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ये पीड़ा है भरतपुर के किसानों की। करौली जिले से छोड़े गए पांचना डैम के पानी ने यहां के गांवों में जमकर तबाही मचाई।

गंभीरी नदी के किनारे खेतों में लगी बाजारा, ज्वार और मिर्च की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। पांचना डैम की क्षमता से तीन गुना पानी इस बार छोड़ा गया था, जिसने इस इलाके के पूरे खेत डूबा दिए।

हालात ये है कि अभी भी खेतों में दो से तीन फीट तक पानी भरा है। किसानों को चिंता सता रही है कि इस बार परिवार को कैसे पालेंगे और कब इस नुकसान की भरपाई होगी।

यह अजान बांध है। यहां पर सेवला डेम से पानी आता है। इस बांध का पानी आस-पास के खेतों में पहुंचा।

यह अजान बांध है। यहां पर सेवला डेम से पानी आता है। इस बांध का पानी आस-पास के खेतों में पहुंचा।

पढ़िए ये खास रिपोर्ट

मन कर रहा सुसाइड कर लूं

हलैना इलाके के आमोली गांव निवासी किसान अमर सिंह ने 7 बीघे में बाजरा और ज्वार के फसल की बुवाई की थी। पांचना बांध से छोड़ा गया पानी खेतों में डेढ़ से दो फीट तक भरा है।

हालात ये हो गए हैं कि फसल पूरी तरह से गल गई है। अमर सिंह ने कहा कि बाजरे की फसल पानी में गिरने के बाद उसके अंकुर फूट गए। जिससे फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई।

अब मेरा सबसे बड़ा दुख ये है कि परिवार को कैसे पालूंगा। बारिश का पानी खेतों में भरने के बाद कुछ भी नहीं बचा। सारी फसल बर्बाद हो गई। अब मेरा मन कर रहा है कि फांसी लगाकर सुसाइड कर लूं।

अमर सिंह ने बताया- 7 बीघा में 40 हजार रुपए का खर्च आया था। यदि नुकसान नहीं होता तो 7 बीघे में ज्वार और बाजरे की 18 से 20 क्विंटल फसल होती। इस समय मंडी में बाजरे के भाव 1400 रुपए प्रति क्विंटल है। ऐसे में फायदा भी होता लेकिन इस बार सबकुछ बर्बाद हो गया।

खेतों में अब भी डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा है। किसानों की फसलें खराब हो चुकी हैं।

खेतों में अब भी डेढ़ से दो फीट तक पानी जमा है। किसानों की फसलें खराब हो चुकी हैं।

परिवार को खिलाने के लिए भी बाजरा नहीं बचा

किसान सतीश सिंह बिजवारी गांव के रहन वाले हैं। सतीश सिंह ने बताया- इस बार बाजरे की फसल की थी। खेतों में डेढ़ दो फीट तक पानी भरा हुआ है। 16 बीघा में बाजरा, तिल और ज्वार की फसल की थी। 90 प्रतिशत तक फसलें तबाह हो गईं।

खेत के कुछ हिस्से में थोड़ी-थोड़ी फसल बची है, लेकिन वे भी काम की नहीं है। इस बार हमें काफी नुकसान हुआ है। बाजरे की फसल तो पूरी खत्म ही हो गई।

बच्चों के लिए भी हम बाजरा नहीं बचा पाए तो क्या करेंगे। फसल में कुछ नहीं बचा। आप अनुमान लगाकर देखो हमारे दिल पर क्या ​गुजर रही है। परिवार के 10 से 11 सदस्यों की जिम्मेदारी है। अब सबकुछ भगवान के भरोसे है।

बाजरे की फसल तो अब खाने लायक भी नहीं बची। समझ नहीं आ रहा है कि अब क्या करें और क्या नहीं। परिवार के ​खाने तक के लिए कुछ नहीं बचा।

बाजरा की फसल पूरी तरह से गल चुकी है। किसानों को इस बार परिवार के लिए भी बाजरा नहीं मिल पाया है।

बाजरा की फसल पूरी तरह से गल चुकी है। किसानों को इस बार परिवार के लिए भी बाजरा नहीं मिल पाया है।

बुराना गांव में 80 प्रतिशत फसल नष्ट

बुराना गांव के किसान मोहन सिंह ने बताया कि गांव में गंभीरी नदी के पानी से सबकुछ तहस-नहस कर दिया। गांव की 80 प्रतिशत फसलें खत्म हो गई हैं। गांव में ज्यादा किसान मिर्च की खेती करते हैं, इसके अलावा बाजरे की बुवाई की थी।

गंभीर नदी के पानी से सभी फसलें गल गईं। अब भी कई खेतों डेढ़ से दो फीट तक पानी भरा हुआ है। इस बार 3 बीघा में मिर्च की खेती की थी। इसे बेचने के बाद 3 लाख रुपए आते। लेकिन, बारिश और नदी के पानी की वजह से सब खराब हो गया।

1 बीघा में 7 हजार मिर्च के पौधे लग जाते हैं, लेकिन इस बार कुछ नहीं मिला। प्रशासन ने भी अभी तक कोई सर्वे नहीं करवाया है। पिछले साल भी बारिश के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ था।

ये करौली का पांचना बांध है। इस सीजन में 7वीं बार इसके गेट खोले गए हैं।

ये करौली का पांचना बांध है। इस सीजन में 7वीं बार इसके गेट खोले गए हैं।

पांचना से भरतपुर में 6 हजार MCFT पानी आया

दरअसल, करौली के पांचना बांध से 6 हजार MCFT से भी ज्यादा पानी भरतपुर की गंभीर नदी में छोड़ा गया था। ये पानी नदी के रास्ते बयाना से होते हुए उच्चैन के सेवला हेड पहुंचा। सेवला डैम से पांचना के पानी को भरतपुर के अजान बांध और रूपवास की गंभीर नदी की तरफ डायवर्ट किया गया था। अब भी पांचना बांध के दो गेट खुले और लगातार पानी गंभीरी नदी में छोड़ा जा रहा है।

अजान बांध से पानी केवलादेव घना पक्षी बिहार में भेजा गया। अभी अजान बांध और केवलादेव की पूर्ति होने के बाद बाद सारा पानी रूपवास की गंभीर नदी की तरफ डायवर्ट किया जा रहा है।

किसानों का कहना है कि बाजरा के सिट्टे काले पड़ चुके हैं। खेतों में फसल के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है।

किसानों का कहना है कि बाजरा के सिट्टे काले पड़ चुके हैं। खेतों में फसल के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है।

डेम और नदी के आसपास के खेतों में भरा पानी

उच्चैन के सेवला डेम के पास और रूपवास गंभीर नदी के रास्ते में आने वाले खेत पांचना बांध के पानी से लबालब हो गए हैं। क्योंकि गंभीर नदी में जगह-जगह मोरे (कट) बने हुए हैं। पानी ओवरफ्लो हो जाने के कारण इन कट को खोल दिया गया था।

इसके कारण किसानों के खेतों में पानी भर गया और फसल गल गई। इसके अलावा कई इलाकों में ज्यादा बारिश होने के कारण खेतों में पानी में भर गया। अब तक बांध से इस मानसून सत्र में 6 हजार 576 एमसीएफटी पानी की निकासी हो चुकी है।

इस बार सबसे ज्यादा नुकसान बाजरा की फसल को हुआ है। इसके साथ ही किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ।

इस बार सबसे ज्यादा नुकसान बाजरा की फसल को हुआ है। इसके साथ ही किसानों को लाखों रुपए का नुकसान हुआ।

17 हजार हेक्टेयर में फसल खराब

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेश चंद ने बताया कि भरतपुर जिले में 1 लाख 78 हजार 694 हेक्टेयर में खेती होती है। इसमें 22 हजार हेक्टेयर में ज्वार, 1 लाख 33 हजार हेक्टेयर पर बाजरा, 350 हेक्टेयर पर तिल, 400 हेक्टेयर ग्वार, 23 हजार हेक्टेयर में अन्य फसलों की बुवाई हुई। इस बार करीब 17 हजार हेक्टेयर फसल खराब हुई है। अभी अनुमान लगाया गया है कि 13 हजार हेक्टेयर में बाजरा और 4 हजार हेक्टेयर अन्य फसल खराब हुई है।



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