कोतवाली थाना क्षेत्र, सिरोही
पुलिस को सूचना मिली कि शांतिनगर स्थित संघ कार्यालय में एक साधु पर जानलेवा हमला हुआ है। वहीं, एक अन्य व्यक्ति भी बुरी तरह घायल है।
तत्कालीन थाना अधिकारी रामप्रताप सिंह सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची। थानाधिकारी ने देखा कि कमरे में बनियान-लुंगी पहने एक साधु का खून से लथपथ शव पड़ा था। पूरे शरीर पर धारदार हथियारों के दर्जनों गहरे घाव थे।
दीवार-फर्श, दरी सभी जगह खून फैला था। कमरे में सारा सामान बिखरा हुआ था। ये देखकर पता चल रहा था कि मरने से पहले साधु ने खुद को बचाने के लिए अच्छा-खासा संघर्ष किया था।
पुलिस ने आस-पास जमा लोगों से पूछा तो पता चला कि साधु का नाम अवधेशानन्द है। अवधेशानन्द के सिर, चेहरे, गर्दन, कान, हाथ, सीने सहित कई अंगों पर 30 से 40 गहरे घाव थे।
वहीं, उनके बाएं हाथ में एक छोटा धारदार चाकू रखा हुआ है। चाकू खून से सना हुआ था। नजदीक ही एक खून से सना बांस भी पड़ा था। एफएसएल टीम को भी बुला लिया गया।
इस बीच, दूसरे घायल व्यक्ति को एम्बुलेंस के जरिए पहले सिरोही और फिर उदयपुर रेफर किया गया। वह बयान देने की स्थिति में नहीं था। पुलिस को लोगों ने घायल व्यक्ति का नाम उत्तमगिरी बताया था।

अवधेशानन्द के शरीर के हर हिस्से में घाव थे। पुलिस को आशंका थी कि हमला एक से ज्यादा लोगों ने किया है।
पुलिस को सब कुछ खत्म होने के बाद मिली सूचना
पुलिस को पूरी घटना से ऐसा भी लग रहा था कि सूचना देरी से दी गई है। पुलिस का तर्क था कि मारपीट से पहले तू-तू-मैं-मैं हुई होगी। आवाजें बाहर तक गई होंगी और इतने वार शरीर पर हैं कि काफी चिल्ला-चिल्ली भी हुई होगी। झगड़ा देर तक चला होगा।
अगले दिन यानी 12 नवंबर 2018 को पाली के खिवाड़ी संघ कार्यालय के शांतिलाल ने एफआईआर दर्ज करवाई। पूरे शहर में संघ कार्यालय में हुई इस घटना की सूचना फैल चुकी थी। पुलिस ने तहकीकात शुरू की। पता चला कि घायल उत्तमगिरी संघ का जिला प्रचारक है।
संघ कार्यालय से जुड़े और आस-पास के लोगों से घटना को लेकर पूछताछ की गई तो सामने आया कि साधु अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के बीच झगड़ा हो गया था।
वहीं, जब पुलिस ने पूछा कि घटना की सूचना देरी से क्यों दी गई तो लोगों के पास इसका कोई जवाब नहीं था। कुछ ने पुलिस को बताया कि वे घायल के इलाज के लिए व्यवस्था कर रहे थे, इस कारण समय पर सूचना नहीं दे पाए।

पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि साधु अवधेशानन्द और उत्तमगिरी के बीच झगड़ा हो गया था। -इमेज AI जनरेटेड
घायल पर गहराया शक
पुलिस की जांच में सामने आया कि 40 वर्षीय अवधेशानन्द का असल नाम अवधेश शर्मा है। अवधेश शर्मा उर्फ अवधेशानन्द उत्तर प्रदेश के फैजाबाद का रहने वाला था।
घायल जिला प्रचारक उत्तमगिरी बाड़मेर के रामसर का रहने वाला है। उसकी भी उम्र करीब 40 वर्ष है। शुरुआती जांच में पुलिस को मामला आपसी रंजिश के चलते झगड़े का लग रहा था।
पुलिस की जांच में सामने आया कि साधु का चरित्र साफ सुधरा था। किसी तरह का नशा भी नहीं करता था। पुलिस काे शक था कि उत्तमगिरी ने ही धारदार हथियारों से हमला कर अवधेशानन्द की हत्या की है। लेकिन बड़ा सवाल था कि हत्या में सिर्फ उत्तमगिरी ही था या अन्य लोग भी शामिल थे। पुलिस ने इसे लेकर अपनी जांच और तेज कर दी।
इधर, अवधेशानन्द पर हमला करने और उनकी हत्या करने को लेकर उत्तमगिरी खुद को निर्दोष बता रहा था। उसका कहना था कि उसे झूठा फंसाया जा रहा है। उसने कोई अपराध नहीं किया है।
उसका कहना था कि उसके ऊपर अवधेशानन्द ने हमला किया था और उसने केवल खुद का बचाव किया। इस झगड़े के दौरान मौके पर और भी लोग थे, जो मारपीट में शामिल हो गए थे।

पुलिस को उत्तमगिरी पर शक था, जबकि वह खुद को निर्दोष बता रहा था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आए 35 घाव, गर्दन की नलियां कटीं
पुलिस ने अवधेशानन्द के करीबी अशोक से पूछताछ की। उसने पुलिस को बताया कि घटना से एक दिन पहले वह अवधेशानन्द से मिला था।
अवधेशानन्द ने इस मुलाकात के दौरान कहा कि संघ के जिला प्रचारण उत्तमगिरी से उसका मन-मुटाव चल रहा है। अवधेशानन्द ने कहा कि उत्तमगिरी उससे चिढ़ता है।
यह भी कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है, मन-मुटाव चलता रहता है, सब ठीक हो जाएगा। अशोक ने कहा, लेकिन अवधेशानन्द ने उसे यह नहीं बताया कि आखिर किस बात या मुद्दे को लेकर दोनों के बीच विवाद चल रहा था।
इस बीच पुलिस को मृतक अवधेशानन्द की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी मिल गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ था कि मृतक के सिर, चेहरे, गर्दन, बाहों से लेकर जांघों तक पर चाकुओं से वार किए गए थे।
सिर पर भी बड़ा फ्रैक्चर था। शरीर पर 35 गहरी व कम गहरी चोटें पाई गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के फ्रैक्चर और गर्दन पर धारदार व गहरे वार के कारण नलियों का क्षतिग्रस्त (कट) हो जाना मौत का कारण माना गया।
लोगों से पूछताछ और तथ्यों के आधार पर पुलिस ने एक थ्यौरी बनाई कि शायद उत्तमगिरी ने ही 11 नवम्बर, 2018 को रात 8 बजे संघ कार्यालय में अवधेशानन्द गिरी को बुलाया था।
जब अवधेशानन्द गिरी ऑफिस पहुंचा होगा, तो चाकू से उस पर इतने गहरे वार किए गए, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने उत्तमगिरी को 18 नवम्बर, 2018 को गिरफ्तार कर लिया।

11 नवंबर 2018 को घटना वाली रात मर्डर की सूचना पर पुलिस सिरोही में संघ कार्यालय में पहुंची।
मृतक साधु अवधेशानन्द के हाथों में मिले छोटे चाकू ने साजिश का पर्दा फाश कर दिया…
अब पुलिस को इन सवालों के जवाब ढूंढने थे…
- मतृक अवधेशानन्द और आरोपी उत्तमगिरी के बीच आखिर किस बात की रंजिश थी?
- क्या ये रंजिश इतनी गहरी थी कि वे एक दूसरे की हत्या कर दें?
- यह भी पता करना था कि अकेले उत्तमगिरी ने अवधेशानन्द के शरीर पर इतनी चोटें पहुंचाई या और लोग भी शामिल थे?
- और हाथ में चाकू मिलना क्या सामान्य बात थी?
कल पढ़िए पार्ट-2

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