सूबे के पूर्व मुखिया जी ने आदिवासियों के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और शिक्षा मंत्री को घेर लिया। कालीबाई से लेकर मानगढ़ तक की खबरों के कटिंग लगा डाली। शिक्षा मंत्री जी कोटा में मास्टरों के मोबाइल झपटने में व्यस्त थे। थोड़ा वक्त निकाला और एक्स पर उनको जवाब दिया। मुद्दा तो जैसलमेर में भी गर्म है। यहां विधायक के सामने पूर्व पार्षद ने भरी महफिल में हाहाकार मचा दिया। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी सुनिए…
1. पूर्व सीएम ने आदिवासी मुद्दे पर घेरा, शिक्षामंत्री ने ली मास्टरों की ‘क्लास’
राजस्थान के पूर्व मुखिया ने आदिवासी मुद्दे पर सत्ता पक्ष को खूब घेरा। खरे-खरे सवाल किए- चौथी क्लास में कालीबाई और मानगढ़ के चैप्टर भला क्यों हटाए? शाम होते-होते शिक्षा मंत्रीजी ने कोटा में इसका जवाब दे दिया। बोले-चैप्टर छोटे थे, हमने बढ़ाकर 5वीं क्लास में ले लिया। पूर्व सीएम के मुद्दे पर सफाई देने के बाद शिक्षा मंत्रीजी ‘असल सफाई’ में लग गए।
कोटा शहर के सूरजपोल इलाके के एक सरकारी स्कूल में पहुंच गए। पहले तो अटेंडेंस रजिस्टर उठाया। गणित के मास्टरजी को पता नहीं था कि मंत्रीजी आ धमके हैं, वे फोन में व्यस्त थे। मंत्रीजी ने पकड़ लिया। फिर क्या था। एक-एक टीचर के पास जाकर मोबाइल झपट लिया। मैथ्स वाले महोदय गिड़गिड़ाने लगे, लेकिन सस्पेंड हो ही गए।

2. विधायक महोदय का नाम ‘शांति’, इलाके में अशांति
कोटा के मशहूर विधायक। पहले वाली सरकार में मंत्री रहे। उनके नाम ही ‘शांति’ है। लेकिन विधानसभा क्षेत्र अशांत। गुंडों के गुट एक दूसरे को ढूंढते-फिरते हैं। तमंचा लेकर हर कोई जिन्न बनकर घूमता है। भीमगंजमंडी इलाके में रात 11 बजे बदमाशों की गैंग एक रेस्टोरेंट में घुस गई।
पहले लाठी लिए एक बदमाश घुसा। उसे याद आया कि एंट्री तो मुख्य हीरो की होनी है। उसने खुद को रोका। फिर काली टोपी-काली टीशर्ट में मुख्य हीरो की एंट्री हुई। हाथ में तमंचा। रेस्टोरेंट को उसने सिगरेट की धुएं से भर दिया।
तसल्ली से बैठकर रेस्टोरेंट मालिक से बात करने के मूड में दिख रहा था। लेकिन बात बिगड़ गई। मुख्य हीरो ने फिल्मी अंदाज में तमंचा ताना। रेस्टोरेंट मालिक ने कलई मरोड़ दी। फिर क्या था। गुर्गों का मोरल डाउन हो गया। रेस्टोरेंट में मौजूद लोगों ने गुंडों को कुर्सियों से मार-मारकर खदेड़ा।

3. JEN ने पूर्व पार्षद को दलाल कहा, विधायक के सामने हो गया हंगामा
किस्सा जैसलमेर का है। चर्चा है कि नगर परिषद के JEN सुशील कुमार ने पूर्व पार्षद गिरधर सिंह सोढा को दलाल कह दिया। इतना सुनते ही सोढा साहब बिफर गए।
लेकिन कब और कहां बिफरना है ये उन्हें पता नहीं। नगर परिषद सभागार में शहरी सेवा शिविर का उद्घाटन हो रहा था। विधायक छोटू सिंह भाटी भी बैठे थे। एडीएम-कमिश्नर समेत तमाम अधिकारी भी मौजूद। JEN भी वहीं थे।
सोढा जी उठे और चिल्लाने लगे- ओ सुशील जी, मैंने कौन सा पैसा मांग लिया। मुझे दलाल क्यों बोला। थप्पड़ मारूंगा। सब सकते में आ गए। एक अधिकारी ने बोला- अरे, आप कैसे मारोगे एक अधिकारी को, ये कौन सी बात है।
तब तक विधायकजी को भी पूर्व पार्षद पर गुस्सा आ गया। वे चीख पड़े- अरे यहां कैंप चल रहा है। किस जगह बात कर रहे हो? हमारी यही इज्जत है क्या? चुपचाप बैठ जाओ, नहीं तो बाहर करो इनको।
अब JEN साब की सिट्टी-पिट्टी गुम। बड़ा बखेड़ा हुआ। पूर्व पार्षद का भरोसा नहीं। वे सीधे थाने पहुंचे और पूर्व पार्षद के खिलाफ रिपोर्ट लिखा दी। शहर की सेवा के लिए कैंप लगा था, तमाशे से बोहनी हुई।

4. चलते-चलते…
अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें। यह वक्तव्य कई जगह लिखा होता है। परिवहन विभाग की टीम खुद भूल गई। ट्रक वालों में चर्चा है कि दौसा के लालसोट में टीम उगाही में लगी थी।
एक ट्रक वाले को रोक कर रकम मांग ली। न-नुकर हुई तो कागज फाड़ डाले। इसके बाद एकाध ड्राइवर हंगामा देख जुट गए। ड्राइवरों की टोली इकट्ठी हो गई। अब परिवहन टीम घिर गई।
ड्राइवरों ने फोन निकाल लिए। खाकी वर्दी वाले को खूब धक्के मारे। मोबाइल छीन लिया। ड्राइवरों की हिम्मत इतनी बढ़ गई कि परिवहन विभाग की गाड़ी की चाबी निकाल ली और कागज मांगने लगे।
फिर क्या था। पता नहीं जोश आया या जमीर जागा, वर्दी वाले ने ड्राइवर का गला पकड़ा और हवा में अधर कर दिया। अब जांच हो रही है कि कौन सही था और कौन गलत। बाकी ईमानदार पुलिसवाले इतना तमाशा खड़ा ही नहीं होने देते।

वीडियो देखने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
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