्तता मानते हुए आदेश में कहा था- रामूराम राईका ने बाबूलाल कटारा, संगीता आर्य, मंजू शर्मा और जसवंत राठी से अपने दोनों बच्चों के इंटरव्यू को लेकर बात की थी, जो सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
3. कटारा को इंटरव्यू पैनल में शामिल करना गंभीर अपराध
राईका अपने बच्चों को पास करने के लिए संजय श्रोत्रिय से मिला था और शोभा राईका की फोटो कटारा को दिखाकर ड्रेस भी बताई थी और शोभा राईका के इंटरव्यू पैनल में बाबूलाल कटारा ही था। बेटे देवेश राईका के इंटरव्यू पैनल में संजय श्रोत्रिय था। ऐसे में इस भर्ती की शुचिता नहीं रही है और इसको इसी स्टेज पर रद्द कर दिया जाना चाहिए था।
हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा था- विवादित भर्ती प्रक्रिया के इंटरव्यू पैनल में बाबू लाल कटारा को शामिल करना, अपने आप में एक गंभीर अपराध है। जबकि उदयपुर में बाबू लाल कटारा के खिलाफ जांच चल रही थी।
4.प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक हुआ पेपर था
कोर्ट ने कहा था- आरपीएससी सदस्य ने पेपर प्रिंटिंग प्रेस में पहुंचने से पहले ही लीक कर दिया था। रामूराम राईका ने बाबूलाल कटारा को बताया था कि उसकी बेटी इंटरव्यू में कौनसी ड्रेस पहनकर आएगी, जिससे वो उसे पहचान सके।



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